Dr Pranav Gautam

  • Home
  • Dr Pranav Gautam

Dr Pranav Gautam Assistant professor Ayurveda, Vice-president Vishwa Ayurveda Parishad, Bareilly
Kavita....Geet...Navgeet...kahani....
Ayurveda ....Panchkarma...

' गुरुग्राम समाचार ' में प्रकाशित मेरा एक नवगीत  । 'गुरुग्राम समाचार 'समाचार - पत्र के ' साहित्य सृजन ' परिशिष्ट के सम्प...
18/06/2026

' गुरुग्राम समाचार ' में प्रकाशित मेरा एक नवगीत ।
'गुरुग्राम समाचार 'समाचार - पत्र के ' साहित्य सृजन ' परिशिष्ट के सम्पादक आदरणीय राजपाल सिंह गुलिया जी को हृदय से आभार

माँ की याद मे एक गीत----ऐसा पहले हुआ कभी ना,क्यों तुम हमसे रूठ गईं माँलाख पुकारा, मनुहारें कीं लेकिन हमसे छूट गईं माँ।जा...
12/06/2026

माँ की याद मे एक गीत----

ऐसा पहले हुआ कभी ना,क्यों तुम हमसे रूठ गईं माँ
लाख पुकारा, मनुहारें कीं लेकिन हमसे छूट गईं माँ।

जाना अगर जरूरी ही था
तो हमको बतला ही जातीं
कर लेते हम जी भर बातें
मन की बातें आप सुनातीं

कहने को थीं कितनी बातें, सभी अधूरी छूट गईं माँ।

यादों की सारी गलियों में
मिलती रहती हो माँ पल छिन
एक व्यथा मन में रहती कि
लौट नहीं पाएंगे वे दिन

मन का मेरे चैन गया है,तन की मेरी भूख गई माँ।

जी करता है रो लूँ जी भर
पर आंसू तो सूख रहे हैं
जिम्मेदारी आन पड़ी सिर
अहसासों में हूक रहे हैं

मेरा मुझसे छिना बचपना बोलो कैसे चूक गईं माँ।

मौसम हो सुख का या दुख का
हरपल साथ खड़ी थी मेरे
दिया हौसला, रहा सदा जो
लक्ष्मण रेखा सा हाँ घेरे

मौसम कितना सर्द हुआ है,मेरे मन की धूप गईं माँ।

तीरथ कभी कहीं जातीं तो
घर भर को सौगातें लातीं
और स्वयं के लिए सदा ही
पावन गंगा जल ले आतीं

जाते जाते भी गंगा जल पीकर बस दो घूंट गईं माँ।
-- डॉ प्रणव गौतम
राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज एवं चिकित्सालय बरेली

27/05/2026
20/05/2026

वरिष्ठ नवगीतकार आदरणीय रमेश गौतम जी भाईसाहब के घर आगमन पर हम सभी के आग्रह पर उन्होंने यह नवगीत सुनाया था।
यह नवगीत सीधे मन को छू लेता है। यह गीत उनके सम्वेदनशील कवि मन की जीवंत अभिव्यक्ति है। आदरणीय श्री रमेश गौतम जी भाईसाहब एवं भाभी जी को सादर प्रणाम निवेदित है।

मित्रों! Typhoid होने के कारण घर में आराम कर रहा हूँ।  सोचा समय काटने के लिए कुछ लिख लिया जाए------हैं पता माकूल सब उल्ट...
18/05/2026

मित्रों! Typhoid होने के कारण घर में आराम कर रहा हूँ। सोचा समय काटने के लिए कुछ लिख लिया जाए------

हैं पता माकूल सब उल्टे सवालों के जवाब
बस हमें नीचा दिखाने की रही आदत नहीं।

हम पिलाते दूध हैं आस्तीनी साँप को
पीठ में खंजर घुसाने की हमें आदत नहीं।

मुद्दतों से चल रहे खुद की मुकर्रर राह पर
मौकापरस्ती राह पर चलना रही आदत नहीं।

थे हमें मौके कि तोड़ी जा सकें गुमनामियां
पर हमे बदनामियों की थी कभी आदत नहीं।

शान से ऊँचा खड़ा है घर मिरे बूढ़ा शजर
काटना अपनी जड़ों को है मिरी आदत नहीं ।

फक्र है हमको हमी पर हम उसूलों पर चले
बेवजह तारीफ करना है मिरी आदत नहीं।

चाह कर भी लिख सके न 'प्रणव' मुकम्मल इक ग़ज़ल
अल्फाज़ थे कम और चोरी की हमें आदत नहीं ।

डॉ प्रणव गौतम
राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज एवं चिकित्सालय बरेली

हो गए हम ईरान ---------------------रहा नहीं कुछ खोने का डर,हो गए हम ईरान। अंतर्द्वंदों का रण भीषण मन को ललकारेजाने कितनी...
09/04/2026

हो गए हम ईरान
---------------------

रहा नहीं कुछ खोने का डर,
हो गए हम ईरान।

अंतर्द्वंदों का रण भीषण
मन को ललकारे
जाने कितनी बार
स्वयं से ही तो हम हारे

सुबह सुनहरी कब आएगी
सोच रहे हैरान।

फिलिस्तीन बन ढूंढ रहे हम
अपनी मिट्टी को
भटक रहे हैं जख्म आस में
मरहम पट्टी को

इच्छाओं की गाजा पट्टी
हो गई है वीरान।

रही विरासत होगी अपनी
ढाई आखर की
उदासीनता गहरी हो गई
अब तो सागर सी

संबंधों का जल डमरू मध्य
झेल रहा तूफान।
- डॉ प्रणव गौतम
राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज एवं चिकित्सालय बरेली

Address

Government Ayurvedic College

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Dr Pranav Gautam posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Shortcuts

  • Want your establishment to be the top-listed Arts & Entertainment?

Share