Dr Pranav Gautam

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Dr Pranav Gautam Assistant professor Ayurveda, Vice-president Vishwa Ayurveda Parishad, Bareilly
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मैं तलबगार नहीं, तुमसे है बस प्यार मुझे तिरे मासूम ख़यालों पर न इख्तियार मुझे।दूर कितने भी हुए दिल से तुम जा न सके तेरी ...
15/10/2026

मैं तलबगार नहीं, तुमसे है बस प्यार मुझे
तिरे मासूम ख़यालों पर न इख्तियार मुझे।

दूर कितने भी हुए दिल से तुम जा न सके
तेरी यादों से मिला हरदम करार मुझे।

तुम्हें चाहा मैंने इतनी ही खता मेरी
न किसी ख्वाब में जानम तिरा इन्तज़ार मुझे।

है दुआ तू जिसे चाहे तुझे मिले वो सनम
तेरी खुशियो से भला क्यों हो इन्कार मुझे।

नहीं शिकवा है कोई ना ही तमन्ना दिल में
तेरी हर शह पर मंजूर हुई हार मुझे।

ना कोई दर्द ना चुभन है टूटे दिल में
आशिकी का तेरी अब तक है खुमार मुझे।

- डॉ प्रणव गौतम

#ग़ज़ल
#डॉप्रणवगौतम

05/10/2026

बेवजह बेखुदी का आलम है
तुम मेरे साथ नहीं मालुम है ।

हाशिये पर खड़ा मैं सोच रहा
क्या तेरे दिल में मेरा कॉलम है।

तू भले ही न मुझे पहचाने
लोग कहते हैं तेरा बालम है।

मैंने चाहा तुम्हें इबादत सा
क्यों अदावत का हुआ मौसम है।

तेरी रुसवाईयों के जंगल में
जुस्तजू मेरी आज भी गुम है।

और कितने सितम करोगे सनम
जो किए तूने सितम क्या कम हैं।

चाक दिल की खबर छपी है क्या
देखो अखबार का पन्ना नम है।

जीते जी तो न बहे अश्क तिरे
कोई दीवाना हुआ बेदम है।।
डॉ प्रणव गौतम
राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज एवं चिकित्सालय बरेली

अगर ग़ज़ल दिल को छू जाए तो
Like • Share • Follow करना न भूलिएगा। 🙏🌹
— डॉ. प्रणव गौतम गीतकार

#बेखुदी
#ग़ज़ल
#डॉप्रणवगौतम

उत्कर्ष ग्रुप द्वारा आयोजित राजभाषा पखवाड़े के अंतर्गत आयोजित कवि सम्मेलन में उपस्थित होकर काव्य-पाठ करने का सुअवसर प्रा...
29/09/2026

उत्कर्ष ग्रुप द्वारा आयोजित राजभाषा पखवाड़े के अंतर्गत आयोजित कवि सम्मेलन में उपस्थित होकर काव्य-पाठ करने का सुअवसर प्राप्त हुआ।
इस आत्मीय एवं गरिमामय साहित्यिक आयोजन के लिए कार्यक्रम संयोजक कविवर डॉ. मुकेश ‘मीत’ जी का हृदय से आभार एवं साधुवाद।
साहित्य, भाषा और सृजन की यह यात्रा यूँ ही निरंतर चलती रहे।

हिन्दी और साहित्य के इस सुंदर आयोजन में स्नेहपूर्वक आमंत्रण हेतु उत्कर्ष ग्रुप एवं संयोजक डॉ. मुकेश ‘मीत’ जी का हृदय से ...
26/09/2026

हिन्दी और साहित्य के इस सुंदर आयोजन में स्नेहपूर्वक आमंत्रण हेतु उत्कर्ष ग्रुप एवं संयोजक डॉ. मुकेश ‘मीत’ जी का हृदय से आभार

06/09/2026

आज का गीत वैराग्य का---

अब चला जाता नहीं है
----------------------------
चलते चलते शाम हुई
अब चला जाता नहीं है

मैं मरूस्थल में उगी
प्यास में क्यों आस ढूंढू
जन्म मृत्यु से परे मैं
कौन सा आकाश ढूंढू

मैं ठहर जाऊँ कहाँ
मेरा यहाँ नाता नहीं है।

और कब तक
मैं सृजन संहार में पिसता रहूँगा
धार वैतरणी बता
कै बार मैं रिसता रहूँगा

गीत मुक्ति के,
बता तू
प्राण!
क्यों गाता नहीं है।

हूँ सफ़र में आजकल मैं
डरा सहमा भरम तन का,
आत्मा जो नियंता है
है वही आधार मन का

अमर ही है,
वह कभी आता नहीं
जाता नहीं है।

- डॉ0 प्रणव गौतम
राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज एवं चिकित्सालय बरेली

#हिंदीकविता
#नवगीत
#दार्शनिककविता
#जीवनदर्शन
#वैराग्य
#डॉप्रणवगौतम

यह उन दिनों की बात है जब मैं BSc की पढ़ाई के दौरान NSS की ओर से एक गरीब बस्ती में शाम के समय अनपढ़ बच्चों को साक्षर बनान...
05/09/2026

यह उन दिनों की बात है जब मैं BSc की पढ़ाई के दौरान NSS की ओर से एक गरीब बस्ती में शाम के समय अनपढ़ बच्चों को साक्षर बनाने के लिए पढ़ाने जाता था। समय बीता और उस बस्ती में मेरा जाना बंद हो गया। लगभग एक साल बाद एक दिन बाजार से एक रिक्शे में बैठकर घर आया। जब घर आकर मैंने उस रिक्शेवाले लडके को रुपये देने लगा तो उसने लेने से इंकार कर दिया। मैंने आश्चर्य से पूछा भाई क्यों नहीं ले रहे हो रुपये। वह बोला आपने मुझे पहचाना नहीं, आप मेरी बस्ती में पढ़ाने आते थे जो थोड़ा बहुत मुझे लिखना पढ़ना आता है वह सब आपने ही मुझे सिखाया था।
इस घटना ने मुझे भीतर तक झकझोर दिया। पहला विचार जो मन में आया वह यह था कि मेरा पढ़ाया बच्चा रिक्शा चला रहा है तो मेरे पढ़ाने का क्या लाभ। किन्तु तुरंत ही दूसरे विचार ने मन को राहत दी कि कोई बात नहीं भले ही रिक्शा चला रहा है पर उसमें वह संस्कार तो उत्पन्न हुए कि अपने गुरु का सम्मान करे। आजकल के अनेक विद्यार्थी पढ़ाई के बाद अपने शिक्षकों से नजर बचाकर निकल जाते हैं।यकीन मानिये एक शिक्षक की सबसे बड़ी पूंजी यही है कि पढ़ाई के बाद भी कोई छात्र उसे याद रखे और गर्व से कहें कि मैं अमुक शिक्षक का छात्र रहा हूँ।

डॉ0 प्रणव गौतम
राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज एवं चिकित्सालय बरेली
#शिक्षकदिवस
#संस्मरण

चित्र Google से साभार
#डॉप्रणवगौतम

माँ को गए सौ से अधिक दिन बीत गए, लेकिन लगता है जैसे समय वहीं ठहर गया है। कहते हैं कि समय हर घाव भर देता है, पर माँ की कम...
01/09/2026

माँ को गए सौ से अधिक दिन बीत गए, लेकिन लगता है जैसे समय वहीं ठहर गया है। कहते हैं कि समय हर घाव भर देता है, पर माँ की कमी शायद वह खालीपन है जिसे समय भी नहीं भर पाता।माँ चली गईं, लेकिन उनकी ममता, उनकी बातें और उनका आशीर्वाद आज भी मेरे जीवन की सबसे अनमोल धरोहर हैं।
इसी सन्दर्भ में एक गीत प्रस्तुत है-
माँ तुम्हारी याद आयी
--------‐------------‐-----
फिर उठी काली घटा
जब आंख मेरी डबडबाई
दीप देहरी पर धरा तो
माँ तुम्हारी याद आयी।

खोलकर संदूक देखा
खुशबुएं तेरी बसी थीं
एक वीराना शहर था
अब नहीं तेरी हँसी थी

जी उठीं तन्हाईयां तो
रूह मेरी थरथराई
दीप देहरी पर धरा तो
माँ तुम्हारी याद आयी।

थाप एपन की
महावर की सजी अब तक रंगोली
यूँ अचानक से लगा कि
माँ तुम्हीं ने आँख खोली

नींद से जागा भला क्यों
ख्वाब में माँ तुम जो आयीं
दीप देहरी पर धरा तो
माँ तुम्हारी याद आयी।

हम निभाएं कौन सा
और क्यों भला कोई धरम
टूट गए भीतर तलक
जब टूटा मन का भी भरम

हूक जो मन में उठी है
दे भला किसकी दुहाई
दीप देहरी पर धरा तो
माँ तुम्हारी याद आयी।

प्यार माँ का साथ में ही
अनवरत चलता रहेगा
भोर की पहली किरण सा
साँस में ढलता रहेगा

है वचन चलते रहेंगे
राह जो तुमने दिखाई
दीप देहरी पर रखा तो
माँ तुम्हारी याद आयी।

- डॉ0 प्रणव गौतम
राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज एवं चिकित्सालय बरेली
#माँ
#गीत
#माँकीयादें
#डॉप्रणवगौतम

26/08/2026

मन का गीत लिखूँ मैं कब
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भीतर बाहर कोलाहल है
मन का गीत लिखूँ मैं कब

सुरमई शामों की बाहों में
सिमटी हैं केवल आहें
मंज़िल खोज रही हैं कब से
उलझी उलझी सब राहें

उलझा जीवन ,जाऊँ कहाँ,
कैसे खुद से मिलूँ मैं अब।

एक अकेला दीप सिसकता,
मावस डूबे अँधियारे
साथ निभाने कब आयेंगे
नभ में पूनम के तारे

मीत मिलेंगें क्या फिर, जिनसे
मन की बात कहूँ मैं सब।

अनुरागी मन भीगा भीगा
आँसू के हर पल पहरे
चौसर के न जाने किस घर
भाग्य फिसल कर जा ठहरे

तन के साथ पिघल जाना मन
गोधूलि में दहूँ मैं जब।

डॉ प्रणव गौतम
राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज एवं चिकित्सालय बरेली

' गुरुग्राम समाचार ' में प्रकाशित मेरा एक नवगीत  । 'गुरुग्राम समाचार 'समाचार - पत्र के ' साहित्य सृजन ' परिशिष्ट के सम्प...
18/06/2026

' गुरुग्राम समाचार ' में प्रकाशित मेरा एक नवगीत ।
'गुरुग्राम समाचार 'समाचार - पत्र के ' साहित्य सृजन ' परिशिष्ट के सम्पादक आदरणीय राजपाल सिंह गुलिया जी को हृदय से आभार

माँ की याद मे एक गीत----ऐसा पहले हुआ कभी ना,क्यों तुम हमसे रूठ गईं माँलाख पुकारा, मनुहारें कीं लेकिन हमसे छूट गईं माँ।जा...
12/06/2026

माँ की याद मे एक गीत----

ऐसा पहले हुआ कभी ना,क्यों तुम हमसे रूठ गईं माँ
लाख पुकारा, मनुहारें कीं लेकिन हमसे छूट गईं माँ।

जाना अगर जरूरी ही था
तो हमको बतला ही जातीं
कर लेते हम जी भर बातें
मन की बातें आप सुनातीं

कहने को थीं कितनी बातें, सभी अधूरी छूट गईं माँ।

यादों की सारी गलियों में
मिलती रहती हो माँ पल छिन
एक व्यथा मन में रहती कि
लौट नहीं पाएंगे वे दिन

मन का मेरे चैन गया है,तन की मेरी भूख गई माँ।

जी करता है रो लूँ जी भर
पर आंसू तो सूख रहे हैं
जिम्मेदारी आन पड़ी सिर
अहसासों में हूक रहे हैं

मेरा मुझसे छिना बचपना बोलो कैसे चूक गईं माँ।

मौसम हो सुख का या दुख का
हरपल साथ खड़ी थी मेरे
दिया हौसला, रहा सदा जो
लक्ष्मण रेखा सा हाँ घेरे

मौसम कितना सर्द हुआ है,मेरे मन की धूप गईं माँ।

तीरथ कभी कहीं जातीं तो
घर भर को सौगातें लातीं
और स्वयं के लिए सदा ही
पावन गंगा जल ले आतीं

जाते जाते भी गंगा जल पीकर बस दो घूंट गईं माँ।
-- डॉ प्रणव गौतम
राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज एवं चिकित्सालय बरेली

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