27/03/2025
13 जुलाई 2002 को लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर भारत और इंग्लैंड के बीच नेटवेस्ट सीरीज का फाइनल खेला गया था, और यह मैच भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे रोमांचक और यादगार मुकाबलों में से एक बन गया। इस मैच की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है, जिसमें हार के कगार से शानदार वापसी, युवा खिलाड़ियों का जज्बा और एक कप्तान की बेबाकी शामिल है।
कहानी की शुरुआत
इंग्लैंड ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया। उनके सलामी बल्लेबाज मार्कस ट्रेस्कोथिक (109) और कप्तान नासिर हुसैन (115) ने शानदार शतक जड़े। दोनों ने 185 रनों की साझेदारी की, और फिर एंड्रयू फ्लिंटॉफ के तेज तर्रार रनों की मदद से इंग्लैंड ने 50 ओवर में 325/5 का विशाल स्कोर खड़ा किया। उस समय 300 से ज्यादा रनों का पीछा करना लगभग असंभव माना जाता था, खासकर लॉर्ड्स जैसे बड़े मैदान पर। भारतीय फैंस को लगा कि शायद यह एक और फाइनल हारने वाला दिन होगा, क्योंकि भारत उस समय तक लगातार 9 मल्टी-टीम टूर्नामेंट फाइनल हार चुका था।
भारत की शुरुआत और संकट
भारत की पारी की शुरुआत शानदार रही। सौरव गांगुली (60) और वीरेंद्र सहवाग (45) ने पहले विकेट के लिए 106 रनों की साझेदारी की। गांगुली ने अपनी आक्रामक शैली में कई शानदार शॉट्स लगाए, लेकिन जैसे ही यह जोड़ी टूटी, भारतीय पारी लड़खड़ा गई। दिनेश मोंगिया, राहुल द्रविड़ और फिर सचिन तेंदुलकर (14) जल्दी-जल्दी आउट हो गए। 23.6 ओवर में स्कोर 146/5 हो गया था। सचिन का विकेट गिरते ही कई फैंस ने टीवी बंद कर दिया, और स्टेडियम में भी सन्नाटा छा गया। ऐसा लग रहा था कि इंग्लैंड आसानी से जीत जाएगा।
दो युवाओं का करिश्मा
लेकिन कहानी अभी खत्म नहीं हुई थी। मैदान पर आए दो युवा खिलाड़ी - युवराज सिंह और मोहम्मद कैफ। दोनों ने धैर्य और आक्रामकता का शानदार मिश्रण दिखाया। युवराज ने 63 गेंदों में 69 रन बनाए, जिसमें कई छक्के और चौके शामिल थे, वहीं कैफ ने संयम के साथ बल्लेबाजी करते हुए टीम को संभाला। दोनों ने छठे विकेट के लिए 121 रनों की साझेदारी की, जिसने मैच का रुख बदल दिया। युवराज जब 41वें ओवर में आउट हुए, तब भारत को अभी भी 59 रनों की जरूरत थी। लेकिन कैफ ने हार नहीं मानी।
अंतिम रोमांच और जीत
कैफ ने हरभजन सिंह (15) और फिर निचले क्रम के बल्लेबाजों के साथ मिलकर स्कोर को आगे बढ़ाया। आखिरी ओवर में भारत को 2 रन चाहिए थे, और जहीर खान क्रीज पर थे। एंड्रयू फ्लिंटॉफ की गेंद पर जहीर ने शॉट खेला, और ओवरथ्रो की वजह से भारत को 2 रन मिल गए। भारत ने 49.3 ओवर में 326/8 बनाकर 2 विकेट से यह ऐतिहासिक जीत हासिल की। कैफ 75 गेंदों में 87 रन बनाकर नाबाद रहे और मैन ऑफ द मैच बने।
गांगुली का जलवा
जीत के बाद जो हुआ, वो भारतीय क्रिकेट फैंस के लिए हमेशा यादगार रहेगा। कप्तान सौरव गांगुली ने लॉर्ड्स की मशहूर बालकनी पर अपनी शर्ट उतारी और उसे हवा में लहराया। यह एक जवाब था एंड्रयू फ्लिंटॉफ को, जिन्होंने कुछ महीने पहले मुंबई में भारत के खिलाफ जीत के बाद ऐसा ही किया था। गांगुली का यह जश्न उस समय लॉर्ड्स की शांत और पारंपरिक माहौल के लिए चौंकाने वाला था, लेकिन भारतीय फैंस के लिए यह गर्व का पल था। बाद में गांगुली ने कहा कि उन्हें इस हरकत पर थोड़ी शर्मिंदगी हुई, लेकिन उस पल में यह उनकी भावनाओं का इजहार था।
नतीजा
यह जीत सिर्फ एक ट्रॉफी नहीं थी, बल्कि भारतीय क्रिकेट में एक नए आत्मविश्वास की शुरुआत थी। युवराज और कैफ ने दिखाया कि भारत सिर्फ बड़े नामों पर निर्भर नहीं है। यह मैच आज भी क्रिकेट प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय है, और गांगुली का शर्ट-लहराना भारतीय क्रिकेट का एक आइकॉनिक लम्हा बन गया।