15/10/2026
मैं तलबगार नहीं, तुमसे है बस प्यार मुझे
तिरे मासूम ख़यालों पर न इख्तियार मुझे।
दूर कितने भी हुए दिल से तुम जा न सके
तेरी यादों से मिला हरदम करार मुझे।
तुम्हें चाहा मैंने इतनी ही खता मेरी
न किसी ख्वाब में जानम तिरा इन्तज़ार मुझे।
है दुआ तू जिसे चाहे तुझे मिले वो सनम
तेरी खुशियो से भला क्यों हो इन्कार मुझे।
नहीं शिकवा है कोई ना ही तमन्ना दिल में
तेरी हर शह पर मंजूर हुई हार मुझे।
ना कोई दर्द ना चुभन है टूटे दिल में
आशिकी का तेरी अब तक है खुमार मुझे।
- डॉ प्रणव गौतम
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