20/03/2026
हाल ही में गुजरात के राजकोट से एक खबर आई जहाँ 3 साल के बच्चे 'अंश' का मुंडन संस्कार हुआ। बच्चा डरे नहीं, इसलिए उसके माता-पिता और पूरे परिवार ने भी अपने सिर मुंडवा लिए।
सुनने में यह 'फैमिली गोल' और अटूट प्यार लग सकता है, लेकिन क्या वाकई यह सही दिशा है?
यहाँ कुछ बातें सोचने वाली हैं
चुनौतियों का सामना करना कब सीखेगा बच्चा?
जीवन का मतलब ही नई और असहज परिस्थितियों का सामना करना है। अगर छोटी-सी बात (बाल कटवाने) के लिए पूरा परिवार खुद को बदल ले, तो बच्चा यह कभी नहीं सीख पाएगा कि डर का सामना अकेले कैसे किया जाता है।
दिखावा बनाम सीख🤔
क्या हम बच्चे को मानसिक रूप से मजबूत बनाने के बजाय उसे 'सॉफ्ट' बना रहे हैं? आज मुंडन है, कल स्कूल का पहला दिन होगा, परसों विदेश पढ़ाई के लिए जाना होगा। क्या तब भी पूरा परिवार उसके पीछे-पीछे जाएगा?
प्रैक्टिकल अप्रोच की कमी - बच्चे को तैयार करना, उसे समझाना और उसके मन से डर निकालना पैरेंटिंग का हिस्सा है। उसके साथ खुद भी वही काम करना समस्या का समाधान नहीं, बल्कि उसे टालना है।
प्यार और सुरक्षा देना माता-पिता का कर्तव्य है, लेकिन उसे इस कदर 'प्रोटेक्ट' करना कि वह खुद के अस्तित्व को दुनिया से अलग न देख सके, भविष्य में उसके आत्मविश्वास के लिए घातक हो सकता है। दुनिया में उसे अपनी लड़ाइयाँ खुद लड़नी होंगी, और इसकी शुरुआत इन्हीं छोटे-छोटे डरों को जीतने से होती है।