Lafzon ka aangan

Lafzon ka aangan Ehsaanon se saja angan,jahan kavita rooh se likhi jaati hai �

*शब्द छोटे हों भले,मगर भाव गहरे होना चाहिए*फिज़ूल की बातों में समय न व्यर्थ करना चाहिए,शब्द छोटे हों भले,मगर भाव गहरे हो...
03/06/2026

*शब्द छोटे हों भले,मगर भाव गहरे होना चाहिए*

फिज़ूल की बातों में समय न व्यर्थ करना चाहिए,
शब्द छोटे हों भले,मगर भाव गहरे होना चाहिए!

अपनी बातों को कम शब्दों में कहना आना चाहिए,
अपनी भावनाओं को,दूसरों तक पहुँचाना एक कला होनी चाहिए!

अतिशयोक्ति पूर्ण बातें सुनने में अच्छी ज़रूर लगती हैं,
पर दिल में वो गहरी छाप नहीं छोड़ती हैं!

बातों में मिठास इतनी हो कि बहुत कुछ कहे बिना ही,
सामने वाला हमारी अभिव्यक्ति को समझ सके!

हमारे कहे हर छोटे से छोटे शब्द,
किसी दिल की गहराई में उतर सकें!

अदिति रूसिया
वारासिवनी
३/६/२०२६

*शब्द छोटे हों भले,मगर भाव गहरे होना चाहिए*कविता तुकांत हो या अतुकांत,हमारे मन का दर्पण होना चाहिए!जो भी लिखें थोड़ा लिख...
03/06/2026

*शब्द छोटे हों भले,मगर भाव गहरे होना चाहिए*

कविता तुकांत हो या अतुकांत,
हमारे मन का दर्पण होना चाहिए!

जो भी लिखें थोड़ा लिखें बस,
हर शब्द में गहरे भाव होना चाहिए!

चार लाइन ही लिखे हम कविता के,
लंबी और अर्थहीन नहीं होना चाहिए!

कम बोलो मगर अच्छा बोला,
बिन कहे भी बात हमारी लोगों को समझ आना चाहिए!

मौन की भाषा और भावों की गहराई,
हमारी आँखों से समझ आना चाहिए!

हमारी लिखी हर पंक्ति हमारे मन के भाव हैं,
शब्द छोटे हों भले, मगर भाव गहरे होना चाहिए!

कविता अपनी संवेदनाओं को व्यक्त करने का साधन है,
कम शब्दों में जो अपनी बात कह जाए ऐसी कविता होनी चाहिए!

हमारे शब्द जब दीपक बनते हैं,
भावों को तब लौ बन जाना चाहिए!

कभी कभी कविता में लिखी एक पंक्ति ही ऐसी लिख जाती है,
कि वो अमर हो जाना चाहती है!

भाव अगर गहरे हों कहानी में,
दो शब्द ही काफ़ी होते हैं उसे अमर बनाने में!

सीख रही हूँ मैं भी कम शब्दों में बातों को कहना,
बच रहीं हूँ मैं भी शब्दों के दोहराव को लिखने से!

धीरे धीरे आ ही जाएगा मन की बातों को,
कम शब्दों में लिखना और बिन कहे भावों को समझाना!

कोशिश रहेगी अब मेरी पहली यही,
थोड़ा लिखूँ अच्छा लिखूँ शब्द भले छोटे हों मगर भाव गहरे!

अदिति रूसिया
वारासिवनी
३/६/२०२६

*उलझन*ये कैसी  विडंबना है ये कैसा विधि का विधान इतनी अच्छी पत्नी के होते हुए भी विपिन कैसे दूसरी लड़की को पसंद कर सकता ह...
02/06/2026

*उलझन*

ये कैसी विडंबना है ये कैसा विधि का विधान इतनी अच्छी पत्नी के होते हुए भी विपिन कैसे दूसरी लड़की को पसंद कर सकता है क्या उसे अपनी छोटी सी बेटी जिया का जरा भी ख़याल नहीं?
इसी *उलझन* में उलझी वो सोचती रही आख़िर क्या कमी है सुलक्षणा में इतनी बड़ी गायनेकोलॉजिस्ट है आज पूरे शहर में उसका नाम है क्यों तलाक देना चाहता आख़िर विपिन क्यों?
ऐसा क्या है उस रागिनी में जो सुलक्षणा में नहीं?इसी सोच में डूबी चेतना बाहर से आई हुई मम्मी जी मम्मी जी की आवाज से चौंक जाती है और अपने गालों में डुलके हुए आँसुओं को धीरे से पोंछते हुए बोलती है हम्म क्या हुआ बेटा कोई काम था!
अरे मम्मी जी आप रो रहीं थीं क्या हुआ ?
मैंने कितनी बार कहा है माँ आप मेरे लिए परेशान मत हुआ करो मेरी किस्मत में जोलिखा है वो होकर रहेगा। क्या फायदा ऐसे बोझ से रिश्ते को ढोने का जहाँ प्रेम ही न हो।
वो मेरे साथ रहकर भी मेरे साथ नहीं होते उन्हें अपनी बेटी की भी कोई फ़िक्र नहीं तो इतना क्यों सोचना! मैंने बहुत प्रयास कर लिए इस रिश्ते को बचाने के पर अब नहीं,अब मुझसे और बर्दाश्त नहीं होता।
अब जिया भी बड़ी हो रही है वक़्त रहते हमें अलग हो जाना चाहिए इसी में हम सभी की भलाई है। रोज़ रोज़ के तमाशे से जिया पर भी गलत प्रभाव पड़ता है।
अच्छा चलिए चाय के लिए पापा जी आपका इंतजार कर रहे हैं।
चेतना ने एक गहरी साँस ली अपने आँसू पोछे और चेहरे पर मुस्कान लिए वो बाहर आई उसने अपने पति रमेश से कहा मैंने एक फ़ैसला लिया है और में चाहती हूँ कि मेरे इस फ़ैसले में आप सभी मेरा साथ दें।
ऐसा क्या फ़ैसला लिया है माँ कहते हुए छोटी बहू रेणु ने उसे बीच में ही बात काटते हुए कहा।
मेरा फ़ैसला ये है कि अब सुलक्षणा और विपिन दोनों अलग रहेंगे!
ये क्या कह रही हो चेतना तुम्हारा दिमाग़ ख़राब हो गया है इतनी छोटी बच्ची को लेकर बहू कहाँ जाएगी।
अभी मेरी बात पूरी नहीं हुई है विपिन के पापा, वो यहीं रहेगी हमारे साथ अपने परिवार के बीच! जाना तो विपिन को पड़ेगा इस घर से क्योंकि मेरी बेटी है सुलक्षणा और मैं अपनी बेटी के साथ कोई अन्याय नहीं करूँगी।
सभी की आँखों में एक सुखद आश्चर्य था। सभी उसके इस फैसले से खुश थे क्योंकि वाक़ई में सुलक्षणा थी ही इतनी अच्छी कि छोटे बड़े सभी उसे बहुत चाहते थे।
बहू की बातों को समझकर ही चेतना अपनी उलझन सुलझा पाई थी उसने जान लिया था की अब बहू बेटे दोनों एक साथ नहीं रह सकते !

अदिति रूसिया
वारासिवनी
२/६/२०२६

*स्वानुभूति*पूनम की रात,चाँदनी चारों ओर बिखरी हुई,चित्त शांत और एकाग्र मन,दुनिया के कोलाहल से दूर,न कोई बाधा,न कोई अड़चन...
01/06/2026

*स्वानुभूति*

पूनम की रात,
चाँदनी चारों ओर बिखरी हुई,
चित्त शांत और एकाग्र मन,
दुनिया के कोलाहल से दूर,
न कोई बाधा,
न कोई अड़चने,
बस मैं और सिर्फ़ मैं,
स्वयं की खोज में,
चल पड़ी,
बैठ अकेली चाँद के नीचे,
अपने मन में उठते,
बहुत से सवालों के जवाब ढूँढने,
आत्मावलोकन किया,
ख़ुद ही ख़ुद से बातें की,
गहन ध्यान में बैठ,
ख़ुद को खोजने का प्रयास,
अपनी गलतियों का एहसास हुआ,
मन से पूछा सच में ग़लत थी क्या मैं,
पर जाना ग़लत न होते हुए भी,
कुछ तो कमिया थी मुझमें,
जिसकी वजह से अक्सर परेशान सी रहती थी,
क्योंकि कभी उन्हें,
स्वीकारने की हिम्मत ही नहीं थी मुझमें,
पर आज मुझे *स्वानुभूति* हुई,
मैंने ख़ुद को जाना पहचाना,
स्वीकार करने की हिम्मत पाई,
अब डर नहीं लगता स्वीकारने से,
अब डर नहीं लगता किसी बात से,
क्योंकि पाया है आज मैंने स्वयं से स्वयं को,
बहुत सी अनुभूतियाँ हुई,
जाने कितने ही सवालों के जवाब मिले,
जिन्हें न जाने मैं कब से तलाश रही थी,
आज बहुत सुखद अनुभूति हुई,
आज अंतर्मन आत्मिक शांति मिली,
डर को पीछे छोड़,
सच का सामना करने की हिम्मत मिली,
ख़ुद पर यकीन गहरा हुआ,
जिसे मैं बाहर तलाश रही थी,
वो तो मेरे अंदर ही था,
मैंने कभी अपने अंदर उसे,
ढूँढने की कोशिश ही नहीं की,
आज मेरी तलाश ख़त्म नहीं हुई यहाँ से,
यहाँ से मेरे जीवन की,
एक नई शुरुआत हुई,
तलाश जारी रहेगी,
अभी तो बहुत कुछ पाना है जीवन में,
ख़ुद को अभी और जानना है,
पहचाना है,
संवारना है अभी और ख़ुद को,
पहले से बेहतर बनना है मुझे,
ख़ुद को खोकर पाना है ख़ुद को मुझे!

अदिति रूसिया
वारासिवनी
१/६/२०२६

*इधर-उधर**इधर-उधर* की बातों से क्यों होना परेशान,काम अपना कीजिए न दीजिए फ़िज़ूल की बातों पर ध्यान!इधर-उधर मन भटकता है क्...
31/05/2026

*इधर-उधर*

*इधर-उधर* की बातों से क्यों होना परेशान,
काम अपना कीजिए न दीजिए फ़िज़ूल की बातों पर ध्यान!

इधर-उधर मन भटकता है क्या करे इंसान,
बाहरी चका चौंध ने कर रखा परेशान!

हैरान सा फिरता है आज का इंसान,
क्या करे क्या न करे सोच सोच परेशान!

मंजिल है सामने राह पर सरल नहीं,
अटकलें राहों में बहुत सी हैं खड़ी!

मन व्यथित हो जाता है सुनकर इधर-उधर की बात,
जाने क्यों सुनता नहीं मनुज अपने मन की बात!

अदिति रूसिया
वारासिवनी
३१/५/२०२६

चित्र पर काव्य लेखन *गौरैया*रोज आती हैं मेरे घर के आँगन में,न जाने कितने ही प्रकार चिड़ियाँ,साथ उनके होती है *गौरैया*,सु...
29/05/2026

चित्र पर काव्य लेखन

*गौरैया*

रोज आती हैं मेरे घर के आँगन में,
न जाने कितने ही प्रकार चिड़ियाँ,
साथ उनके होती है *गौरैया*,
सुंदर सुंदर रंग बिरंगी ची ची करती,
फुदकती हैं यहाँ से वहाँ,
पेड़ों पर बना रखा है घोसला,
सुबह से लाकर शाम तक,
कभी इस डाल तो कभी उस डाल,
मंडराती हैं घर के आँगन में ये,
भीषण गर्मी और ताप इतना है कि,
झुलस जाता होगा बदन इनका,
ये सोच काँप उठता है मन,
अपने बगीचे में मिट्टी के पात्र में रख देती हूँ,
थोड़ा पानी और डाल देती हूँ थोड़े से बारीक सेव,
क्योंकि मैंने देखा है वो चावल नहीं खाती,
दाना नहीं खाती,
उन्हें पसंद हैं वो बारीक सेव,
कभी कभी तो प्यास बुझाने वो,
गमलों में पड़े पानी पीते दिखाई देती हैं,
तो कभी जमीं में थोड़ा पानी दिख जाए,
उसे वो आके अपनी प्यास बुझा लेती हैं,
उन्हें देख कभी कभी मन व्यथित हो जाता है,
गर्मी और ताप कैसे सह पाती होंगी,
ये सवाल मन को विचलित कर जाता है,
आग उगलता सूरज गर्म हवा के थपेड़े,
काट रखे हैं हमने सारे बड़े बड़े वृक्ष,
जहाँ था बसेरा इनका,
वो भी तो सोचती होंगी क्यो किया नष्ट,
क्यों छीन लिए आशियाने हमारे,
जाएँ भी तो जाएँ कहाँ,
कैसे बचाएँ जान नन्हे बच्चों की,
कहाँ सुरक्षित है हम बताओ,
भला हो उनका जो चला रहे अभियान,
गर्मी के आते ही,
देते हैं घर घर मिट्टी का पात्र,
रखने को इनके लिए दाना और पानी,
हो रहा है जागरूक अब समाज,
बचाने इन कम होती गौरैया को बचाने,
आजकल तो शहरों में दिखाई देती नहीं गौरैया,
हम खुशनसीब हैं हमारे आँगन में चहकती है गौरैया!

अदिति रूसिया
वारासिवनी
२९/५/२०२६

*मुश्किलों को मुस्कुरा कर आसान कर दें*राहों में काँटें चाहे लाख बिछे हों,उन्हें मुस्कुरा कर फूल बना लो,अंधियारा चाहे लाख...
27/05/2026

*मुश्किलों को मुस्कुरा कर आसान कर दें*

राहों में काँटें चाहे लाख बिछे हों,
उन्हें मुस्कुरा कर फूल बना लो,
अंधियारा चाहे लाख छाया हो,
हौसलों को बुलंद कर उजियारा कर लो,
मुश्किलें तो आएँगी राहों में,
उन्हें स्वीकार कर ऊँची तुम उड़ान भर लो,
ठोकरें ही सिखाती है चलना संभल संभल कर,
गिर के भी फिर उठ कर चल पड़ो,
सफ़र को आसान कर दो,
*मुश्किलों को मुस्कुरा कर आसान कर दो*
मंजिल को पाना है गर तो,
हौसलों को बुलंद कर लो,
तप्त हो अग्नि से भी राहें तो क्या,
अपनी मुस्कुराहट से उसे शीतल कर दो,
आँधियाँ चाहे लाख आए तूफ़ान राहों में,
घबराओ नहीं हर तूफ़ान में भी इरादों पे अपने अडिग रहो,
जीवन में मुश्किलें तो आएँगी,
हर मुश्किलें हर कर पार कर लो,
दर्द कितने भी जीवन में मिले हमें,
हँसी की चादर ओड़ हर ग़म को हल्का कर लो,
पतझड़ सी हो गई वीरान ज़िन्दगी तो क्या,
दर्द में भी ख़ुशी की बरसात कर हरियाली कर दो,
थक भी जाओ तुम चलते चलते पर हर न मनाना,
हौसलों को अपनी ऊँची उड़ान देने,
अपनी उम्मीद को सदा क़ायम रखना,
मुश्किलें चाहे लाख आएँ मुस्कुरा हर उन्हें स्वीकार करना!

अदिति रूसिया
वारासिवनी
२७/५/२०२६

*आत्मविश्वास*तनुश्री का सपना कलेक्टर बनने का था वो हर UPSC की परीक्षा देती और एक दो नंबर से चूक जाती लगातार चार वर्षों त...
26/05/2026

*आत्मविश्वास*

तनुश्री का सपना कलेक्टर बनने का था वो हर UPSC की परीक्षा देती और एक दो नंबर से चूक जाती लगातार चार वर्षों तक ये सिलसिला चलता रहा उसने हिम्मत नहीं हारी सब उसे कहते क्या फायदा जब तुम निकल ही पाती तो बार क्यों देती हो परीक्षा ये सब छोड़ो कोई उसे शादी की सलाह देता तो कोई कहता कोई छोटी मोटी नौकरी कर लो घर में बैठ कर समय बर्बाद मत करो, सरकारी नौकरी जनरल वालों को इतनी आसानी से नहीं मिलती ! जितना लोग उसे बोलते वो घबराती नहीं बल्कि दुगुने *आत्मविश्वास* के साथ और मेहनत करने में जुड़ जाती।
उसने ठान लिया था की वो सरकारी नौकरी ही करेगी, एक दिन किसी अपने उससे कहा इन परीक्षाओं के साथ साथ तुम बैंक की परीक्षा क्यों नहीं देती उसमें क्लास वन ऑफिसर की पोस्ट होती है, उसे सलाह अच्छी लगी उसने सोचा क्यों न मैं बैंक एक बार बैंक की परीक्षा दूँ उसकी मेहनत रंग लाई और उसका चयन सबसे बड़े बैंक में क्लास वन ऑफिसर के लिए हो गया।शायद किसी ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि उसे इतनी अच्छी पोस्ट मिल जाएगी। ये उसका आत्मविश्वास ही था कि सबकी बातों को सुन भी वो कभी डिप्रेशन में नहीं गई उसके साथ उसका परिवार खड़ा था, को उसके हर फैसले में उसके साथ था। उसने नौकरी की पर साथ ही अपने सपने को पूरा करने का जुनून अभी बाकी था, नौकरी पर जाती जो समय मिलता उसमें वो UPSC की तैयारी करती रात रात भर पढ़ाई करती उसकी कड़ी मेहनत लगन और आत्मविश्वास के बल पर उसने लगातार दो वर्षों के अथक परिश्रम से सफलता हासिल कर ली और एक मिसाल बन गई। अपने माता पिता का मान बढ़ाया ख़ुद को साबित करके दिखाया। अगर आत्मविश्वास अटल हो तो दुनिया चाहे कुछ भी कहे कामयाबी आपके कदम अवश्य चूमती है।
इसीलिए तो कहते हैं न किसी की सुनकर अपने आत्मविश्वास को कमज़ोर मत करो अपने फैसले स्वयं कर अपना रास्ता ख़ुद चुनों हज़ार लोग खड़े हैं तुम्हें गिराने के लिए, मगर एक हाथ ही काफ़ी है उठाने के लिए, तनुश्री ने जिस तरह ख़ुद को हारने नहीं दिया बल्कि हर चुनौती को उसने स्वीकार किया और अपने आत्मविश्वास के बल पर सफलता हासिल की।

अदिति रूसिया
वारासिवनी
२६/५/२०२६

*आत्मविश्वास*तपती दोपहरी गर्म हवा के धपेड़े ऐसे चल रहे थे मानों कोई आग बरसा रहा हो। अपने छोटे छोटे बच्चों को अपने पंखों ...
26/05/2026

*आत्मविश्वास*

तपती दोपहरी गर्म हवा के धपेड़े ऐसे चल रहे थे मानों कोई आग बरसा रहा हो। अपने छोटे छोटे बच्चों को अपने पंखों से सहलाती टुकटुक चिड़िया कभी पानी में डुबकी लगा उन्हें ठंडक देने का प्रयास करती । ये सब दूर अपनी खिड़की पर बैठी दस साल की रेवा देख रही थी, हाँ उसे टुकटुक नाम उसी ने दिया था। उसके घर के बगीचे में ही तो टुकटुक ने अपना घोंसला बनाया था। वो उसे रोज पानी रखती दाना रखती।
रेवा छुट्टियों में अपने मामा के घर गई थी कुछ दिन बाद लौट कर आई तो उसने देखा टूक टूक कहीं दिखाओ नहीं दे रही और उसके बच्चे भी चीं चीं कर करके चिल्ला रहे हैं, हुआ ये कि रेवा के जाते ही उनका ख़याल रखने वाला कोई नहीं था इसलिए टूक टूक अपने साथियों के साथ खाने और पानी की तलाश में दूर निकल गई। पास वाला पोखर भी भीषण गर्मी के कारण सूख गया था इसलिए पानी की तलाश करने उसे दूर तक जाना पड़ा जिसके कारण लौटने में उसे देर हो गई।
पर कालू कौवे की नजर टुकटुक के बच्चों पर बहुत दिनों से थी, उसे आज ये मौका मिल गया क्योंकि आज टुकटुक अपने घोंसले में नहीं थी। उसने एक ज़ोर का छपट्टा मारा और घोंसले से बच्चे नीचे गिर गए। रेवा को ये देख कर बहुत गुस्सा आया वो जब तक बगीचे में पहुँचती उससे पहले ही काली ने उन्हें पकड़ रखा था, रेवा ने कहा कहा डरो नहीं हिम्मत से काम लो रेवा ने कौवे के चंगुल से उन्हें छुड़ाया। आज तो रेवा ने उन्हें बचा लिया जब टुकटुक वापिस आई तो बच्चों ने सारी बातें उसे बताई, तक उसने बच्चों से कहा आज से मैं तुम्हें उड़ना सिखाऊँगी, ताकि जब मैं न रहूँ या तुम जब बाहर जाओ तो तुम्हें कठिनाइयाँ कोई भी आएँ उनसे तुम बच सको।
टुकटुक ने बच्चों को सिखाना शुरू किया, उसका एक बच्चा थोड़ा कमज़ोर था उसे कौवे ने जब पकड़ा था तो उसे चोट लगी थी, जिसके कारण उसे उड़ाने में कठिनाई हो रही थी, वो पंख फैलाता और फिर गिर जाता , पर टुकटुक ने कहा छोटू तुम्हें हार नहीं मानना है , उसने उन्हें बचाव के हर दांव पेंच सिखाए, अब वो बच्चों को भी अपने साथ ले जाती, दूर आसमान की ऊंचाइयों में उड़ना सिखाती, एक दिन छोटू अपनी मन और अन्य बच्चों से बिछड़ गया अचानक ही कालू ने उस पर फिर वार कर दिया उसका एक पैर घायल हुआ और वो जमीन पर गिर गया उसे तलाशते हुए टुकटुक वहाँ पहुंच गई पर उसने उसे बचाया नहीं बल्कि उसने उससे लड़ने के लिए प्रेरित किया कहा तुम अपनी लड़ाई ख़ुद लड़ो उठो तुम कर सकते हो, कमज़ोर नहीं तुम्हें हिम्मती बनना है, उसे वो दूर से ही हिम्मत दे रही थी, छोटू ने भी हार नहीं मानी पूरे आत्मविश्वास के साथ उठा गिरता फिर उठता पर रुकता नहीं और उसके अटल आत्मविश्वास ने उसे कालू से जीत दिलाई और वो आसमान की ऊँचाइयाँ छूता अपने दर्द को भूल जीत की ख़ुशी मनाते उड़ चला आत्मविश्वास लिए।

अदिति रूसिया
वारासिवनी
२६/५/२०२६

बेवजह गुस्सा न करना,बेकार की बातों में अपना वक़्त न जाया करना,मिली है जिंदगी मुश्किल से बड़ी,बची हैं कुछ ही साँसे अभी,जी...
26/05/2026

बेवजह गुस्सा न करना,
बेकार की बातों में अपना वक़्त न जाया करना,
मिली है जिंदगी मुश्किल से बड़ी,
बची हैं कुछ ही साँसे अभी,
जी लो जिंदगी अपनी,
भर लो दामन खुशियों से,
क्यों बेवजह,
हर वक़्त हर जगह,
नाराजगी अपनी दिखाना!

अदिति रूसिया
वारासिवनी
२६/५/२०२६

Aditi Rusia says, ' बेवजह गुस्सा न करना, बेकार की बातों में अपना वक़्त न जाया करना, मिली है जिंदगी म... '. Read the best original quotes, shayari, poetry & thoughts by Aditi Ru...

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