23/06/2026
कौन अपना है कौन पराया है। इन्सान सारी उम्र यही गणित लगाता रहता है। जबकि अधिकांश लोगों का सच यही है कि जीवन के अनजाने पथ पर कब कौन कितने सुकून के पल सौंप दे, कब कौन सा पहर यादगार बना दे, किसी को नहीं पता। यही अनिश्चितता तो असली आनंद है। राजधानी दिल्ली में जहाँ निजी समीकरणों को साधते साधते इंसान कब मशीन बन जाता है उसे ख़ुद पता नहीं चलता वहाँ कोई बेहद आत्मीय भाव से न केवल आपका आतिथ्य सत्कार करे वरन् अपनी सारी व्यस्तताएँ दरकिनार कर आपके लिए समय निकाले तब लगता है कि यही तो वो अपनापन है जिसकी ख़्वाहिश में रिश्तों के न जाने कितने जाल अब तक बुन डाले।
सरल और हँसमुख मनीषा इंजीनियर हैं, BHEL में सेवारत हैं, साहित्यिक गतिविधियों में भी पर्याप्त सक्रियता है। चिराग की रचनात्मकता का कौन मुरीद नहीं। उसकी व्यस्तता भी आसानी से समझी जा सकती है। लेकिन एक निजी यात्रा के दौरान उनके घर जाने पर जो अपनापन महसूस हुआ उसने न केवल कवि परिवार शब्द को सार्थक किया बल्कि स्नेह का ऋणी भी बना लिया। आनंद का प्लावन तो तब हुआ जब मालूम हुआ कि मनीषा-चिराग़ की वैवाहिक वर्षगाँठ है। ये महज़ एक संयोग नहीं हो सकता क्योंकि ऐसे अवसरों का साक्षी होना ही एक अदृश्य लेकिन अहम् रिश्ते का प्रमाण पत्र माना जा सकता है। विभिन्न विषयों पर लंबी सार्थक चर्चाओं के दौरान मनीषा के हाथ का स्वादिष्ट भोजन, अहा !
इस यात्रा के हासिल के रूप में और भी बहुत कुछ है जो क्रमश: साझा करूँगा।
पहले क़ीमती अध्याय के बहुमूल्य क़िरदार
आप दोनों का दाम्पत्य जीवन ऐसे ही प्रतिपल और और रसमय होता रहे। आप दोनों को असीम मंगलकामनाएँ 💐💐💐💐
Chirag Jain
Manisha Shukla