Full Gazal Songs

Full Gazal Songs Main un bhooli-bisri ghazalon ko suron ka libaas pehna kar, naye andaaz mein naye dilon tak pahuchata hoon.

Shayari jo kabhi kitaabon mein thi, ab gaane ban kar aapke dil tak aa rahi hai.

24/10/2025

चेहरे से नुमायाँ है एक एक अदा ग़म की
इंसाँ जिसे कहते हैं तस्वीर है मातम की

क्यों हम को डराते हो आशोब-ए-जहन्नुम से
दुनिया भी तो आख़िर है इक शक्ल जहन्नुम की

मजबूरी-ओ-माज़ूरी महरूमी-ओ-नाकामी
आख़िर कोई हद भी है इस सिलसिला-ए-ग़म की

हर आन मुक़ाबिल है ये महर-ए-दरख़्शाँ के
जुरअत तो कोई देखे इक क़तरा-ए-शबनम की

जन्नत से निकल कर फिर जन्नत न मिली उस को
क्या क्या अभी लिक्खा है तक़दीर में आदम की

दरकार है गेती को फिर ताज़ा लहू शायद
सुर्ख़ी यही कहती है अफ़साना-ए-आलम की

गिर्दाब में ऐ 'जौहर' ये किस का सफ़ीना है
मौजों के तलातुम में आवाज़ है मातम की
by CHANDRA PARKASH JAUHAR BIJNAURI

24/10/2025

जब भी उन से कलाम होता है
हर सुख़न ना-तमाम होता है

इश्क़ जिस के हज़ार मा'नी हैं
एक सादा पयाम होता है

वो नफ़स जिस में तेरी याद न हो
आशिक़ी में हराम होता है

ग़म की अज़्मत न जानने वालो
ग़म का भी इक मक़ाम होता है

कूचा-ए-दोस्त का हर इक ज़र्रा
क़ाबिल-ए-एहतिराम होता है

मौत गो तल्ख़ है मगर इस से
इक सुकून-ए-दवाम होता है

आलम-ए-बे-ख़ुदी में ऐ 'जौहर'
उन से अक्सर कलाम होता है
by CHANDRA PARKASH JAUHAR BIJNAURI

24/10/2025

इस से पहले कि बे-वफ़ा हो जाएँ
क्यूँ न ऐ दोस्त हम जुदा हो जाएँ

तू भी हीरे से बन गया पत्थर
हम भी कल जाने क्या से क्या हो जाएँ

तू कि यकता था बे-शुमार हुआ
हम भी टूटें तो जा-ब-जा हो जाएँ

हम भी मजबूरियों का उज़्र करें
फिर कहीं और मुब्तला हो जाएँ

हम अगर मंज़िलें न बन पाए
मंज़िलों तक का रास्ता हो जाएँ

देर से सोच में हैं परवाने
राख हो जाएँ या हवा हो जाएँ

इश्क़ भी खेल है नसीबों का
ख़ाक हो जाएँ कीमिया हो जाएँ

अब के गर तू मिले तो हम तुझ से
ऐसे लिपटें तिरी क़बा हो जाएँ

बंदगी हम ने छोड़ दी है 'फ़राज़'
क्या करें लोग जब ख़ुदा हो जाएँ
by AHMAD FARAZ

24/10/2025

ये लगता है अब भी कहीं कुछ बचा है
तुम्हारा दिया ज़ख़्म अब तक हरा है

कहो कौन सी शक्ल देखोगे अब तुम
ये चेहरा तो इक आवरन से ढका है

लगा है ज़माना इबादत में जिस की
वो रहता कहाँ है तुम्हें कुछ पता है

गुनाहों से तौबा करो वक़्त रहते
वगर्ना तो दोज़ख़ का रस्ता खुला है

मोहब्बत मोहब्बत मोहब्बत मोहब्बत
अमाँ यार छोड़ो ये हल्का नशा है

भलाई करो तो मिले है बुराई
ये क़िस्सा मिरी ज़िंदगी से जुड़ा है

ग़लत-फ़हमियाँ 'मीत' रक्खो न दिल में
वही सच नहीं जितना तुम ने सुना है
ये लगता है अब भी कहीं कुछ बचा है
तुम्हारा दिया ज़ख़्म अब तक हरा है

कहो कौन सी शक्ल देखोगे अब तुम
ये चेहरा तो इक आवरन से ढका है

लगा है ज़माना इबादत में जिस की
वो रहता कहाँ है तुम्हें कुछ पता है

गुनाहों से तौबा करो वक़्त रहते
वगर्ना तो दोज़ख़ का रस्ता खुला है

मोहब्बत मोहब्बत मोहब्बत मोहब्बत
अमाँ यार छोड़ो ये हल्का नशा है

भलाई करो तो मिले है बुराई
ये क़िस्सा मिरी ज़िंदगी से जुड़ा है

ग़लत-फ़हमियाँ 'मीत' रक्खो न दिल में
वही सच नहीं जितना तुम ने सुना है
by AMIT SHARMA MEET

23/10/2025

हंगामा है क्यूँ बरपा थोड़ी सी जो पी ली है
डाका तो नहीं मारा चोरी तो नहीं की है

ना-तजरबा-कारी से वाइ'ज़ की ये हैं बातें
इस रंग को क्या जाने पूछो तो कभी पी है

उस मय से नहीं मतलब दिल जिस से है बेगाना
मक़्सूद है उस मय से दिल ही में जो खिंचती है

ऐ शौक़ वही मय पी ऐ होश ज़रा सो जा
मेहमान-ए-नज़र इस दम इक बर्क़-ए-तजल्ली है

वाँ दिल में कि सदमे दो याँ जी में कि सब सह लो
उन का भी अजब दिल है मेरा भी अजब जी है

हर ज़र्रा चमकता है अनवार-ए-इलाही से
हर साँस ये कहती है हम हैं तो ख़ुदा भी है

सूरज में लगे धब्बा फ़ितरत के करिश्मे हैं
बुत हम को कहें काफ़िर अल्लाह की मर्ज़ी है

ता'लीम का शोर ऐसा तहज़ीब का ग़ुल इतना
बरकत जो नहीं होती निय्यत की ख़राबी है

सच कहते हैं शैख़ 'अकबर' है ताअत-ए-हक़ लाज़िम
हाँ तर्क-ए-मय-ओ-शाहिद ये उन की बुज़ुर्गी है
by AKBAR ALLAHABADI

23/10/2025

ख़ाक है मेरा बदन ख़ाक ही उस का होगा
दोनों मिल जाएँ तो क्या ज़ोर का सहरा होगा

फिर मिरा जिस्म मिरी जाँ से जुदा है देखो
तुम ने टाँका जो लगाया था वो कच्चा होगा

तुम को रोने से बहुत साफ़ हुई हैं आँखें
जो भी अब सामने आएगा वो अच्छा होगा

रोज़ ये सोच के सोता हूँ कि इस रात के बाद
अब अगर आँख खुलेगी तो सवेरा होगा

क्या बदन है कि ठहरता ही नहीं आँखों में
बस यही देखता रहता हूँ कि अब क्या होगा
by FARHAT EHSAS

22/10/2025

या डर मुझे तेरा है कि मैं कुछ नहीं कहता
या हौसला मेरा है कि मैं कुछ नहीं कहता

हमराह रक़ीबों के तुझे बाग़ में सुन कर
दिल देने का समरा है कि मैं कुछ नहीं कहता

कहता है बहुत कुछ वो मुझे चुपके ही चुपके
ज़ाहिर में ये कहता है कि मैं कुछ नहीं कहता

कहता है तू कुछ या नहीं 'आसिफ़' से ये तू जान
याँ किस को सुनाता है कि मैं कुछ नहीं कहता
by ASIFUD DAULA

22/10/2025

हर इक दरवेश का क़िस्सा अलग है
मगर तर्ज़-ए-बयाँ अपना अलग है

ग़नीमत है बहम मिल बैठना भी
अगरचे वस्ल का लम्हा अलग है

मिले थे कब जो हम अब फिर मिलेंगे
हमारा आप का रस्ता अलग है

इबारत है शुऊर-ए-ज़िंदगी से
न ये दुनिया न वो दुनिया अलग है

नहीं है और वाबस्ता है सब से
हमारे दर्द का रिश्ता अलग है
by RASA CHUGHTAI

21/10/2025

एक अगर पैमाना होता
मय-ख़ाना मय-ख़ाना होता

घर चाहे वीराना होता
उन का आना-जाना होता

मैं तो ख़ुद को भूल गया था
तुम ने तो पहचाना होता

आप अगर हुँकारे देते
और ही कुछ अफ़्साना होता

हर लड़की जो लैला होती
हर लड़का दीवाना होता

दोनों मिल कर हस्ती बुनते
'इश्क़ का ताना-बाना होता

काश तुम्हारे पाँव का मोज़ा
'फ़हमी' का दस्ताना होता
by FAHMI BADAYUNI

21/10/2025

किया मुझ इश्क़ ने ज़ालिम कूँ आब आहिस्ता-आहिस्ता
कि आतिश गुल कूँ करती है गुलाब आहिस्ता-आहिस्ता

वफ़ादारी ने दिलबर की बुझाया आतिश-ए-ग़म कूँ
कि गर्मी दफ़ा करता है गुलाब आहिस्ता-आहिस्ता

अजब कुछ लुत्फ़ रखता है शब-ए-ख़ल्वत में गुल-रू सूँ
ख़िताब आहिस्ता-आहिस्ता जवाब आहिस्ता-आहिस्ता

मिरे दिल कूँ किया बे-ख़ुद तिरी अँखियाँ ने आख़िर कूँ
कि ज्यूँ बेहोश करती है शराब आहिस्ता-आहिस्ता

हुआ तुझ इश्क़ सूँ ऐ आतिशीं-रू दिल मिरा पानी
कि ज्यूँ गलता है आतिश सूँ गुलाब आहिस्ता-आहिस्ता

अदा-ओ-नाज़ सूँ आता है वो रौशन-जबीं घर सूँ
कि ज्यूँ मशरिक़ सूँ निकले आफ़्ताब आहिस्ता-आहिस्ता by WALI MOHAMMAD WALI

20/10/2025

तुझी को जो याँ जल्वा-फ़रमा न देखा
बराबर है दुनिया को देखा न देखा

मिरा ग़ुंचा-ए-दिल है वो दिल गिरफ़्ता
कि जिस को किसू ने कभू वा न देखा

यगाना है तू आह बेगानगी में
कोई दूसरा और ऐसा न देखा

अज़िय्यत मुसीबत मलामत बलाएँ
तिरे इश्क़ में हम ने क्या क्या न देखा

किया मुज को दाग़ों ने सर्व-ए-चराग़ाँ
कभू तू ने आ कर तमाशा न देखा

तग़ाफ़ुल ने तेरे ये कुछ दिन दिखाए
इधर तू ने लेकिन न देखा न देखा

हिजाब-ए-रुख़-ए-यार थे आप ही हम
खुली आँख जब कोई पर्दा न देखा

शब ओ रोज़ ऐ 'दर्द' दर पे हूँ उस के
किसू ने जिसे याँ न समझा न देखा by KHWAJA MEER DARD

20/10/2025

हम कहीं भी हों मगर ये छुट्टियाँ रह जाएँगी
फूल सब ले जाएँगे पर पत्तियाँ रह जाएँगी

काम करना हो जो कर लो आज की तारीख़ में
आँख नम हो जाएगी फिर सिसकियाँ रह जाएँगी

इस नए क़ानून का मंज़र यही दिखता है अब
पाँव कट जाएँगे लेकिन बेड़ियाँ रह जाएँगी

सिर्फ़ लफ़्ज़ों को नहीं अंदाज़ भी अच्छा रखो
इस जगत में सिर्फ़ मीठी बोलियाँ रह जाएँगी

क्यों बनाते हो सियासत को तुम अपना हम-सफ़र
सब चले जाएँगे लेकिन कुर्सियाँ रह जाएँगी

तुम को भी आदर्श पर 'आदर्श' चलना है यहाँ
वर्ना इस दलदल में धँसतीं पीढ़ियाँ रह जाएँगी
by AADARSH DUBEY

Address

Delhi

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Full Gazal Songs posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share

Category