20/10/2025
🌟 दीपावली पूजन का कारण (महत्व)
दीपावली को “प्रकाश का पर्व” कहा जाता है। यह दिन भगवान श्रीराम के 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटने की खुशी में मनाया जाता है।
इसके अलावा यह दिन माँ लक्ष्मी, भगवान गणेश, माँ सरस्वती, कुबेर जी और काली माँ की पूजा का भी अत्यंत शुभ अवसर होता है।
इस दिन लक्ष्मी जी पृथ्वी पर आती हैं और जो घर स्वच्छ, प्रकाशित और भक्तिभाव से भरा होता है, उसमें स्थायी रूप से निवास करती हैं।
🪔 दीपावली पूजन विधि (विधि-विधान)
घर की सफाई और सजावट:
दीपावली से पहले घर को साफ़ और सुसज्जित किया जाता है। यह माँ लक्ष्मी का स्वागत करने का प्रतीक है।
मंदिर की तैयारी:
पूजन स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें, स्वच्छ लाल या पीले कपड़े पर माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
घी या तेल के दीपक जलाएँ:
चारों दिशाओं में दीपक जलाकर घर को प्रकाशित करें। माना जाता है कि इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
पूजन सामग्री रखें:
कलश, चावल, रोली, हल्दी, फूल, मिठाई, सिक्के, नारियल, सुपारी, पान के पत्ते, धूप-दीप, इत्र आदि।
पूजन क्रम:
सबसे पहले गणेश जी की पूजा करें।
फिर माँ लक्ष्मी की पूजा करें — विशेषकर श्रीसूक्त या लक्ष्मी चालीसा का पाठ करें।
कुबेर जी को धन के रक्षक मानकर उनकी भी आराधना करें।
दीपक, धूप, नैवेद्य, पुष्प आदि अर्पित करें।
आरती और प्रसाद:
पूजा के बाद लक्ष्मी-गणेश की आरती करें और प्रसाद बांटें।
दीपदान:
घर, द्वार, मंदिर, कुएँ या चौपाल पर दीप जलाना शुभ माना जाता है।
💫 आध्यात्मिक कारण:
दीपावली का अर्थ है – अंधकार से प्रकाश की ओर, अर्थात अज्ञान से ज्ञान की ओर बढ़ना।
यह पर्व हमें सिखाता है कि अपने भीतर के नकारात्मक विचारों को मिटाकर सकारात्मकता और समृद्धि का प्रकाश फैलाएँ।