08/08/2026
बहुत समय पहले एक घने जंगल में चिंकू नाम का एक छोटा खरगोश रहता था। वह बहुत जिज्ञासु और बहादुर था। जंगल के सभी जानवर उससे प्यार करते थे।
एक दिन जंगल में खबर फैल गई कि पुराने बरगद के पेड़ के पास रात को अजीब सी चमक दिखाई देती है। कोई नहीं जानता था कि वह चमक क्या है। कुछ जानवर डर गए और उस रास्ते पर जाना बंद कर दिया।
चिंकू ने सोचा, "डरने से अच्छा है कि सच का पता लगाया जाए।"
अगली रात वह अपने दोस्तों—मोंटू बंदर और गब्बू हिरण—के साथ बरगद के पेड़ की ओर चल पड़ा। चारों तरफ सन्नाटा था। पेड़ों की शाखाएँ हवा में हिल रही थीं और झींगुरों की आवाज़ गूंज रही थी।
जैसे ही वे बरगद के पेड़ के पास पहुँचे, उन्हें दूर एक नीली चमक दिखाई दी। तीनों थोड़े घबरा गए, लेकिन आगे बढ़ते रहे।
जब वे चमक के पास पहुँचे, तो उन्होंने देखा कि वह कोई भूत या जादू नहीं था। वहाँ हजारों जुगनू एक साथ उड़ रहे थे। उनकी रोशनी से पूरा इलाका जगमगा रहा था। यह दृश्य इतना सुंदर था कि तीनों की आँखें खुशी से चमक उठीं।
तभी उन्हें एक धीमी आवाज़ सुनाई दी। पास जाकर देखा तो एक बूढ़ा कछुआ एक गड्ढे में फँसा हुआ था। शायद वही कई दिनों से मदद के लिए पुकार रहा था।
चिंकू और उसके दोस्तों ने मिलकर लकड़ियाँ और बेलें इकट्ठी कीं। काफी मेहनत के बाद उन्होंने कछुए को बाहर निकाल लिया।
कछुए ने मुस्कुराते हुए कहा, "तुम तीनों ने बहादुरी और दया का परिचय दिया है। जंगल को तुम जैसे दोस्तों की जरूरत है।"
अगले दिन जंगल के सभी जानवरों को पूरी बात पता चली। सबने चिंकू, मोंटू और गब्बू की खूब प्रशंसा की। उस दिन से किसी ने भी बिना सच जाने किसी बात से डरना बंद कर दिया।
जंगल के जानवरों ने सीखा कि डर अक्सर अज्ञानता से पैदा होता है, लेकिन साहस और समझदारी से हर रहस्य का समाधान किया जा सकता है।
और इस तरह जंगल में फिर से खुशी और शांति लौट आई।
सीख: बिना सच जाने किसी बात से डरना नहीं चाहिए। साहस, दोस्ती और मदद की भावना हमें हर मुश्किल से बाहर निकाल सकती है। :::