22/08/2026
चम्बयाली जनजीवन और सांस्कृतिक महत्व यह गीत चम्बा के समाज, परम्पराओं और उनकी भावनाओं का सजीव दस्तावेज़ है:
प्रकृति से जुड़ाव: हिमाचली लोकगीतों की यह विशेषता रही है कि वे अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए पहाड़ों, नदियों, बादलों और पक्षियों का सहारा लेते हैं।
इस गीत में भी 'हंस' और 'कुंज' के माध्यम से इंसानी जज़्बात को कुदरत के साथ एकाकार कर दिया गया है।
विरासत का संरक्षण: आज के दौर में जहाँ लोकगीत अपनी मूल पहचान खो रहे हैं, मंजू चिश्ती ने इस पारंपरिक बंदिश को बिना किसी कृत्रिम शोर-शराबे (Remix) के, अपनी शुद्ध और आदिम रूप में गाकर नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया है।
यही कारण है कि चम्बा के स्थानीय समारोहों और सांस्कृतिक मंचों पर इस गीत को आज भी अत्यंत सम्मान और भावुकता के साथ सुना जाता है।
"हंसा कुंजा री जोड़ी" सुनते हुए ऐसा प्रतीत होगा..... मानो चम्बा की धौलाधार पहाड़ियों पर हल्की धुंध छाई हो, रिमझिम फुहारें गिर रही हों और कोई दूर बैठा अपनी आत्मा के दूसरे हिस्से को याद कर रहा हो। यह गीत लोक-संगीत की उस पराकाष्ठा को छूता है जहाँ शब्द कम पड़ जाते हैं और केवल भावनाएं बहती हैं।