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राम नवमी का त्योहार भगवान श्री राम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। राम, जो भगवान विष्णु के अवतार हैं और हिन्दू धर्म के तीन प्रमुख देवताओं में से एक हैं, धरती पर रावण का वध करने और धर्म की पुनः स्थापना करने के लिए आए थे।

15/12/2025

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"चित्रकूट छाए रघुनंदनु, समाचार सुनि सुनि मुनि आए।आवत देखि मुदित मुनिबृंदा, कीन्ह दंडवत रघुकुल चंदा॥"
27/10/2025

"चित्रकूट छाए रघुनंदनु, समाचार सुनि सुनि मुनि आए।
आवत देखि मुदित मुनिबृंदा, कीन्ह दंडवत रघुकुल चंदा॥"

 # # Chhath Puja और Sita Maa-Ram Ji का संबंधयहाँ इस पवित्र त्योहार और राम–सीता जी के बीच जो जुड़ाव माना जाता है, उसे सरल ...
25/10/2025

# # Chhath Puja और Sita Maa-Ram Ji का संबंध

यहाँ इस पवित्र त्योहार और राम–सीता जी के बीच जो जुड़ाव माना जाता है, उसे सरल भाषा में समझा रहा हूँ — ताकि आप इसे अपने कथन या पूजा-वृत्ति में सहजता से उपयोग कर सकें।

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# # # 📜 पौराणिक संदर्भ

* ऐसा कहा जाता है कि जब राम एवं सीता जी ने Ayodhya लौटकर रावण वध तथा 14 वर्ष के वनवास के बाद राजारोहण किया, तो उन्होंने सूर्यदेव को व्रत और पूजा अर्पित की।
* एक स्रोत के अनुसार, श्री राम और सीता जी ने सूर्य और छठी Maiya को अर्घ्य दिया था, इस पूजा-व्रत के माध्यम से उन्होंने अपने राज्य तथा परिवार की समृद्धि और शुद्धि की कामना की थी।
* विशेष रूप से, बिहार के मुंगेर जिले में श्रद्धा है कि वहाँ Sita Charan Temple में पूजा-स्थल बना है जहाँ सीता-मां ने इस व्रत को किया था।

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# # # 🙏 क्या यह साबित तथ्य है?

नहीं — इसे हम कह सकते हैं कि ये **श्रद्धा-कथाएँ** हैं, जिन्हें श्रुति-पुराण या महाकाव्यों में सीधे-सीधे विस्तार से नहीं मिलता। यानी:

* यह प्रमाणित नहीं है कि “छठ व्रत अंततः राम-सीता द्वारा आरंभ हुआ” यह पूरी तरह विज्ञान-सिद्ध हो।
* लेकिन लोक-कथाओं, क्षेत्रीय परंपराओं और रीति-रिवाजों में ये कथन बहुत प्रचलित हैं। उदाहरण के लिए: “राम और सीता ने छठ व्रत किया” यह एक सामान्य कथन बन गया है।

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# # # 💡 इस संबंध का महत्व और संदेश

* इस जुड़ाव के माध्यम से छठ पूजा को सिर्फ मंदिर-उपासनाओं से ऊपर उठकर **परिवार-संपर्क**, **सफाई**, **प्रकृति-पूजा**, **धर्म-कर्तव्य** आदि से जोड़ा जाता है।
* राम-सीता का आदर्श-युग यानी “रामराज्य” की प्राप्ति के बाद हुई यह पूजा-क्रिया, यह संकेत देती है कि विजय-परिहार के बाद भी श्रेष्ठ जीवन के लिए निरंतर पूजा-व्रत, संयम और प्रकृति-आदर आवश्यक है।
* साथ ही यह बताता है कि देवी-देवताओं, सूर्य-किरणों, नदियों-घाटों के बीच मानव-भक्ति-कार्य का किस तरह से जीवन-चर्या में समावेश हो सकता है।

Chhath Puja is all about worshipping sun and Chhathi maiya, but did you know Chhath also has a Goddess Sita connection? As per the history, Lord Rama and Sita performed the Chhath rituals after their victorious return to Ayodhya.

25/10/2025
🌟 दीपावली पूजन का कारण (महत्व)दीपावली को “प्रकाश का पर्व” कहा जाता है। यह दिन भगवान श्रीराम के 14 वर्ष के वनवास के बाद अ...
20/10/2025

🌟 दीपावली पूजन का कारण (महत्व)
दीपावली को “प्रकाश का पर्व” कहा जाता है। यह दिन भगवान श्रीराम के 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटने की खुशी में मनाया जाता है।
इसके अलावा यह दिन माँ लक्ष्मी, भगवान गणेश, माँ सरस्वती, कुबेर जी और काली माँ की पूजा का भी अत्यंत शुभ अवसर होता है।
इस दिन लक्ष्मी जी पृथ्वी पर आती हैं और जो घर स्वच्छ, प्रकाशित और भक्तिभाव से भरा होता है, उसमें स्थायी रूप से निवास करती हैं।
🪔 दीपावली पूजन विधि (विधि-विधान)
घर की सफाई और सजावट:
दीपावली से पहले घर को साफ़ और सुसज्जित किया जाता है। यह माँ लक्ष्मी का स्वागत करने का प्रतीक है।
मंदिर की तैयारी:
पूजन स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें, स्वच्छ लाल या पीले कपड़े पर माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
घी या तेल के दीपक जलाएँ:
चारों दिशाओं में दीपक जलाकर घर को प्रकाशित करें। माना जाता है कि इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
पूजन सामग्री रखें:
कलश, चावल, रोली, हल्दी, फूल, मिठाई, सिक्के, नारियल, सुपारी, पान के पत्ते, धूप-दीप, इत्र आदि।
पूजन क्रम:
सबसे पहले गणेश जी की पूजा करें।
फिर माँ लक्ष्मी की पूजा करें — विशेषकर श्रीसूक्त या लक्ष्मी चालीसा का पाठ करें।
कुबेर जी को धन के रक्षक मानकर उनकी भी आराधना करें।
दीपक, धूप, नैवेद्य, पुष्प आदि अर्पित करें।
आरती और प्रसाद:
पूजा के बाद लक्ष्मी-गणेश की आरती करें और प्रसाद बांटें।
दीपदान:
घर, द्वार, मंदिर, कुएँ या चौपाल पर दीप जलाना शुभ माना जाता है।
💫 आध्यात्मिक कारण:
दीपावली का अर्थ है – अंधकार से प्रकाश की ओर, अर्थात अज्ञान से ज्ञान की ओर बढ़ना।
यह पर्व हमें सिखाता है कि अपने भीतर के नकारात्मक विचारों को मिटाकर सकारात्मकता और समृद्धि का प्रकाश फैलाएँ।

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