16/07/2026
पैसा फेंक तमाशा देख
९/७/२६
गुज़र गया आँखों के सामने,
यह एक दृश्य सुहाना।
जिसके पीछे छिपा हुआ है,
एक गुज़रा हुआ ज़माना।।
भूली बिसरी यादें मन में,
फिर करती हैं कोलाहल।
करती हैं प्रेरित इसको,
कहती हैं लौटकर फिर वहीं चला।।
लौट चली फिर मैं बचपन में,
माँ के हाथों से खजाना।
वे पीछे पीछे भागें,
तुम रुक कर उन्हें चिढ़ाना।
पिता के पैर की आहट आयी,
हो गया जोश सब ठंडा।
याद आ गया उनका थप्पड़,
उनका प्यारा सा डंडा।
यौवन क्या आया जीवन में,
बदल गयी तस्वीर।
जीवन के संग्राम हेतु,
मिल गयी एक हमसफ़ीर।
भूला बचपन याद आया,
घर में आयी एक किलकारी।
दादा-दादी बनकर फिर से,
माँ-बाप ने ओढ़ ली जिम्मेदारी।
हँसता गाता जीवन बीता,
आया अब इसका चौथापन।
याद आ रहा फिर से बचपन,
याद आ रहा फिर अपनापन।
जीवन है चलचित्र समय का,
यह खेल है कुछ वर्ष महीनों का।
पैसा फेंक तमाशा देख,
छोड़ो तुम ख़्वाब हसीनों का।