Apka Apna Azeem Alam

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एक थी पृथ्वी.... लघु फ़िल्म.. निर्माता...  लेखक..निर्देशक सतीश सूद की नई कृति..बात तो आपको सुननी  ही पड़ेगी.             ...
24/04/2026

एक थी पृथ्वी.... लघु फ़िल्म.. निर्माता... लेखक..निर्देशक सतीश सूद की नई कृति..बात तो आपको सुननी ही पड़ेगी.
अब यह बात निकली है तो दूर... तलक जाएगी.. आप लोगों ने कहा कि यह सारी दुनिया हम लोगों के कारण बर्बाद हो रही है..
हम तो यह कहते हैं कि यह सारी धरती आप जैसे पढ़े लिखे लोगों की वजह से बर्बाद हो रही है.. उजड़ रही है... और कुछ बची है वह भी बर्बाद हो जाएगी

..देखना... एक दिन यहां रहने के लिए... कुछ भी नहीं बचेगा आप लोगों की वजह से सब कुछ खत्म हो जाएगा... सब कुछ खत्म हो जाएगा

23/04/2026

* पृथ्वी को हमारी जरूरत नहीं है, हमें पृथ्वी की
जरूरत है। यदि धरती असुरक्षित है, तो इंसान का
कोई भी विकास उसे बचा नहीं पाएगा।

पृथ्वी दिवस - धरती पर से जीवन का विनाश है नजदीक, 5 खास कारण

पृथ्वी दिवस हमें यह याद दिलाने का अवसर है कि जिस धरती ने हमें जीवन दिया, आज वही हमारे हस्तक्षेप के कारण संकट में है। वैज्ञानिक चेतावनी दे रहे हैं कि यदि हमने अपनी आदतों को नहीं बदल, तो पृथ्वी पर से जीवन का विनाश उम्मीद से कहीं अधिक हो सकता है।

यहां वे 5 प्रमुख कारण दिए गए हैं जो पृथ्वी के अस्तित्व के लिए सबसे बड़ा खतरा बने हुए हैं :-

1. जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग यह पृथ्वी के विनाश का सबसे बड़ा और तात्कालिक कारण है। जीवाश्न ईंधन (कोयला, तेल) के जलने से निकलने वाली गैसों ने धरती के तापमान को खतरनाक स्तर तक बढ़ा दिया है। जिसके कारण ग्लेशियरों का तेजीसे पिघलना, समुद्र के जलस्तर में वृद्धि और तटीय शहरों के डूबने का खतरा। यदि तापमान 1.5 डिग्री से अधिक बढ़ा, तो प्राकृतिक आपदाओं को रोकना नामुमकिन होगा।

2. जैव विविधता का ह्रास वैज्ञानिकों का मानना है कि हम 'छठे सामूहिक विनाश' के दौर से गुजर रहे हैं। पिछले कुछ दशकों में लाखों प्रजातियां विलुप्त हो चुकी हैंया विलुप्ति की कगार पर हैं। जब पारिस्थितिकी तंत्र से कीड़े-मकोड़े, पक्षी और जानवर लुप्त होते हैं, तो खाद्य श्रृंखला टूट जाती है। उदाहरण के लिए, यदि मधुमक्खियां खत्म हो गई, तो फसलों का परागण रुक जाएगा और दुनिया में अकाल पड़ जाएगा।

3. प्लास्टिक प्रदूषण और समुद्री संकट - हर साल करोड़ों टन प्लास्टिक कचरा समुद्र में फेंका जा रहा है। यह प्लास्टिक न केवल समुद्री जीवों को मार रहा है, बल्कि 'माइक्रोप्लास्टिक' के रूप में अब हमारे भोजन और रक्त में भी प्रवेश कर चुका है। आपको बता दें कि समुद्र ऑक्सीजन बनाने का एक बड़ा स्त्रोत हैं। यदि समुद्री जीवन खत्म हुआ, तो वायुमंडल में ऑक्सीजन का संतुलन बिगड़ जाएगा।

4. जल संकट और मरुस्थलीकरण धरती पर मीठा पानी सीमित है। भूजल का अत्यधिक दोहन और वनों की कटाई के कारण उपजाऊ भूमि मरुस्थल में बदल रही है। जिसका असर भविष्य में युद्ध तेल के लिए नहीं, बल्कि पोने के पानी के लिए होंगे। पानी की कमी का

सीधा असर कृषि पर पड़ेगा, जिससे भुखनरी का खतरा पैदा होगा।

5. विनाशकारी हथियारों की होड़ परमाणु हथियार और जैविक युद्ध की बढ़तो संभावना पृथ्वी को मिनटों में खत्म कर सकती है। पर्यावरण को जितना नुक्सान सदियों में नहीं पहुंचा, उतना नुकसान एक परमाणु युद्ध कुछ घंटों में पहुंचा सकता है जिसके कारण परमाणु विकिरणन केवल इंसानों को खत्म करेगा, बल्कि आने वाली कई पीढ़ियों तक जीवन की संभावनाओं को शून्य कर देगा।

क्या अभी भी उम्मीद बाकी है?

विनाश नजदीक जरूर है, लेकिन 'असंभव' नहीं है। पृथ्वी

दिवस 2026 पर हम इन छोटे कदमों से बदलाव ला सकते हैं।

एक पेड़ जरूर लगाएं- वनों की कमी को पूरा करना सबसे प्रभावी समाधान है।

सिंगल यूज प्लास्टिक' को कहें ना- रिसाइकल करने की आदत डालें।

सतत जीवन ऊर्जा और पानी की बचत करें।

संक्षेप में कहा जाए तो पृथ्वी को हमारी जरूरत नहीं है, हमें पृथ्वी की जरूरत है। यदि धरती असुरक्षित है, तो इंसान का कोई भी विकास उसे बचा नहीं पाएगा।

22/04/2026

अपनी अपनी ताकत दिखाने के लिए.. सारी दुनिया को तबाह किया जा रहा है .. बड़े-बड़े मुल्कों ने तो..इतने बम गोले बारूद इकट्ठे कर लिए हैं.. कि वो पूरी दुनिया को 10.. 20 बार तबाह सकते हैं... तरक्की के नाम पर लोगों ने... जंगली जानवरों के घर बार भी नष्ट कर दिए हैं ...कइयों की तो नस्स्ले भी खत्म हो गई हैं l..

*        'पप्पू यादव द्वारा इस्तेमाल किया गया अमर्यादित           शब्द उनकी घटिया सोच को दर्शाता है। *        मेरा खून त...
22/04/2026

* 'पप्पू यादव द्वारा इस्तेमाल किया गया अमर्यादित
शब्द उनकी घटिया सोच को दर्शाता है।

* मेरा खून तो खौल रहा है, लेकिन भाजपा के नेता
और कार्यकर्ता शब्दों की मर्यादा रखना बखूबी
जानते हैं।

* जिस व्यक्ति के घर की महिलाएं खुद राजनीति में
सक्रिय हों, वहां से ऐसी टिप्पणी आना दुर्भाग्यपूर्ण
है।

* यह गंदी और ओछी सोच का परिणाम है।'

* उनकी अपनी पत्नी भी सदन की सदस्य हैं, क्या
वे अपनी बेटी के किसी भी प्रोफेशन में जाने पर
यही भाषा बोलेंगे?

बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव द्वारा राजनीति में 90 प्रतिशत महिलाओं को नेताओं के बेडरूम से होकर गुजरना पड़ता है वाले बयान पर बिहार भाजपा की महिला नेताओं का आक्रोश फूट पड़ा है। भाजपा प्रदेश कार्यालय में बुधवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूर्व मंत्री श्रेयसी सिंह, विधायक मैथिली ठाकुर, संगीता कुमारी और एमएलसी अनामिका सिंह ने पप्पू यादव के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उनसे सार्वजनिक माफी की मांग की।

अर्जुन अवार्ड विजेता और जमुई से भाजपा विधायक श्रेयसी सिंह ने बेहद कड़े शब्दों में अपनी नाराजगी व्यक्त की।उन्होंने कहा, 'पप्पू यादव द्वारा इस्तेमाल किया गया अमर्यादित शब्द उनकी घटिया सोच को दर्शाता है। मेरा खून तो खौल रहा है, लेकिन भाजपा के नेता और कार्यकर्ता शब्दों की मर्यादा रखना बखूबी जानते हैं।

उनकी अपनी पत्नी भी सदन की सदस्य हैं, क्या वे अपनी बेटी के किसी भी प्रोफेशन में जाने पर यही भाषा बोलेंगे?

उन्हें तुरंत माफी मांगनी चाहिए।'कांग्रेस नेतृत्व पर सीधा हमला बोलते हुए श्रेयसी सिंह ने पूछा कि क्या राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ऐसे बयानों का समर्थन करते हैं?
उन्होंने कहा, 'मैं तेजस्वी यादव से भी पूछना चाहूंगी कि क्या आप पप्पू यादव के साथ खड़े हैं? क्या ऐसी भाषा का इस्तेमाल करना सही है?

भारत की एक महिला होने के नाते मैं इसकी निंदा करती हूं। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को भी इस मामले पर अपना रुख साफ़ करना चाहिए।'(केयर न्यूज)

विधायक मैथिली ठाकुर ने कहा कि हर महिला अपनी मेहनत और टैलेंट से अपनी पहचान बनाती है। उन्होंने कहा, 'पप्पू यादव ने पूरे समाज और इस पेशे को अपमानित किया है। जिस व्यक्ति के घर की महिलाएं खुद राजनीति में सक्रिय हों, वहां से ऐसी टिप्पणी आना दुर्भाग्यपूर्ण है। यह गंदी और ओछी सोच का परिणाम है।'

एमएलसी अनामिका सिंह और मोहनिया विधायक संगीता कुमारी ने प्रियंका गांधी के पुराने नारों की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि जो प्रियंका गांधी 'लड़की हूँ, लड़ सकती हूँ' की बात करती हैं, वे आज इस अपमानजनक टिप्पणी पर शांत क्यों हैं?

उन्होंने इसे राजनीति में महिलाओं के स्वाभिमान पर सीधा हमला बताया और कांग्रेस नेतृत्व से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।

गौरतलब है कि पप्पू यादव ने हाल ही में दावा किया था कि "बिना नेताओं के कमरे (बेड) में जाए 90% महिलाएं राजनीति नहीं कर पातीं।"

इस बयान के बाद बिहार राज्य महिला आयोग ने उन्हें नोटिस जारी कर 3 दिन में जवाब मांगा है।

हालांकि, पप्पू यादव अपने बयान पर कायम हैं और उन्होंने नोटिस को 'रद्दी की टोकरी' में फेंकने तक की बात कह दी है।

*        एक निडर युवती ने सत्ता की आँखों में आँखें          डालकर चुनौती दे दी।*      भीड़ में एक ऐसी बेटी खड़ी थी, जिसक...
22/04/2026

* एक निडर युवती ने सत्ता की आँखों में आँखें
डालकर चुनौती दे दी।

* भीड़ में एक ऐसी बेटी खड़ी थी, जिसके दिल में
सिर्फ़ आज़ादी की आग जल रही थी।

* उन्हें इतिहास में उतनी जगह नहीं मिली, जितनी वो
सच में हक़दार थीं।

* बीना दास सिर्फ़ एक नाम नहीं… वो स्वाभिमान हैं,
वो हिम्मत हैं, वो विद्रोह हैं,

* वो आज़ादी की वो आवाज़ हैं जो कभी दबाई नहीं
जा सकती।

1932 का वो ऐतिहासिक दिन… जब बीना दास ने दीक्षांत समारोह के मंच को ही रणभूमि बना दिया। चारों तरफ अंग्रेजी हुकूमत का रौब, सत्ता का घमंड और भय का माहौल था…

लेकिन उस भीड़ में एक ऐसी बेटी खड़ी थी, जिसके दिल में सिर्फ़ आज़ादी की आग जल रही थी। उन्होंने बंगाल के गवर्नर पर गोली चलाई और पूरी दुनिया को बता दिया कि भारत अब जाग चुका है। अदालत में निर्भीक होकर उन्होंने कहा — "ये आज़ाद भारत की शुरुआत है!"

ये सिर्फ़ एक हमला नहीं था… ये उस व्यवस्था के खिलाफ़ विद्रोह था, जिसने भारतवासियों की आवाज़ दबा रखी थी। ये उस साहस की गूंज थी, जिसने लाखों युवाओं के दिलों में क्रांति की चिनगारी जगा दी। जब बड़े-बड़े लोग अंग्रेजों के सामने झुक रहे थे, तब एक निडर युवती ने सत्ता की आँखों में आँखें डालकर चुनौती दे दी।

बीना दास को 9 साल की कठोर सज़ा सुनाई गई। जेल की सलाखों के पीछे उन्होंने दर्द सहा, कठिनाइयाँ झेलीं, लेकिन उनके इरादे कभी कमज़ोर नहीं पड़े। उनका तन कैद हो सकता था, मगर उनकी आत्मा आज़ाद थी। हर दिन, हर पल, हर सांस देश के नाम थी।

लेकिन सबसे बड़ा अफ़सोस यह है कि जिस वीरांगना ने अपने जीवन का सब कुछ देश पर न्योछावर कर दिया, आज़ादी के बाद वही गुमनामी के अंधेरे में खो गईं। जिनके नाम पर गर्व होना चाहिए था, जिनकी कहानी हर किताब में होनी चाहिए थी, उन्हें इतिहास में उतनी जगह नहीं मिली, जितनी वो सच में हक़दार थीं।

जिसने मंच को रणभूमि बना दिया… जिसने डर को चुनौती दी… जिसने साम्राज्य के सामने सिर झुकाने से इंकार कर दिया… जिसने दुनिया को बता दिया कि भारत की बेटियाँ भी क्रांति की मशाल उठा सकती हैं… वो सिर्फ़ एक महिला नहीं, बल्कि साहस की जीवित मिसाल थीं।

आज ज़रूरत है कि हम ऐसे गुमनाम नायकों को याद करें। उनके संघर्ष को पहचानें, उनके बलिदान को सम्मान दें और आने वाली पीढ़ियों तक उनकी अमर कहानी पहुँचाएँ। क्योंकि जिन राष्ट्रों को अपने वीरों की पहचान नहीं होती, उनका इतिहास अधूरा रह जाता है।

बीना दास सिर्फ़ एक नाम नहीं… वो स्वाभिमान हैं, वो हिम्मत हैं, वो विद्रोह हैं, वो आज़ादी की वो आवाज़ हैं जो कभी दबाई नहीं जा सकती।

साभार
फोटो Ai द्वारा बनवाया गया है

*    डाक्टर धर्मपाल मल्होत्रा की "द गोल्डन लंका ऑफ       रामायण'" किताब का विमोचन*     राज्यसभा सांसद हर्ष महाजन ने किया...
22/04/2026

* डाक्टर धर्मपाल मल्होत्रा की "द गोल्डन लंका ऑफ
रामायण'" किताब का विमोचन

* राज्यसभा सांसद हर्ष महाजन ने किया सादे
समारोह में डाक्टर धर्मपाल मल्होत्रा की लिखी
पुस्तक का विमोचन

राज्यसभा सांसद हर्ष महाजन ने मंगलवार को मुख्यालय में - आयोजित सादे समारोह के दौरान मुख्य विधिक सहायता बचाव पक्ष अधिवक्ता डा. धर्मपाल मल्होत्रा - लिखित हिंदी पुस्तक लंका ही - रामायण की स्वर्ण लंका-अनुसंधान और यात्रा और अंग्रेजी पुस्तक द गोल्डन लंका आफ रामायण रिसर्च एंड ट्रैवल का विधिवत न तरीके से विमोचन किया।

यह - पुस्तक ब्लू रोज पब्लिशर और अमेजन डाट काम द्वारा प्रकाशित की गई है। इस अवसर हर्ष महाजन र ने कहा कि डाक्टर धर्मपाल मल्होत्रा द्वारा लिखित पुस्तकें पूरे

विश्व में रामायण और महर्षि वाल्मीकि द्वारा लिखित भगवान राम की सबसे पवित्र रामायण से संबंधित स्थानों पर अति प्रशंसनीय शोध कार्य किया है।

यह दोनों पुस्तकें अब विश्वभर में अमेजन डाट काम, अमेजन. यूके, अमेजन ईएस, अमेजन आईटी व फिलपकार्ट जैसे विभिन्न प्लेटफार्मो पर उपलब्ध है।

हर्ष महाजन ने कहा कि इससे पहले भी डा. धर्मपाल मल्होत्रा ने चंबा के इतिहास पर शोध कार्य करके आर्कियोलाजिकल हिस्ट्री आफ चंबा और हिस्टोरिकल एंड आर्कियोलाजिकल चंबा जैसी किताबें लिखी हैं। हैं। लेखक डा. धर्मपाल मल्हौत्रा ने कहा कि

पुस्तक ऐतिहासिक, पुरातात्विक, भूगर्भीय, पौराणिक और यात्रा आधारित प्रमाणों के माध्यम से रामायण में वर्णित 100 योजन दूरी और वास्तविक भारत श्रीलंका दूरी में अंतर को लेकर वर्षों से चल इन संदेहों का समाधान प्रस्तुत चल रहे

करती है। इस विषय पर भूगर्भीय एवं पुरातात्विक प्रमाग, पौराणिक एवं ग्रंथीय संदर्भपर विस्तृत चर्चा की गई है। पुस्तकें श्रीलंका के बौद्ध हिंदू सांस्कृक्तिक संबंधों, रामायण ट्रेल, और भारत श्रीलंका के ऐतिहासिक जुडाव पर भी प्रकाश डालती है।

अष्टविनायक, पंचभूत शिव लिंग, द्वादश ज्योतिलिंग और चार धाम यात्रा का संक्षिप्त परिचय भी पुस्तकों में शामिल है। डा. धर्मपाल मल्हौत्रा ने कहा कि यह पुस्तकें मेरे जीवन के लंबे शोध, यात्राओं और आध्यात्मिक अनुभवों का परिणाम है। मेरा उददेश्य पाठकों को प्रमाण आधारित जानकारी देना और श्रीलंका के रामायण स्थलों को समझने में सहायता करना है।
इस मौके पर पूर्व सदर विधायक पवन नैयर, प्रदेश भाजपा कार्यसमिति सदस्य जय सिंह, सर्राफा कारोबारी सतनाम सिंह ग्रोवर, डाक्टर केशव वर्मा, भावना मल्होत्रा त्रा व जसबीर नागपाल भी मौजूद रहे।

डॉ. धरम पाल मल्होत्रा मुख्य विधिक सहायता बचाव पक्ष अधिवक्ता, जिला चम्बा हि. प्र. द्वारा लिखित हिंदी पुस्तक “श्री लंका ही...
21/04/2026

डॉ. धरम पाल मल्होत्रा मुख्य विधिक सहायता बचाव पक्ष अधिवक्ता, जिला चम्बा हि. प्र. द्वारा लिखित हिंदी पुस्तक “श्री लंका ही रामायण की स्वर्ण लंका – अनुसंधान और यात्रा” पुस्तक और अंग्रेज़ी पुस्तक “The Golden Lanka of Ramayan – Research & Travel” का लोकार्पण चंबा में किया गया। यह पुस्तक ब्लू रोज़ पब्लिशर और Amazon.com द्वारा प्रकाशित की गई है।
इस अवसर पर श्री हर्ष महाजन, माननीय सदस्य, राज्यसभा एवं हिमाचल प्रदेश के पूर्व मंत्री, ने पुस्तक का विमोचन किया। राज्यसभा सदस्य और पूर्व मंत्री हर्ष महाजन ने कहा कि डॉ. धर्मपाल मल्होत्रा ​​द्वारा लिखित पुस्तकें पूरे विश्व में रामायण और महर्षि वाल्मीकि द्वारा लिखित भगवान राम की सबसे पवित्र रामायण से संबंधित स्थानों पर अति प्रशंसनीय शोध कार्य किया है। दोनों पुस्तकें अब विश्वभर में— Amazon.com, Amazon.co.uk, Amazon.es, Amazon.it, Flipkart तथा https://blueroseone.com /store/ online प्लेटफॉर्मों पर उपलब्ध हैं । श्री हर्ष महाजन ने कहा कि इससे पहले भी इन्होंने चम्बा के इतिहास पर शोध कार्य करके “आर्कियोलॉजिकल हिस्ट्री ऑफ़ चम्बा” और “हिस्टोरिकल एंड आर्कियोलॉजिकल चम्बा जैसी किताबे लिखी हैं”

चम्बा से पांगी का सफर... अपनों के संग... अपनों के साथ...  हमें आवाज दें....78764 86174
21/04/2026

चम्बा से पांगी का सफर... अपनों के संग... अपनों के साथ... हमें आवाज दें....78764 86174

हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव का ऐलान ....■ 17 मई को होगें प्रदेश में चुनाव ■ इन सभी नगर निकायों और नगर निगमों में ही आ...
21/04/2026

हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव का ऐलान ....
■ 17 मई को होगें प्रदेश में चुनाव
■ इन सभी नगर निकायों और नगर निगमों में ही आज से आचार संहिता लागू

■ पंचायत चुनाव की अधिसूचना अभी नहीं

21/04/2026

आ गया पिटारे के बाहर.....
स्थानीय निकायों के लिए मतदान 17 मई को सुबह 7:00 बजे से दोपहर 3:00 बजे तक होगा।
नामांकन 29 अप्रैल, 30 अप्रैल और 2 मई को सुबह 11:00 बजे से दोपहर 3:00 बजे तक खुले रहेंगे, नामांकनों की जांच 4 मई को होगी और नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि 6 मई है।
स्थानीय निकायों के लिए मतों की गिनती 17 मई को दोपहर 3:00 बजे के बाद शुरू होगी, जबकि नगर निगम के लिए मतगणना 31 मई को निर्धारित है।

*         हर साल देवी बैरावासिनी अपनी बहन चामुंडा            देवी से मिलने जाती हैं ।*         यह सात बहनें हैं। माँ मिं...
20/04/2026

* हर साल देवी बैरावासिनी अपनी बहन चामुंडा
देवी से मिलने जाती हैं ।

* यह सात बहनें हैं। माँ मिंधल सात में बड़ी हैं और
माँ बैरा उनमें सबसे छोटी हैं।

बैरावासिनी माँ चामुंडा
देवी कोठी मंदिर, चुराह घाटी में बैरागढ़ से लगभग 11 कि.मी.दूर है, जो चंबा ज़िले के सबसे कलात्मक रूप से महत्वपूर्ण मंदिरों में से एक है।
राजा उमेद सिंह ने 1754 ई. में इसे बनवाया था, यह पहाड़ी कला और स्थापत्य कला के बेहतरीन उदाहरण के तौर पर खड़ा है।
मंदिर का ऐतिहासिक और स्थापत्य कला का महत्व:-
देवी:
मंदिर के मुख्य गर्भगृह में देवी चामुंडा (काली का एक रूप) को समर्पित है। कहा जाता है कि राजा उमेद सिंह ने अपनी निजी इच्छा पूरी होने के बाद इसे भक्ति के तौर पर बनवाया था।
स्थापत्य कला:
यह ठठर-चूल (काठ-कुनी शैली चम्बा की एक पारंपरिक, भूकंप-रोधी वास्तुकला शैली है, जिसमें मुख्य रूप से लकड़ी (काठ) और पत्थर (कुनी) का उपयोग बिना सीमेंट या कंक्रीट के किया जाता है। यह तकनीक सूखे पत्थर (dry stone) और लकड़ी के लट्ठों को एक-दूसरे के ऊपर रखकर, विशेष रूप से 'डॉवेटेल' (Dovetail) जोड़ों के साथ दीवारें बनाती है, जो इसे अत्यधिक टिकाऊ और लचीला बनाता है।) शैली का एक क्लासिक उदाहरण है, जिसमें इंटरलॉकिंग लकड़ी के बीम और बिना मोर्टार के पत्थर की परतें हैं, जो इसे भूकंप-रोधी बनाती हैं। निचले हिस्से में पत्थर और लकड़ी की एक के बाद एक परतें दिखती हैं, इस तकनीक ने इस स्ट्रक्चर को लगभग तीन सदियों तक बचाए रखा है। लकड़ी की नक्काशी:
यह मंदिर अपनी छतों, खंभों और दरवाज़ों के चौखटों पर लकड़ी की बारीक नक्काशी के लिए मशहूर है। इन नक्काशी में धार्मिक किरदारों, पौराणिक दृश्यों और 18वीं सदी की रोज़मर्रा की ज़िंदगी की झलकियां दिखाई गई हैं।
दीवार पर बनी भित्तिचित्र (म्यूरल):
अंदर की दीवारें पहाड़ी स्टाइल की दुर्लभ भित्तिचित्र से सजी हैं। ये भित्तिचित्र हिंदू पौराणिक कथाओं (जैसे कृष्ण लीला और देवी महात्म्य) के दृश्य दिखाती हैं और मुगल असर के साथ स्थानीय लोक कला का एक अनोखा मेल दिखाती हैं।

सांस्कृतिक संदर्भ
यह मंदिर चुराह इलाके के लोगों के लिए एक खास जगह है, खासकर नवरात्रि के दौरान।
पुराने समय से, यह एक ऐसी जगह रही है जहां स्थानीय लोग मेलों और रस्मों के लिए इकट्ठा होते हैं, और अक्सर देवी के सम्मान में स्थानीय फल-सब्जियां अर्पित करते हैं।

संरक्षण टिप्पणी:-
हाल के सालों में, यह मंदिर संरक्षित करने वालों के बीच चर्चा का विषय रहा है। भवन का जीर्णोद्धार करने की कोशिशों से 18वीं सदी की असली लकड़ी की नक्काशी को बचाने और आधुनिक संरचनात्मक अद्यतन के बीच बहस छिड़ गई है।
देवी कोठी गांव में चामुंडा देवी मंदिर का शानदार नज़ारा, चुराह घाटी के ऊबड़-खाबड़ इलाके में अनोखा संरचनात्मक विन्यास हर किसी को अपनी ओर खींचता है।

स्लेट की छत:
आप पारंपरिक शैली वाली स्लेट की छत साफ देख सकते हैं, जो पश्चिमी हिमालय के पहाड़ी वास्तुकला की खासियत है। इसकी खड़ी ढलान खास तौर पर सर्दियों की भारी बर्फ को हटाने के लिए डिजाइन की गई है।

मंदिर के सामने पक्का आंगन है, जहां लोग त्योहारों के लिए इकट्ठा होते हैं। पूजा के खंभे (ध्वज) और छोटे पत्थर के ढांचे (शायद किसी दूसरे देवता या रखवाले का मंदिर) की मौजूदगी चंबा मंदिर परिसर की खास बातें हैं।
मंदिर का प्रश्च भाग इस बात का एक शानदार नज़ारा देता है कि गांव मंदिर के ऊपर पहाड़ी में कैसे बना है, और सीढ़ीदार खेत (शायद मक्का या दालें जैसी स्थानीय खाद्य चीजें उगाते हैं) दोनों को अलग करते हैं। ऊपर के लकड़ी के फलक पर लाल रंग हाल ही में किया गया है, लेकिन राजा उम्मेद सिंह के 1754 के निर्माण का असली सार इसके अनुपात और पत्थर के काम में दिखता है।
हर साल देवी बैरावासिनी अपनी बहन चामुंडा देवी से मिलने जाती थीं। वे सात बहनें हैं। माँ मिंधल सात में बड़ी हैं और माँ बैरा उनमें सबसे छोटी हैं।

साभार :-

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