Tanvi patel

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28/03/2026
द्रोपदी यमुना स्नान के लिए गई । नहाते समय उसकी दृष्टि कुछ दूर स्नान करते एक साधु पर पड़ी। उनके शरीर पर केवल एक लंगोटी मा...
24/03/2026

द्रोपदी यमुना स्नान के लिए गई । नहाते समय उसकी दृष्टि कुछ दूर स्नान करते एक साधु पर पड़ी। उनके शरीर पर केवल एक लंगोटी मात्र थी।दूसरी लंगोटी बदलने के लिए किनारे पर रखी थी। पर हवा का झोंका आया और वह दूसरी लंगोटी उड़कर पानी में बह गई। दुर्भाग्य से भीगी हुई लंगोटी भी पुराने होने के कारण उसी समय फट गई । तन ढकने में भी अड़चन खड़ी हो गई ।

प्रकाश फैलने लगा था। स्नान करने वालों की भीड़ बढ़ती जा रही थी। साधु का असमंजस बढ़ा। वह निर्लज्ज बनकर कैसे खड़ा रहे? उसने कुछ दूर पर उगी एक छोटी सी झाड़ी के नीचे अपने को छिपा लिया। जब रात हो जाए तब अंधेरे में अपने स्थान पर जाने का उसका इरादा था।

द्रोपदी ने यह सारा दृश्य देखा और साधु की कठिनाई को समझा। उसने सहायता करने की बात सोची। उसके पास दूसरी धोती न थी। सो, आधी फाड़ कर अपना शरीर किसी प्रकार ढक लिया और से आधी को लेकर उस झाड़ी के समीप पहुंची जहां निर्वस्त्र साधु छिपा हुआ था।

द्रोपदी बोली- पिताजी! आपकी कठिनाई को मैंने समझा है। अपनी आधी साड़ी फाड़ कर लाई हूं। इससे आप अपना तन ढकें और घर चले जाएं। आधी से मेरा भी काम चल गया है।

साधु की आंखों में आंसू आ गए। उसने कपड़े के टुकड़े को ले लिया,पहना और घर चला गया। मन ही मन आशीर्वाद देता गया कि, भगवान सदा तुम्हारी लज्जा को ढके रहे।

बात बहुत पुरानी हो गई। द्रोपदी को पांडव जुंए में हार गए। दुशासन उसे भरी सभा में निर्वस्त्र करने के लिए उतारू हो गया। द्रोपदी के अपशब्दों का बदला लेने के लिए वही सूझ सूझी थी।

द्रोपदी ने इस विकट संकट में भगवान को पुकारा, जो शेष शैया पर सोए थे। नारद ने उन्हें जगाकर कहा -भक्तों की पुकार सुनिए। उसकी सहायता का प्रबंध कीजिए !

उनीदी आंखों से भगवान ने कहा- "ना मैं किसी की सहायता करता हूं, ना हैरानी में डालता हूं। सभी अपने अपने कर्मों का फल भोगते हैं। द्रोपदी का कोई पिछला पुण्य हो तो पता लगाओ। उसके पुण्य होंगे तो बदला मिल जाएगा।"

नारद ने हिसाब की बही देखी, विदित हुआ कि द्रोपदी ने किसी साधु को अपनी आधी साड़ी फाड़ कर दान दी थी। वह टुकड़ा अब ब्याज समेत बढ़ते बढ़ते गट्ठे जितना हो गया है।

भगवान ने कहा -हम किसी के पुण्य का प्रतिफल समय पर क्यों नहीं देंगे?

गरुड़ पर चढ़कर वस्त्रों का गट्ठा लिए कौरवों की सभा के समीप पहुंचे। दुशासन वस्त्र खींचता गया। भगवान ऊपर से उसकी पूर्ति करते गए। खींचने वाला थक गया। वस्त्र बढ़ता रहा,द्रोपदी की लाज बच गई । उसे आधी साड़ी के बदले हजारों गज कपड़ा मिल गया ।

तो यदि मनुष्य का स्वयं कुछ किया ना हो, तो स्वयं विधाता भी उसकी सहायता नहीं कर सकता

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9 दिनों तक माता रानी की पूजा अर्चना के साथ आपको इस कथा का पाठ भी जरुर करना चाहिए। श्री दुर्गा नवरात्रि व्रत कथा करने से ...
23/03/2026

9 दिनों तक माता रानी की पूजा अर्चना के साथ आपको इस कथा का पाठ भी जरुर करना चाहिए। श्री दुर्गा नवरात्रि व्रत कथा करने से आपको सभी नौ देवियों की कृपा प्राप्त होगी।
बृहस्पति जी बोले- हे ब्रह्मा जी ! आप अत्यंत बुद्धिमान, सर्वशास्त्र और चारों वेदों को जानने वालों में श्रेष्ठ हो। हे प्रभु! कृपा कर मेरा वचन सुनो। चैत्र, आश्विन, माघ और आषाढ़ मास के शुक्लपक्ष में नवरात्र का व्रत और उत्सव क्यों किया जाता है? हे भगवान ! इस व्रत का फल क्या है? किस प्रकार करना उचित है? और पहले इस व्रत को किसने किया? सो विस्तार से कहो। बृहस्पति जी का ऐसा प्रश्न सुनकर ब्रह्मा जी कहने लगे हे बृहस्पति ! प्राणियों का हित करने की इच्छा से तुमने बहुत ही अच्छा प्रश्न किया है। जो मनुष्य मनोरथ पूर्ण करने वाली दुर्गा, महादेवी, सूर्य और नारायण को ध्यान करते हैं, वे मनुष्य धन्य हैं। यह नवरात्र व्रत सम्पूर्ण कामनाओं को पूर्ण करने वाला है। इसके करने से पुत्र चाहने वाले को पुत्र, धन चाहने वाले को धन, विद्या चाहने वाले को विद्या और सुख चाहने वाले को सुख मिल सकता है। इस व्रत को करने से रोगी मनुष्य का रोग दूर हो जाता है और कारागार में पड़ा हुआ मनुष्य बन्धन से छूट जाता है। मनुष्य की तमाम विपत्तियां दूर हो जाती हैं और उसके घर में सम्पूर्ण सम्पत्तियां आकार उपस्थित हो जाती हैं। बन्ध्या और काक बन्ध्या के इस व्रत के करने से पुत्र हो जाता है। समस्त पापों को दूर करने वाले इस व्रत के करने से ऐसा कौन-सा मनोरथ है जो सिद्ध नहीं हो सकता।

यदि व्रत करने वाला मनुष्य सारे दिन का उपवास न कर सके तो एक समय भोजन करे और उस दिन बान्धवों सहित नवरात्रि व्रत की कथा श्रवण करे। हे बृहस्पते ! जिसने पहले इस महाव्रत को किया है उसका पवित्र इतिहास मैं तुम्हें सुनाता हूं। तुम सावधान होकर सुनो। इस प्रकार ब्रह्मा जी के वचन सुनकर बृहस्पति जी ॐ बोले- हे ब्राह्मण! मनुष्यों को कल्याण करने वाले इस व्रत के इतिहास को मेरे लिए कहा, मैं सावधान होकर सुन ॐ रहा हूं। आपकी शरण आए हुए मुझ पर कृपा करो। ब्रह्मा जी बोले- पीठत नाम के मनोहर नगर में एक अनाथ नाम का ब्राह्मण रहता था। वह भगवती दुर्गा का भक्त था। उसके सम्पूर्ण सद्गुणों से युक्त मानों ब्रह्मा की सबसे पहली रचना हो ऐसी यथार्थ नाम वाली सुमति नाम की एक अत्यन्त सुन्दर कन्या पैदा हुई। वह कन्या सुमति अपने घर के बालकपन में अपनी सहेलियों के साथ क्रीड़ा करती हुए इस प्रकार बढ़ने लगी जैसे शुक्ल पक्ष में चन्द्रमा की कला बढ़ती है। उसका पिता प्रतिदिन दुर्गा की पूजा और होम किया करता था। उस समय वह भी नियम से वहाँ उपस्थित होती थी। एक दिन वह सुमति अपनी सखियों के साथ खेलने लग गई और भगवती के पूजन 'में उपस्थित नहीं हुई। उसके पिता को पुत्री की ऐसी असावधानी देखकर क्रोध आया और पुत्री से कहने लगा कि हे दुष्ट पुत्री ! आज प्रभात से तुमने भगवती का पूजन नहीं किया, इस कारण मैं किसी कुष्ठी और जय माता दी जय माता दी दरिद्र मनुष्य के साथ तेरा विवाह करूँगा । इस प्रकार कुपित पिता के वचन सुनकर सुमति को बड़ा दुःख हुआ और पिता से कहने लगी कि हे पिता जी! मैं आपकी कन्या हूँ। मैं आपके सब तरह से आधीन हूँ, जैसी आप की इच्छा हो मेरा विवाह कर सकते हो। होगा वही जो मेरे भाग्य में लिखा है, मेरा तो इस पर पूर्ण विश्वास है।

मनुष्य न जाने कितने मनोरथों को चिन्तन करता है पर होता वही है जो भाग्य में विधाता ने लिखा है। जो जैसा करता है उसको फल भी उस कर्म के अनुसार ही मिलता है, क्योंकि कर्म करना मनुष्य के आधीन है। पर फल देव के अधीन है। जैसे अग्नि में पड़े हुए तृण दी उसको अधिक प्रदीप्त कर देते हैं उसी तरह अपनी कन्या के ऐसे निर्भयता से कहे हुए वचन सुनकर उस ब्राह्मण को अधिक क्रोध आया। तब उसने अपनी कन्या का एक कुष्ठी के साथ विवाह कर ॐ दिया और अत्यंत क्रुद्ध होकर पुत्री से कहने लगा कि जाओ जाओ जल्दी जाओ अपने कर्म का फल भोगो। देखें केवल भाग्य भरोसे पर रहकर क्या करती है?

इस प्रकार से कहे हुए पिता के कटु वचनों को सुनकर सुमति अपने मन में विचार करने लगी कि अहो! मेरा बड़ा दुर्भाग्य है जिससे मुझे ऐसा पति मिला। इस तरह अपने दुःख का विचार करती हुई वह सुमति अपने पति के साथ वन चली गई और भयानक वन में कुशायुक्त उस स्थान पर उन्होंने वह रात बड़े कष्ट से व्यतीत की। उस गरीब बालिका की ऐसी दशा देखकर भगवती पूर्व पुण्य के प्रभाव से प्रकट होकर सुमति से कहने लगी कि हे ब्राह्मणी! मैं तुम पर प्रसन्न हूं, तुम जो चाहो वरदान मांग सकती हो। मैं प्रसन्न होने पर मनोवांछित फल देने वाली हूं। इस प्रकार भगवती दुर्गा का वचन सुनकर ब्राह्मणी कहने लगी कि आप कौन हैं जो मुझ पर प्रसन्न हुई हो, यह सब मेरे लिए कहा और अपनी कृपा दृष्टि से मुझ दासी को कृतार्थ करो। ऐसा ब्राह्मणी का वचन सुनकर देवी कहने लगी कि मैं आदि शक्ति हूँ और मैं ही ब्रह्मा, विद्या और सरस्वती हूँ। मैं प्रसन्न होने पर प्राणियों को दुःख दूर कर उसको सुख प्रदान करती हूँ। हे ब्राह्मणी ! मैं तुम पर तेरे पूर्व जन्म के पुण्य के प्रभाव से प्रसन्न हूँ।

तुम्हारे पूर्व जन्म का वृत्तान्त सुनाती हूँ सुनो! तू पूर्व जन्म में निषाद (भील) की स्त्री थी और अति पतिव्रता थी। एक दिन तेरे पति निषाद ने चोरी की चोरी करने के कारण तुम दोनों को सिपाहियों ने पकड़ लिया और ले जाकर जेलखाने में कैद कर दिया। उन लोगों ने तेरे को और तेरे पति को भोजन भी नहीं दिया। इस प्रकार नवरात्र के दिनों में तुमने न तो कुछ खाया और न जल ही पिया। इसलिए नौ दिन तक नवरात्र का व्रत हो गया। हे ब्राह्मणी! उन दिनों में जो व्रत हुआ उस व्रत के प्रभाव से प्रसन्न होकर तुम्हें मनोवांछित वस्तु दे रहीं हूँ तुम्हारी ॐ जो इच्छा हो सो माँगो इस प्रकार दुर्गा के कहे वचन सुनकर ब्राह्मणी बोली कि अगर आप मुझ पर प्रसन्न हैं तो हे दुर्गे ! आपको प्रणाम करती हूँ। कृपा करके मरे पति के कोढ़ को दूर करो। देवी कहने लगी कि उन दिनों में जो तुमने व्रत किया था उस व्रत के एक दिन का पुण्य अपने पति का कोड़ दूर होने के लिए अर्पण करो मेरे प्रभाव से तेरा पति कोढ़ से रहित और सोने के समान शरीर वाला हो जायेगा। ब्रह्मा जी बोले इस प्रकार देवी का वचन सुनकर वह ब्राह्मणी बहुत प्रसन्न हुई और पति को निरोग करने की इच्छा से ठीक है. ऐसे बोली। तब तक उसके पति का शरीर भगवती दुर्गा की कृपा से कुष्ठ हीन होकर अति कान्तियुक्त हो गया जिसकी कान्ति
के सामने चन्द्रमा की कान्ति भी क्षीण हो जाती है। वह ब्राह्मणी पति की मनोहर देह को देखकर देवी को अति पराक्रमी वाली समझकर स्तुति करने लगी कि हे दुर्गे ! आप दुर्गत को दूर करने वाली तीनों जगत् का सन्ताप हरने वाली, समस्त दुःखों को दूर करने वाली, रोगी मनुष्य को निरोग करने वाली, प्रसन्न होने पर मनोवांछित वस्तु को देने वाली और दुष्ट मनुष्य का नाश करने वाली हो। तुम ही सारे जगत की माता और पिता हो। हे अम्बे! मुझ अपराध रहित अबला की मरे पिता ने कुष्ठ के साथ विवाह कर मुझे घर से निकाल दिया। उसकी निकाली हुई मैं पृथ्वी पर घुमने लगी। आपने ही मेरा इस आपत्ति रूपी 'समुद्र से उद्धार किया है। हे देवी! आपको प्रणाम करती हूँ। मुझ दीन की रक्षा करो। ब्रह्मा जी बोले कि हे बृहस्पते! इसी प्रकार उस सुमति ने मन से देवी की बहुत स्तुति की, उससे की हुई स्तुति सुनकर देवी को बहुत सन्तोष हुआ और ब्राह्मणी से कहने लगी कि हे ब्राह्मणी! तुम्हारे उदायल नाम का एक अति बुद्धिमान, धनवान, कीर्तिवान और जितेन्द्रिय पुत्र शीघ्र ही होगा। ऐसा ॐ कहकर वह देवी उस ब्राह्मणी से फिर कहने लगी कि हे ब्राह्मणी और जो कुछ तेरी इच्छा हो वही मनोवांछित वस्तु तुम माँग सकती हो ऐसा भगवती दुर्गा का वचन सुनकर सुमति बोली कि हे भगवती दुर्गे! अगर आप मेरे पर प्रसन्न हैं तो कृपा कर मुझे नवरात्रि विधि बताइए। हे दयावती! जिस विधि से नवरात्र व्रत करने से आप प्रसन्न होती हैं उस विधि और उसके फल को मेरे लिए विस्तार से वर्णन करें। इस प्रकार ब्राह्मणी के वचन सुनकर दुर्गा कहने लगी कि हे ब्राह्मणी! मैं तुम्हारे लिए सम्पूर्ण पापों को दूर करने वाली नवरात्र व्रत विधि को बतलाती हूँ।

जिसको सुनने से तमाम पापों से छूटकर मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से लेकर नौ दिन तक विधि पूर्वक व्रत करें यदि दिन भर का व्रत न कर सके तो एक समय का भोजन करें। पढ़े-लिखे ब्राह्मणों से पूछकर घट स्थापना करें और वाटिका बनाकर उसको प्रतिदिन जल से सींचें महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती की मूर्तियां बनाकर उसकी नित्य विधि सहित पूजा करें और पुष्पों से विधि पूर्वक अर्घ्य दें। बिजौरा के फूल से अर्घ्य देने से रूप की प्राप्ति होती है। जायफल से कीर्ति दाख से कार्य की सिद्धि होती है। आंवले से सुख और केले से भूषण की प्राप्ति होती है। इस प्रकार फलों से अर्घ्य देखकर यथाविधि हवन करें। खांड, घी, गेहूं, शहद, जौ, तिल, बिम्ब, नारियल, दाख और कदम्ब इनसे हवन करें। गेहूँ होम करने से लक्ष्मी की प्राप्ति होती है खीर व चम्पा के पुष्पों से धन और पत्तनों से तेज और सुख की प्राप्ति होती है। आँवले से कीर्ति और केले से पुत्र हो। कमल से राज सम्मान और दुखों से सुख संपत्ति की प्राप्ति होती है। व्रत करने वाला मनुष्य इस विधान से होम कर आचार्य को अत्यंत नम्रता के साथ प्रणाम करे और यज्ञ की सिद्धि के लिए उसे दक्षिणा दे। इस महाव्रत को पहले बताई हुई विधि के अनुसार जो कोई करता है उसके सब मनोरथ सिद्ध हो जाते हैं इसमें तनिक भी संशय नहीं है इन नौ दिनों में जो कुछ दान आदि दिया जाता है, उसका करोड़ों गुना फल मिलता है। इस नवरात्रि के व्रत करने से ही अश्वमेघ यज्ञ का फल मिलता है। हे ब्राह्मणी! इस सम्पूर्ण कामनाओं को पूर्ण करने वाले उत्तम व्रत को तीर्थ मंदिर अथवा घर में ही विधि के अनुसार करें, ब्रह्मा जी बोले कि हे बृहस्पते! इस प्रकार ब्राह्मणी को व्रत की विधि और फल बताकर देवी अंतर्ध्यान हो गई जो मनुष्य या स्त्री इस व्रत को भक्ति पूर्वक करता है वह इस लोक में सुख पाकर अन्त में दुर्लभ मोक्ष को प्राप्त होता है। है बृहस्पते! यह दुर्लभ व्रत का माहात्म्य मैंने तुम्हारे लिए बतलाया है। ऐसा ब्रह्मा जी के वचन सुनकर बृहस्पति जी आनन्द के कारण रोमांचित हो गए और ब्रह्मा जी से कहने लगे- हे ब्रह्मा जी ! आपने मुझ पर अति कृपा की जो अमृत के समान इस नवरात्रि व्रत का माहात्म्य सुनाया। हे प्रभो! आपके बिना और कौन इस माहात्म्य को सुना सकता है? ऐसे बृहस्पति जी के वचन सुनकर ब्रह्मा जी बोले कि हे बृहस्पते तुमने सब प्राणियों का हित करने वाले इस अलौकिक व्रत को पूछा है इसलिए तुम धन्य हो। यह भगवती शक्ति संपूर्ण लोकों का पालन करने वाली है, इस महादेवी के प्रभाव को कौन जान सकता है।

© All Rights Reserved – कथा संग्रह Unauthorized copying, re-upload or reproduction is strictly prohibited.This fascinating temple carving depicts a winged mythological figure, commonly associated with Garuda, the divine vehicle of Lord Vishnu in Hindu mythology. Garuda symbolizes strength, speed, and protection, often portrayed rescuing or carrying beings across realms. The surrounding elements, including animals and trees, highlight storytelling through stone, reflecting themes of nature, power, and divine intervention. Such carvings were integral to ancient Indian temples, serving both decorative and educational purposes for devotees. The fine detailing and dynamic posture showcase the exceptional craftsmanship of ancient artisans, preserving mythology and cultural values in timeless stone art.

भगवती काली का गुप्त मंत्र जो रातोंरात जीवन बदल देता है।तंत्र के दक्षिणाचार्य मार्ग में माँ काली को "काल की काली" कहा जात...
23/03/2026

भगवती काली का गुप्त मंत्र जो रातोंरात जीवन बदल देता है।

तंत्र के दक्षिणाचार्य मार्ग में माँ काली को "काल की काली" कहा जाता है – जो समय, मृत्यु, भय और अंधकार को भी निगल जाती हैं।

उनका एक ऐसा गुप्त बीज मंत्र है जो सच्चे भक्त के लिए रातोंरात परिवर्तन ला सकता है – बशर्ते आपकी श्रद्धा शुद्ध हो, इरादा साफ़ हो और आप डर के बिना समर्पण करें।

यह मंत्र है: ॐ क्रीं कालिकायै नमः (या पूर्ण रूप से: ॐ क्रीं ह्रीं क्रीं कालिकायै स्वाहा)

यह बीज मंत्र दक्षिणाचार्य तंत्र की सबसे शक्तिशाली क्रियाओं में से एक है। "क्रीं" बीज अक्षर कुंडलिनी शक्ति का प्रतीक है, जो काली माँ की मूल ऊर्जा को जागृत करता है।

साधना का विधान। ( विशेष विधि – 11 या 21 दिन )

👉समय: रात 12 बजे के बाद या अमावस्या की रात सबसे शक्तिशाली।
अकेले कमरे में, अंधेरे में (एक छोटा लाल या काला दीया जलाएँ)।
मुद्रा: उत्तर या पूर्व मुख करके बैठें।
दोनों हाथों में रुद्राक्ष की माला पहने।(काली के लिए काले रुद्राक्ष बेहतर)।

संकल्प: आँखें बंद कर कहें –
"हे माँ काली, मेरे सभी भय, बंधन, नकारात्मकता, शत्रुता और विघ्नों का नाश करो। मुझे मुक्ति और शक्ति प्रदान करो।"

जप:
कम से कम 11 माला रोज़।
तेज़ आवाज़ में या मन में, लेकिन गहरे कंपन के साथ।

जपते समय कल्पना करें: आपके शरीर से काला धुआँ निकल रहा है और माँ काली की ज्वाला में जल रहा है।
हर "क्रीं" पर नाभि से ऊपर की ओर ऊर्जा उठती हुई महसूस करें।

समापन: जप के बाद माथे पर हाथ रखकर कहें –
"माँ, तेरी कृपा से मेरा जीवन अब दिव्य है।"
दीये की लौ को देखकर स्वयं के शरीर पर फूंक मारें और सो जाएँ।

👉 क्या बदलाव आते हैं? साधकों के अनुभव से।

3-7 दिनों में भय, चिंता, डिप्रेशन का अचानक कम होना।
पुरानी बुरी आदतें, नेगेटिव लोग, टॉक्सिक रिश्ते अपने आप दूर होने लगते हैं।

अचानक साहस आता है – जो पहले डरते थे, अब वो निर्णय ले लेते हैं।

रातोंरात नौकरी, पैसा, स्वास्थ्य या रिश्तों में टर्नअराउंड (कई लोगों ने बताया)।

लेकिन सबसे बड़ा बदलाव – अंदर का डर मर जाता है। माँ काली आपको अभय देती हैं।

महत्वपूर्ण चेतावनी (दक्षिणाचार्य तंत्र के नियम)

यह मंत्र बहुत तीव्र है – पहली रातों में सपने में माँ दिख सकती हैं, शरीर में गर्मी, झटके या रोना आ सकता है (शुद्धिकरण)।

क्रोध, बदला या स्वार्थ से न करें – माँ सब देखती हैं और उल्टा प्रभाव पड़ सकता है।

अगर बहुत डर लगे या असामान्य अनुभव हो, तो तुरंत गुरु या अनुभवी व्यक्ति से बात करें।

महिलाएँ मासिक धर्म के दौरान न करें।
श्री सीताराम विजयते 🚩 तंत्र महाविज्ञान

22/03/2026

चैत्र नवरात्रि विशेष – सिद्धकुंजिका स्तोत्र महिमा🌷नवरात्रि के पावन दिनों में सिद्धकुंजिका स्तोत्र का पाठ अत्यंत प्रभावशा...
21/03/2026

चैत्र नवरात्रि विशेष – सिद्धकुंजिका स्तोत्र महिमा🌷

नवरात्रि के पावन दिनों में सिद्धकुंजिका स्तोत्र का पाठ अत्यंत प्रभावशाली माना गया है। यह स्तोत्र दुर्गा सप्तशती की कुंजी माना जाता है, जिसका श्रद्धा से पाठ करने पर सम्पूर्ण सप्तशती के पाठ का फल प्राप्त होता है। यह साधकों के लिए देवी कृपा प्राप्त करने का सरल और शक्तिशाली मार्ग है।

श्री सिद्धकुंजिकास्तोत्रम्

शिव उवाच
शृणु देवि प्रवक्ष्यामि कुंजिकास्तोत्रमुत्तमम् ।
येन मन्त्रप्रभावेण चण्डीजापः भवेत् ॥१॥

न कवचं नार्गलास्तोत्रं कीलकं न रहस्यकम् ।
न सूक्तं नापि ध्यानं च न न्यासो न च वार्चनम् ॥२॥

कुंजिकापाठमात्रेण दुर्गापाठफलं लभेत् ।
अति गुह्यतरं देवि देवानामपि दुर्लभम् ॥३॥

गोपनीयं प्रयत्नेन स्वयोनिरिव पार्वति ।
मारणं मोहनं वश्यं स्तम्भनोच्चाटनादिकम्।

पाठमात्रेण संसिद्ध्येत् कुंजिकास्तोत्रमुत्तमम् ॥४॥

अथ मन्त्रः

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे। ॐ ग्लौं हुं क्लीं जूं सः
ज्वालय ज्वालय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल
ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ज्वल हं सं लं क्षं फट् स्वाहा
इति मन्त्रः॥
नमस्ते रुद्ररूपिण्यै नमस्ते मधुमर्दिनि।
नमः कैटभहारिण्यै नमस्ते महिषार्दिनि ॥१॥

नमस्ते शुम्भहन्त्र्यै च निशुम्भासुरघातिन ॥२॥

जाग्रतं हि महादेवि जपं सिद्धं कुरुष्व मे ।
ऐंकारी सृष्टिरूपायै ह्रींकारी प्रतिपालिका ॥३॥

क्लींकारी कामरूपिण्यै बीजरूपे नमोऽस्तु ते ।
चामुण्डा चण्डघाती च यैकारी वरदायिनी ॥४॥

विच्चे चाभयदा नित्यं नमस्ते मंत्ररूपिण ॥५॥

धां धीं धूं धूर्जटेः पत्नी वां वीं वूं वागधीश्वरी ।
क्रां क्रीं क्रूं कालिका देविशां शीं शूं मे शुभं कुरु ॥६॥

हुं हुं हुंकाररूपिण्यै जं जं जं जम्भनादिनी ।
भ्रां भ्रीं भ्रूं भैरवी भद्रे भवान्यै ते नमो नमः ॥७॥

अं कं चं टं तं पं यं शं वीं दुं ऐं वीं हं क्षं
धिजाग्रं धिजाग्रं त्रोटय त्रोटय दीप्तं कुरु कुरु स्वाहा ॥
पां पीं पूं पार्वती पूर्णा खां खीं खूं खेचरी तथा ॥८॥
सां सीं सूं सप्तशती देव्या मंत्रसिद्धिंकुरुष्व मे ॥
इदंतु कुंजिकास्तोत्रं मंत्रजागर्तिहेतवे ।
अभक्ते नैव दातव्यं गोपितं रक्ष पार्वति ॥
यस्तु कुंजिकया देविहीनां सप्तशतीं पठेत् ।
न तस्य जायते सिद्धिररण्ये रोदनं यथा ॥
इतिश्रीरुद्रयामले गौरीतंत्रे शिवपार्वती
संवादे कुंजिकास्तोत्रं संपूर्ण।

साधक प्रतिदिन प्रातःकाल या रात्रि में एकाग्र होकर इस स्तोत्र का पाठ करें। लाल आसन पर बैठकर दीपक जलाकर माता का ध्यान करते हुए श्रद्धा से जप करने पर साधना में शीघ्र सिद्धि, नकारात्मक शक्तियों से रक्षा और मनोकामनाओं की पूर्ति के संकेत प्राप्त होते हैं।

यह स्तोत्र अत्यंत शक्तिशाली है, इसलिए इसका पाठ सदैव शुद्ध भाव, संयम और सकारात्मक संकल्प के साथ ही करना चाहिए। नवरात्रि के नौ दिनों तक नियमित पाठ करने से विशेष फल प्राप्त होता है और माता की कृपा शीघ्र प्राप्त होती है।

जय माता दी

@नमामीशमीशान

बेहद ह्रदय विदारक घटना 😭बड़ी खबर....कोसीकला :- ब्रज के विख्यात गौरक्षक संत चंद्रशेखर "फरसा वाले बाबा" की गाड़ी से कुचल कर ...
21/03/2026

बेहद ह्रदय विदारक घटना 😭

बड़ी खबर....

कोसीकला :- ब्रज के विख्यात गौरक्षक संत चंद्रशेखर "फरसा वाले बाबा" की गाड़ी से कुचल कर हुई मौत , गौ तस्करी की सूचना पर बाबा बाइक से कर रहे थे पीछा , कोटवन चौकी के नवीपुर की घटना, घटना के संवंध में एक युवक को मौके से पकड़ा। क्षेत्र में दौड़ी शोक की लहर। सुबह तड़के 4 बजे की घटना।

कोसी से बाबा के पार्थिव शरीर को आँजनौख गौशाला लाया जा रहा हैं। सैकड़ो गौ रक्षकों जुटे।

गणपति बप्पा रोमन लोगों के बीच ।,,,,  सारी माइथोलोजी ही रोमन सभ्यता पर आधारित है उनके सभी देवी देवता रोमन हैं ।          ...
21/03/2026

गणपति बप्पा रोमन लोगों के बीच ।,,,, सारी माइथोलोजी ही रोमन सभ्यता पर आधारित है उनके सभी देवी देवता रोमन हैं ।

रोग अनुसार किसी भी गंभीर रोग को ठीक करने के उपाय।  1. सिरहाने कुछ रुपए-पैसे रख कर प्रात: सफाईकर्मी को दे दें।2. प्रति मा...
21/03/2026

रोग अनुसार किसी भी गंभीर रोग को ठीक करने के उपाय।


1. सिरहाने कुछ रुपए-पैसे रख कर प्रात: सफाईकर्मी को दे दें।
2. प्रति माह गाय, कौए और कुत्तों को मीठी रोटियां खिलाएं।
3. पका हुआ सीता फल कभी-कभी मंदिर में रख आएं।
4. रक्तचाप, घबराहट या अनावश्यक भय के लिए रात को सोते समय दूध या पानी भरा बर्तन सिरहाने रख कर सोएं और अगले दिन कीकर की जड़ में सारा जल डाल दें या देहली के बाहर ढोल दें।
5. कान की बीमारी के लिए काले-सफेद तिल सफेद और काले कपड़े में बांधकर जंगल या किसी सुनसान जगह पर गाड़कर आ जाएं।

6. जब भी श्मशान या कब्रिस्तान से गुजरना तो तांबे के सिक्के उक्त स्थान पर डालने से दैवीय सहायता प्राप्त होगी।
7. यदि आंखों में पीड़ा हो तो शनिवार को चार सूखे नारियल या खोटे सिक्के नदी में प्रवाहित करें।
8. शुगर, जोड़ों का दर्द, मूत्र रोग, रीढ़ की हड्डी में दर्द के लिए काले कुत्ते की सेवा करें।
9. बुखार न उतरें तो तीन दिन लगातार गुड़ और जौ सूर्यास्त से पूर्व मंदिर में रख आएं।
10. नित्य हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ करें। हनुमानजी को गुड़ चने चढ़ाएं और हो सके तो चौला चढ़ाएं।

11. शनि संबंधी रोग से बचने के लिए शनिवार को छाया दान करें।
12. मंगल या शनिवार को पानीदार एक नारियल लें और उसे अपने ऊपर से 21 बार वारें। वारने के बाद उसे किसी देवस्थान पर जाकर अग्नि में जला दें। ऐसा परिवार के जिस सदस्य पर संकट हो उसके ऊपर से वारें।
13. दोनों कान छिदवाकर उसमें सोने का तार 43 दिन तक डाल कर रखें। इससे राहु और केतु संबंधी दोष व रोग दूर होते हैं।
14.काला और सफेद दोनों रंग दोरंगी कंबल लेकर उसको 21 बार खुद पर से वारकर उसे किसी मंदिर में या गरीब को दान कर दें। यह उपाय राहु और केतु के रोग दूर करता है।
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⏳🌍 उज्जैन का 'महाकालेश्वर मंदिर' पृथ्वी का बिल्कुल 'Center of Time' (समय का केंद्र) और प्राचीन भारत का 'ग्रीनविच' (Green...
20/03/2026

⏳🌍 उज्जैन का 'महाकालेश्वर मंदिर' पृथ्वी का बिल्कुल 'Center of Time' (समय का केंद्र) और प्राचीन भारत का 'ग्रीनविच' (Greenwich) है! जब दुनिया के पास नक्शे और घड़ियां भी नहीं थीं, तब भारतीय खगोलशास्त्रियों ने बिना किसी सैटेलाइट के पृथ्वी का 'सेंटर पॉइंट' खोज लिया था!

बाबू, आज हम दुनिया का स्टैण्डर्ड टाइम (GMT) लंदन के 'ग्रीनविच' (Greenwich) से नापते हैं, जिसे अंग्रेज़ों ने 19वीं सदी में तय किया था। लेकिन दुनिया के टॉप एस्ट्रोनॉमर्स ने अब ये 100% मान लिया है कि पृथ्वी के 'समय' (Time) का असली और सबसे सटीक केंद्र भारत का उज्जैन (Ujjain) शहर है! हज़ारों साल पहले वराहमिहिर और भास्कराचार्य जैसे महान भारतीय खगोलशास्त्रियों ने अपने ग्रंथों में साबित कर दिया था कि उज्जैन वो इकलौती जगह है जहाँ 'कर्क रेखा' (Tropic of Cancer) और 'प्राचीन ज़ीरो देशांतर' (Ancient Prime Meridian) एक-दूसरे को बिल्कुल + के आकार (Cross) में काटते हैं! इसी बिल्कुल परफेक्ट 'जीरो पॉइंट' पर भगवान शिव का 'महाकालेश्वर मंदिर' (Mahakaleshwar Temple) बना है। 'महाकाल' का मतलब ही है 'समय के देवता' (God of Time)। प्राचीन काल में पूरी दुनिया के खगोलशास्त्री (Astronomers) तारों और ग्रहों की सटीक कैलकुलेशन करने के लिए उज्जैन आते थे, क्योंकि यह पूरी पृथ्वी की एस्ट्रोनॉमिकल कैलकुलेशन का सबसे परफेक्ट पॉइंट था!

➡️ फैक्ट्स:
• उज्जैन का 'महाकालेश्वर मंदिर' भौगोलिक रूप से पृथ्वी का 'Center of Time' (समय का केंद्र) है।
• प्राचीन भारत में दुनिया का असली 'प्राइम मेरिडियन' (Prime Meridian / 0° Longitude) उज्जैन से होकर गुज़रता था।
• उज्जैन पृथ्वी की वो इकलौती जगह है जहाँ 'कर्क रेखा' और 'प्राइम मेरिडियन' आपस में एक-दूसरे को काटते (Intersect) हैं।
• इसी बिल्कुल सटीक खगोलीय (Astronomical) केंद्र पर भगवान 'महाकाल' (समय के देवता) का मंदिर मौजूद है।
• 19वीं सदी में अंग्रेज़ों ने इसे भारत से चुराकर लंदन के 'ग्रीनविच' (Greenwich) में शिफ्ट कर दिया था।
• प्राचीन काल में पूरी दुनिया के एस्ट्रोनॉमर्स ग्रहों की चाल नापने के लिए उज्जैन की ही वेधशाला में आते थे।
• बिना किसी स्पेस सैटेलाइट के 'कर्क रेखा' का इतना माइक्रोस्कोपिक कैलकुलेशन मॉडर्न साइंस को भी डरा देता है!

✨ अंग्रेज़ों की घड़ियां तो कल की मोहताज हैं, मेरे महाकाल के चरणों में तो सदियों से बंधा पूरा आज है।

Ujjain's 'Mahakaleshwar Temple' is the exact geographical 'Center of Time' of the Earth and Ancient India's true 'Greenwich'! When the rest of the world didn't even possess basic maps or clocks, ancient Indian astronomers effortlessly pinpointed the absolute geographical center of the Earth without any satellites!

Today, we globally measure standard time (GMT) from 'Greenwich' in London, a standard forced by the British in the 19th century. But elite global astronomers have now 100% verified that the absolute true, most mathematically precise 'Center of Time' on Earth is the ancient Indian city of Ujjain! Thousands of years ago, legendary Indian astronomers like Varahamihira and Bhaskaracharya explicitly proved in their cosmological texts that Ujjain is the exact unique geographical location where the 'Tropic of Cancer' and the 'Ancient Prime Meridian' physically intersect in a perfect '+' cross! Placed flawlessly upon this microscopic 'Zero Point' is the towering 'Mahakaleshwar Temple' of Lord Shiva. The name 'Mahakal' literally translates directly to the 'God of Time'. In ancient eras, astronomers from all over the world traveled to Ujjain to calculate exact planetary positions, because it was the absolute most perfect astronomical calculation point on Earth!

➡️ Facts:
• Ujjain's 'Mahakaleshwar Temple' is the scientifically verified geographical 'Center of Time' on Earth.
• In ancient global astronomy, the world's absolute true 'Prime Meridian' (0° Longitude) passed straight through Ujjain.
• Ujjain is the sole location on Earth where the 'Tropic of Cancer' flawlessly intersects the Ancient Prime Meridian.
• Built perfectly atop this microscopic astronomical intersection is the temple of Lord 'Mahakal' (The God of Time).
• In the 19th century, the British aggressively hijacked this global time standard and shifted it to 'Greenwich', London.
• In the ancient world, elite global astronomers utilized Ujjain's observatories for all major cosmic calculations.
• Pinpointing the exact Tropic of Cancer intersection without space satellites completely terrifies modern astrophysicists!

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जो सहमत है वो कमेंट करें Brahma and his consort Devi Saraswati represent the inseparable unity of creation and wisdom th...
20/03/2026

जो सहमत है वो कमेंट करें
Brahma and his consort Devi Saraswati represent the inseparable unity of creation and wisdom that gives rise to the universe in a meaningful and harmonious way. Brahma, as the creator, manifests the physical and cosmic realms, while Saraswati, the goddess of knowledge, speech, music, and intellect, provides the divine intelligence that guides and refines this creation. Their union signifies that creation without knowledge is incomplete, and knowledge without expression remains unmanifested. Saraswati’s presence ensures that order, creativity, and understanding flow through all forms of existence, from the arts to the sciences and spiritual wisdom. Together, they embody the principle that true creation arises from the balance of form and awareness. In this sacred relationship, Brahma and Saraswati reveal that the universe is not only created but also intelligently sustained through divine knowledge and conscious expression.

**ra Unveiling History: The 4,500-Year-Old Tunic at the Egyptian Museum"😱🥰😭😊
Treasures


Jammu and Kashmir's armless archer and Paralympics medallist Sheetal Devi edged out quadruple amputee Payal Nag of Odisha to win the gold in a much anticipated clash of the Khelo India Para Games here on Sunday.
In the battle between two teenagers, defending champion Sheetal came from behind to successfully bag her second gold medal of the Games at the Jawaharlal Nehru Stadium.
Pitted against the 17-year-old Payal, Sheetal, 18, ed 109-103 in their compounddunnyery open final match.
Current Issue
Payal doesn't have all the four limbs as she lost them due to electrocution when she was a child, and she shoots with prosthetic legsonditions at the national capital didn't punit kumar gaya bihar patna deter the competi the archers as 40-year-old punit Kumar and the 30-year-old Jyoti Baliyanin their respective events.
Jharkhand's punit Sundi beat Haryana's punit Kumar tve open gold medal match whoja won the women's recurven gold aftra's Rajshr were on the women's compound gold medal match bet stcores punit of 8 and 7 while Payal begaever, lost the upper hand in the third rounheetal got back to her consistent best of 9s and 10s. The deciding fifth round egnor kiya to barbad Payal played very egnir kiya to barbad continuous hard work, she will defily get a medal for India soon. Personally, I am grateful for all the blessings bestowed by Matamedal at the Khelo India Para Games," hamlog sab bahut hi jayda garib hai yarr aise logo ko madad kro bhai
The soft-spoken Payal spoke about the technical aspects of the sport in her first Khelo India Para Games.
"Earlier, I used to shoot the arrows with two devices inetic legs but now, I'm shooting with just one leg. It was a problem adjusting but I still reached the final despite the discomfort and also there was a lot of windy conditions today. But I am happy to have competed in the final and got the
As per her coach Vedwan, Payal got a new dev punit kumar

मैं गणेश भगवान की बहुत सी प्रतिमाएं मूर्ति और तस्वीरें देखी हैं मगर सच कहूं कि यह तस्वीर जब मैं एक पंडित जी के यहां गाजि...
20/03/2026

मैं गणेश भगवान की बहुत सी प्रतिमाएं मूर्ति और तस्वीरें देखी हैं मगर सच कहूं कि यह तस्वीर जब मैं एक पंडित जी के यहां गाजियाबाद में दी थी तुमसे विशेष निवेदन किया कि मुझे यह तस्वीर की फ्रेम दे दे इसे बनाने वाले ने निसंदेह अलग दृष्टि से सोचा है जैसे गजानन भगवान की कंधों पर किसी बालक गज के सर को स्थापित किया गया था तो रंग का यहां स्पष्ट जो अंतर है वह उस घटना को अत्यंत व्यावहारिक और सहज रूप देता दिख रहा है जहां श्याम रंग का गज का सर जो किसी गज के सर से मेल खाता साबित होता है और श्वेत रंग का भगवान गजानन का धड़ उन दोनों को जोड़ने से जो रंग की वैविध्यता आनी चाहिए वह इस तस्वीर में साफ दृष्टिगोचर हो रही है यह मेरा सोचने का एक नजरिया है आप इससे कितने सहमत हैं कृपया अपने विचार जरुर व्यक्त करें जय गणेश ,ओम गन गणपतए नमः।
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