30/12/2025
तू चलना तो आरम्भ कर
मार्ग भी मिलेंगे
मार्गदर्शक भी मिलेंगे
तू चलना तो आरम्भ कर
मंजिल भी मिलेगी
किनारे भी मिलेंगे
भटकेगा गर राह में
तो सहारे भी मिलेंगें
मिलेगा कहीं अंधेरा भी तो
दीपक दिखाने वाले भी मिलेंगें
तू चलना तो आरम्भ कर
कठिन मोड़ भी मिलेंगे
ऊंचे पहाड भी मिलेंगे तो
शीतल झरने भी मिलेंगें
घने जंगलो के साये भी मिलेंगे तो
सुंदर फूलों के बाग भी मिलेंगे
तू चलना तो आरम्भ कर
मुसाफिर भी बहुत मिलेंगे
कुछ गिराने वाले तो
बहुत उठाने वाले भी मिलेंगे
मंजिल भी मिलेगी
खुशियों के द्वार भी खुलेंगे
तू चलना तो आरम्भ कर
तू चलना तो आरम्भ कर
Written by
Govind Sangal
9205070871