07/09/2023
𝐂𝐡𝐚𝐬𝐡𝐦𝐞 𝐁𝐚𝐝𝐝𝐨𝐨𝐫-(𝟏𝟗𝟖𝟏)
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सई परांजपे द्वारा निर्देशित फिल्म 'चश्मे बद्दूर' के एक दृश्य में नायक-नायिका दिल्ली के तालकटोरा गार्डन में बने एक ओपन एयर रेस्तरां में बैठे हैं और वे वेटर से पूछते हैं, ........
'यहां अच्छा क्या है ?'
तो वेटर उन्हें जवाब में कहता है, '
जी यहां का माहौल बहुत अच्छा है'
80 के दशक की फिल्म 'चश्मे बद्दूर' की यही खासियत है, अपने समय और परिवेश में रचा-बसा हास्य।....... इसके कई संवादों में उस दौर की दिल्ली और उसकी कॉलेज लाइफ का कोई-न-कोई संदर्भ है सई परांजपे की फिल्म 'चश्मे बद्दूर ' में दिल्ली के गोल्फ लिंक्स,लोधी गार्डन और पुराना किला के बहुत से दृश्य थे
कहानी है तीन बेरोजगार लड़कों की, जो दिल्ली की सड़कों पर घूमते हुए नौकरी और छोकरी दोनों की तलाश में हैं। फिल्म में राकेश बेदी और रवि वासवानी ने नायक के दोस्तों की भूमिका निभाई है और अपने दोस्त को 'कुएं' में ढकेलने में इनका बड़ा हाथ है। .......नायक-नायिका की भूमिका में फारूक शेख और दीप्ति नवल की जोड़ी भी खूब जमी है दीप्ति नवल मशहूर एक्टर फारुख शेख के बेहद करीब मानी जाती थीं दोनों ने साथ में कई फिल्में की फारूक और दीप्ति ' चश्मेबद्दूर','साथ साथ', 'कथा और फासले' रंग-बिरंगी जैसी कई फिल्मों में बतौर हीरो-हीरोइन काम कर चुके हैं फारुख शेख और दीप्ती नवल की जोडी उन कलाकारों में से थी जिनकी केमिस्ट्री समय के साथ और मेच्योर हुई है
शानदार आवाज के धनी सईद जाफरी हिंदी सिनेमा का एक प्रमुख व्यक्तित्व है वह विश्व सिनेमा, टेलीविजन और रेडियो में अपने काम के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध थे फारूख शेख के साथ चश्मेबद्दूर (1981) में 'लल्लन मियां' का किरदार आज भी उनके निभाए सबसे पसंदीदा पात्रों में से माना जाता है ........................................................................................................................
राकेश बेदी ,रवि वासवानी और फारुख शेख चश्मे बद्दूर -(1981)
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पवन मेहरा
'सुहानी यादे बीते सुनहरे दौर की '✍️
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