21/06/2026
मेरे ब्राह्मण भाइयों, आज हमारा हृदय रक्त के आंसू रो रहा है। भारत तिवारी की निर्मम हत्या केवल एक व्यक्ति की हत्या नहीं है, बल्कि यह हमारे पूरे ब्राह्मण समाज के स्वाभिमान, हमारी सुरक्षा और हमारे अस्तित्व पर एक सीधा और गहरा प्रहार है।हम कब तक यूं ही मौन रहकर अपनों की अर्थियाँ उठाते रहेंगे? हमारी सहिष्णुता, हमारी सज्जनता और हमारा शास्त्र-ज्ञान आज हमारी सबसे बड़ी कमजोरी मान लिया गया है। इतिहास गवाह है कि जब-जब ब्राह्मण असुरक्षित हुआ है, तब-तब समाज और राष्ट्र का पतन निश्चित हुआ है। आज अगर हम अपने भाई की इस शहादत पर भी एक सुर में नहीं गरजे, अपनी आवाज बुलंद नहीं की, तो आने वाली नस्लें हमें कभी माफ नहीं करेंगी।अब समय आ गया है कि हम शास्त्रों के साथ-साथ शस्त्र की उस चेतना को भी जागृत करें जो भगवान परशुराम ने हमें सिखाई थी। अत्याचार को सहना भी उतना ही बड़ा पाप है जितना अत्याचार करना। मैं, सुशांत कुमार पांडेय, आप सभी से यह करबद्ध आह्वान करता हूँ कि अपनी राजनीतिक, व्यक्तिगत और क्षेत्रीय दूरियों को मिटाकर एक जाजम पर आइए। जब तक भारत तिवारी के हत्यारों को फांसी के फंदे तक नहीं पहुँचाया जाता, तब तक हमारा यह आक्रोश शांत नहीं होना चाहिए।जागो ब्राह्मणों, जागो! अपने बिखराव को छोड़ो और एक अभेद्य दीवार बनो ताकि भविष्य में कोई भी हमारे समाज की तरफ आंख उठाने की हिम्मत न कर सके। न्याय की इस लड़ाई में हमें अग्रिम पंक्ति में खड़े होकर लड़ना होगा।न्याय की इस जंग में आपका भाई,सुशांत कुमार पांडेय"