Dr. Rajeev Raj

Dr. Rajeev Raj तपती मन की धरती पर बादल बन छाना है
कसम ?
(3)

कौन अपना है कौन पराया है। इन्सान सारी उम्र यही गणित लगाता रहता है। जबकि अधिकांश लोगों का सच यही है कि जीवन के अनजाने पथ ...
23/06/2026

कौन अपना है कौन पराया है। इन्सान सारी उम्र यही गणित लगाता रहता है। जबकि अधिकांश लोगों का सच यही है कि जीवन के अनजाने पथ पर कब कौन कितने सुकून के पल सौंप दे, कब कौन सा पहर यादगार बना दे, किसी को नहीं पता। यही अनिश्चितता तो असली आनंद है। राजधानी दिल्ली में जहाँ निजी समीकरणों को साधते साधते इंसान कब मशीन बन जाता है उसे ख़ुद पता नहीं चलता वहाँ कोई बेहद आत्मीय भाव से न केवल आपका आतिथ्य सत्कार करे वरन् अपनी सारी व्यस्तताएँ दरकिनार कर आपके लिए समय निकाले तब लगता है कि यही तो वो अपनापन है जिसकी ख़्वाहिश में रिश्तों के न जाने कितने जाल अब तक बुन डाले।
सरल और हँसमुख मनीषा इंजीनियर हैं, BHEL में सेवारत हैं, साहित्यिक गतिविधियों में भी पर्याप्त सक्रियता है। चिराग की रचनात्मकता का कौन मुरीद नहीं। उसकी व्यस्तता भी आसानी से समझी जा सकती है। लेकिन एक निजी यात्रा के दौरान उनके घर जाने पर जो अपनापन महसूस हुआ उसने न केवल कवि परिवार शब्द को सार्थक किया बल्कि स्नेह का ऋणी भी बना लिया। आनंद का प्लावन तो तब हुआ जब मालूम हुआ कि मनीषा-चिराग़ की वैवाहिक वर्षगाँठ है। ये महज़ एक संयोग नहीं हो सकता क्योंकि ऐसे अवसरों का साक्षी होना ही एक अदृश्य लेकिन अहम् रिश्ते का प्रमाण पत्र माना जा सकता है। विभिन्न विषयों पर लंबी सार्थक चर्चाओं के दौरान मनीषा के हाथ का स्वादिष्ट भोजन, अहा !
इस यात्रा के हासिल के रूप में और भी बहुत कुछ है जो क्रमश: साझा करूँगा।
पहले क़ीमती अध्याय के बहुमूल्य क़िरदार
आप दोनों का दाम्पत्य जीवन ऐसे ही प्रतिपल और और रसमय होता रहे। आप दोनों को असीम मंगलकामनाएँ 💐💐💐💐

Chirag Jain
Manisha Shukla

दुनियाँ भले गढ़ी हो रब ने  किंतु  हमें गढ़ने वाले तुम।मेरी हर  अभिलाषा  मन  में  आते ही पढ़ने वाले तुम।माँ ने जनी आत्मा ...
20/06/2026

दुनियाँ भले गढ़ी हो रब ने किंतु हमें गढ़ने वाले तुम।
मेरी हर अभिलाषा मन में आते ही पढ़ने वाले तुम।
माँ ने जनी आत्मा तुमने मुझे आत्मविश्वास दिया है।
पंख दिए माँ ने पर तुमने उड़ने को आकाश दिया है।
तुमसे ऊपर दिखा न कोई यद्यपि ईश्वर बहुत बड़ा है।
रामचरित मानस, गीता से ज़्यादा हमने तुम्हें पढ़ा है।
अक्षर अक्षर ज्यों अनुभव का उपन्यास हो तुम पापा।।

डॉo राजीव राज़

20/06/2026

नियतिवाद, भाग्यवाद, प्रारब्ध कर्म जैसी अनेक दार्शनिक विचारधाराएँ कहती हैं कि ब्रह्मांड में हर घटना (इंसान की गतिविधियां, फैसले, भविष्य) कारणों की श्रृंखला से पहले से तय होती है। इंसान को लगता है कि वह स्वतंत्र फैसले ले रहा है, लेकिन वास्तव में सब कुछ पूर्व-निर्धारित है। मेरे साथ भी ऐसा ही कुछ हुआ है।आप माने या न माने पर सच यही है। जैसे कोई अदृश्य डोर कतपुतली को नचाती है ठीक वैसे ही मैं भी बिना किसी ख़ास काम के एक ऐसी यात्रा पर निकल पड़ा जिसकी कोई पूर्व योजना नहीं थी। हाँ, इतना ज़रूर है कि दो तीन दिन से मन कुछ बेचैन सा था, पर क्यों ? नहीं पता। बस एक बहाना मिला और हम निकल पड़े। यूँ ही बेसबब, बेमक़सद।
मानसी के पास बैठने का मन ज़रूर था, यश के लिए भी मन कुछ परेशान सा था पर ये सब किसी यात्रा को प्रारम्भ करने के लिए पर्याप्त कारण नहीं कहे जा सकते। लेकिन जब यहाँ आ गया और मोबाइल उठाया तब इस पूरी ऊहापोह का कारण समझ में आ गया।
आज एक ऐसी लड़की का जन्म दिन है जो न केवल गंगाजल सी निर्मल मन है वरन् सबके लिए कल्याणमयी भावनाओं से ओतप्रोत भी। सबका भला सोचने वाली प्रेम और ममता से परिपूर्ण। ये अलग बात है विगत कुछ वर्षों से वो कभी तन के तो कभी जीवन के बेहद कठिन दौर से गुज़री है लेकिन मुझे पक्का विश्वास है कि जैसे तन की जंग जीती है, जीवन की भी जीतेगी। तपस्या के ये दिन शीघ्र ही पूरे होंगे और ये सुंदर सी बहादुर लड़की अपनी नैसर्गिक मुस्कुराहट की ख़ुशबू बिखेरती नज़र आएगी। बहरहाल, हम उसका जन्म दिन मनाने के लिए आ चुके हैं।
अरे ! आप लोग मेरी कहानी ही पढ़ते रहेंगे या रेखा जी को जन्म दिन की बधाई भी देंगे 😊
जन्म दिन की खूब खूब शुभकामनाएँ रेखा ! 💐💐💐💐💐💐💐


आर.के.एस. अकैडमी की स्थापना (25 वाँ साल) की कहानीमेरा मानना है कि शिक्षक किसी पद या ज़िम्मेदारी को नहीं, बल्कि मानवीय गु...
19/06/2026

आर.के.एस. अकैडमी की स्थापना (25 वाँ साल) की कहानी
मेरा मानना है कि शिक्षक किसी पद या ज़िम्मेदारी को नहीं, बल्कि मानवीय गुणों से समृद्ध व्यक्तित्व को कहते हैं। ज़रूरी नहीं कि अध्यापन कार्य हेतु नियुक्त सभी लोग सच्चे शिक्षक हों और यह भी क़तई ज़रूरी नहीं कि जो लोग किसी अन्य व्यवसाय में निरत हैं, वे शिक्षक नहीं हो सकते।
जाने-अनजाने कब मेरे मन में शिक्षक बनने का सपना अंकुरित हुआ, पता नहीं। लेकिन किशोरावस्था से यौवन की दहलीज़ तक आते-आते मैंने सदैव यही चाहा कि एक शिक्षक के रूप में जाना जाऊँ। विद्यार्थी जीवन से ही विभिन्न प्रतिष्ठित स्कूलों में लगभग १० वर्षों के अनुभव के बाद मैंने सरकारी शिक्षक होने का गौरव हासिल किया।
प्राइवेट स्कूलों में प्रबंधन/प्रशासन के निर्देशों की सीमाओं में रहकर शिक्षण में जो प्रयोग करना संभव नहीं हो पा रहा था, उन्हें करने की थोड़ी-बहुत स्वतंत्रता मिली तो राष्ट्रपति भवन तक पहुँचने का सपना साकार हुआ। महामहिम राष्ट्रपति डॉ. प्रणव मुखर्जी द्वारा एक शिक्षक के रूप में पुरस्कृत होना मेरे जीवन की सार्थकता का प्रमाण कहा जा सकता है।
तमाम शिक्षण संस्थानों के अनुभवों के आधार पर मैंने पाया कि हमारे शहर में स्कूलिंग की शुरुआत करने वाले बच्चों की मनोविज्ञान समझने वाले स्कूल नहीं हैं। और तब सन् २००३ में इटावा जिले का
पहला रियल प्ले-वे स्कूल शुरू हुआ — आर.के.एस. फाउंडेशन अकैडमी।
इसका उद्देश्य था कि बच्चों को परिवार से कुछ घंटों के लिए अलग होने की प्रक्रिया को सहज और रुचिकर बनाया जाए तथा एक ऐसा वातावरण दिया जाए जिसमें बच्चे की जिज्ञासा स्वतः जागृत हो और बच्चा धीरे-धीरे सीखने की प्रक्रिया में शामिल हो सके।
शहर में पहली बार किसी स्कूल के हर कमरे की दीवारें, छत और फर्नीचर चित्रों तथा रंग-बिरंगे दृश्यों से सजाए गए थे। दिल्ली से विशेषज्ञ पेंटर बुलाकर एक वास्तविक रियल प्ले-वे स्कूल बनाया गया। शहर भर से लोग इसे देखने आते थे।
किसी भी नए विचार या प्रयोग के साथ जो होता है, वही हमारे स्कूल के साथ भी हुआ। “सिर्फ़ खेल खिलाने से क्या होगा, कुछ पढ़ाओ-लिखाओ भी तो फीस देते भी ठीक लगे” जैसे जुमले हावी हुए। परिणामस्वरूप हमें बीच का रास्ता निकालना पड़ा और प्रयोगात्मक तथा पारंपरिक शिक्षण पद्धति में समन्वय स्थापित करना पड़ा।
और फिर स्कूल का नाम हुआ — आर.के.एस. अकैडमी, विजय नगर, इटावा।
🙏 आगे की कहानी अगले अंक में 🙏
Etawah इटावा





RKS Aacademy A Play School विजय नगर इटावा

लोकतंत्र का मतलब नियमित, निष्पक्ष और प्रतिस्पर्धी चुनाव है, जिसमें जनता सरकार बदल सकती है। Adam Przeworski का प्रसिद्ध व...
17/06/2026

लोकतंत्र का मतलब नियमित, निष्पक्ष और प्रतिस्पर्धी चुनाव है, जिसमें जनता सरकार बदल सकती है। Adam Przeworski का प्रसिद्ध वाक्य है: “Democracy is a system in which parties lose elections.” यानी सच्चा लोकतंत्र तब है जब सत्ता पक्ष हार भी स्वीकार करे और विपक्ष को मौका मिले। एक पार्टी का dominance (प्रभुत्व) गलत नहीं, अगर वह वोटों से हासिल हो और संस्थाएं (न्यायपालिका, मीडिया, चुनाव आयोग) स्वतंत्र रहें।
भारत वर्ष में स्वतंत्रता के बाद लम्बे समय तक कांग्रेस का एक-पार्टी प्रभुत्व (one-party dominance) था। जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी आदि के समय में यह सामान्य था। लेकिन 1967, 1977 (इमरजेंसी के बाद हार) और 1989 के बाद गठबन्धन युग शुरू हुआ। जिसे लोकतन्त्र पर पहली चोट कहा जा सकता है। परस्पर विरोधी विचारधारा के दल सत्ता हासिल करने के लिए जनता की पसंद-नापसंद को दरकिनार करते हुए एक साथ सरकार चलाते हैं और सिर्फ़ व्यक्तिगत हितों को साधते हैं।
2014 और 2019 में BJP ने अकेले बहुमत हासिल किया। लेकिन 2024 में बहुमत गंवाया फिर भी गठबंधन के दम पर सत्ता बरकरार रखी। बीजेपी का मिशन-2047, एक पार्टी प्रभुत्व बनाने और येन केन प्रकारेण सत्ता में बने रहने की ज़िद ही है। एक पार्टी प्रभुत्व लोकतन्त्र को (sweet poison) मीठा ज़हर देकर आम जन-जीवन को किस हद तक बर्बाद कर सकता है, ये प. बंगाल के हालात देखकर आसानी से समझा जा सकता है जहाँ स्वतंत्रता के बाद से लगातार 25 साल कांग्रेस, लगातार 34 साल लेफ्ट और लगातार 15 साल टीएमसी सत्ता में रही। हालाँकि 1977 चुनाव में इन्दिरा गाँधी का हार जाना और 2024 चुनाव के बाद बीजेपी की सीटें घट जाना जहाँ एक ओर लोकतन्त्र की ताक़त दिखा रहा है वहीं दूसरी ओर वर्तमान समय में बीजेपी की operation lotus (या कमल ऑपरेशन) रणनीति के तहत AAP के 7 राजसभा सांसदों का (Raghav Chadha सहित) BJP में शामिल होना, TMC के 20 लोकसभा सांसदों का विद्रोह कर विलय का ऐलान करना एक पार्टी प्रभुत्व की ज़िद पूरी करने के रूप में देखा जा रहा है। ये घटनाएँ भारतीय लोकतंत्र के लिए किसी भी दृष्टिकोण से सही नहीं कही जा सकतीं।
ग़ौरतलब है कि भारत की वर्तमान राजनैतिक स्थितियों यथा संस्थाओं का कथित कमजोर होना (मीडिया, विपक्ष पर दबाव, ED/CBI का इस्तेमाल), धार्मिक ध्रुवीकरण और अल्पसंख्यक मुद्दे आदि के मद्देनज़र कई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स (V-Dem, Freedom House, EIU Democracy Index) भारत को “flawed democracy” या “electoral autocracy” श्रेणी में रखती हैं।
ऐसे में देश के जागरूक नागरिकों को निजी स्वार्थ, धर्म और व्यापार से परे रहकर आने वाली पीढ़ियों के बेहतर भविष्य के लिए मज़बूत संवैधानिक और आदर्श लोकतान्त्रिक परिवेश के निर्माण में योगदान देना ही होगा और दिनकर जी की इन पंक्तियों में निहित चेतावनी को समझना होगा -
*समर शेष है, नहीं पाप का भागी केवल व्याध।*
*जो तटस्थ हैं, समय लिखेगा उनका भी अपराध।।*





Good Morning Everyone
Following Love

16/06/2026

रिश्तों के यथार्थ को परिभाषित करता दर्शन




15/06/2026

नयन क़ीमती हीरे

15/06/2026

चंपक चंपक
हाँ बाबा
चंदा चोरी ? ना बाबा
(सब राम जी की लीला है)
😁🤪😁

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