कविता कुंज

कविता कुंज कविता, हिंदी, poem,

30/12/2025

तू चलना तो आरम्भ कर
मार्ग भी मिलेंगे
मार्गदर्शक भी मिलेंगे
तू चलना तो आरम्भ कर

मंजिल भी मिलेगी
किनारे भी मिलेंगे
भटकेगा गर राह में
तो सहारे भी मिलेंगें
मिलेगा कहीं अंधेरा भी तो
दीपक दिखाने वाले भी मिलेंगें
तू चलना तो आरम्भ कर

कठिन मोड़ भी मिलेंगे
ऊंचे पहाड भी मिलेंगे तो
शीतल झरने भी मिलेंगें
घने जंगलो के साये भी मिलेंगे तो
सुंदर फूलों के बाग भी मिलेंगे
तू चलना तो आरम्भ कर

मुसाफिर भी बहुत मिलेंगे
कुछ गिराने वाले तो
बहुत उठाने वाले भी मिलेंगे
मंजिल भी मिलेगी
खुशियों के द्वार भी खुलेंगे
तू चलना तो आरम्भ कर
तू चलना तो आरम्भ कर

Written by
Govind Sangal
9205070871

29/12/2025

एक कप चाय

एक कप चाय अपनों के साथ
चाय तो सिर्फ एक बहाना है
मकसद तो अपनों के साथ वक़्त बिताना है
दिल का हाल सुनना और बताना है
जब दिल खुश हो उनके साथ चाय पीते हैं
दर्द दिल में हो तो भी वही याद आते हैं
मीठी चाय मीठी-मीठी बातें
बिताया हुआ वो वक़्त अपनों के साथ
एक कप चाय अपनों के साथ
चाय तो सिर्फ एक बहाना है
मकसद तो गैरों को भी अपना बनाना है
मित्रों के घर बार-बार
जब मन करे तब
चाय माँगना तो सिर्फ एक बहाना है
मकसद तो अपना हक़ जताना है
चाय तो सिर्फ एक बहाना है
मकसद तो पलों को यादगार बनाना है
बस एक कप चाय अपनों के साथ
दूरियां सारी मिट जाती अपनों के साथ

Govind Sangal
9205070871

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