23/01/2026
पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की, तो चारों ओर गहरा सन्नाटा था। पेड़-पौधे, जीव-जंतु सब मौन थे, किसी के पास 'आवाज़' नहीं थी। तब ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का और एक श्वेत वस्त्र धारिणी देवी प्रकट हुईं। जैसे ही उन्होंने अपनी वीणा के तार छेड़े, ब्रह्मांड के उस सन्नाटे को पहली बार 'शब्द', 'स्वर' और 'संगीत' मिला। 🎼
इसलिए आज का दिन केवल बसंत के आगमन का नहीं, बल्कि अज्ञानता के अंधेरे से ज्ञान के प्रकाश की ओर जाने का दिन है। आज के दिन हम उस शक्ति को नमन करते हैं, जिसने हमें बोलने, समझने और सृजन करने की क्षमता दी। 🙏📚