24/05/2025
मेव की तोमरवंशी #लडावत/बाघोड़िया पाल
लडावत/बाघोडिया पाल मेव समाज की एक बड़ी पाल है। मेव सरदार महाराना काकू बालोत जिसने 13वीं सदी में मेवों को गोत्र पालों में तक्सीम किया था कि तक्सीम के मुताबिक लडावत/बाघोड़िया पाल के 210 गांव/खेड़े थे । बाघोडिया पाल अरावली पहाड़ियों के दोनों तरफ आबाद हैं। मेवों के दो थाम्बे बिलावत और मझलावत बाघोडिया पाल से निकले हैं।
बाघोडिया पाल के मेवों के पूर्वज का नाम नैन सिंह न्याना उर्फ लाडा था उन्हीं के नाम पर लडावत कहलाए। लडावत पाल की वंशावली तोमर वंश अनंगपाल से मिलती हैं।
न्याना नैन सिंह उर्फ लाडा एक भूमिया राजा था उसकी आठ रानियां थीं लेकिन बदकिस्मती से उनमें से किसी ने भी बच्चे को जन्म नहीं दिया था । राजा लाडा ने अपने ब्राह्मण को बुलाया और उसको रानी तलाश करने को कहा ताकि उससे कोई औलाद पैदा हो सकें । ब्रह्ममण मलोंटा गांव पहूचा जो खानपूर घासोली के पास था यहां एक भाजड़ नाम का भूमिया राजा था जो बेसर गोत्र से ताल्लुक रखता था उसके एक नौजवान लड़की थी जिसका नाम बोली था ब्राम्हण ने राजा भाजड़ को राजा लाडा के रिश्ता के बारे में पैगाम दिया तो राजा भाजड़ ने इंकार कर दिया और ब्राह्मण को अपने राजदरबार से बाहर निकलवा दिया । ब्राह्मण ने सारी बात राजा लाडा को जा कर बताई ये सब सुन कर राजा लाडा बहुत गुस्सा हुआ , लाडा ने भाजड़ की लड़की को हासिल करने की कोशिश शुरू कर दी , लाडा एक लश्कर ले कर मलोन्टा पहूचां और भाजड़ की लड़की को ले आया और उससे शादी कर ली। भाजड़ को जब ये खबर मिली तो वह आग बबूला हो गया और अपनी फौज साथ ले कर लाडा के गढ़ पर हमला कर दिया इस लड़ाई में राजा लाडा और उसके सरदार मारे गए और भाजड़ अपनी बेटी बोली को वापस ले आया . इसी दौरान राजा भाजड़ की बेटी बोली गर्भवती हो गई थी । राजा भाजड़ की बेटी बोली अपने बाप की इस हरकत से बहुत नाराज़ थी जो उसने लाडा के साथ किया था। बोली को इसका बड़ा सदमा हुआ था । बोली ने राजा लाडा के मीरासी जिसका नाम तिलक राय था चलते वक्त उसको बता दिया था कि तिलकराय तुम्हारे राजा लाडा का मुझे गर्भ है मुमकिन है इससे राजा लाडा के खानदान का वंश आगे चल जाए , तिलकराय यह सुन कर खुश हुआ और उसने बोली से गुजारिश की के जब ये बच्चा पैदा हो तो मुझे खबर कर दी जाए । राजा भाजड़ ने मलोन्टा पहूच कर यह ऐलान किया कि वह लाडा के खानदान को खत्म कर चुका है अगर बोली के लड़का होता है तो इसे भी मार दिया जाएगा मगर कुदरत को कुछ और ही मंजूर था , तिलकराय मीरासी ने दाई से साजिश रची के अगर बोली के लड़का पैदा होता है तो उसे वो उसके हवाले कर देगी । जब इस बच्चे की पैदाइश हुई तो दाई इस बच्चे को जंगल में ले जा कर साल भरट के झूंडो में रख आई तिलकराय मीरासी इस बच्चे को उठाने पहूचा तो उसने देखा की एक अजदा सांप उस बच्चे के चारो तरफ घूम रहा है । तिलकराय ने हाथ जोड़ कर सांप से कहा ए नागदेवता ये बच्चा मेरे मालिक राजा लाडा का है मैं इसे ले जा कर इसकी परवरिश करूंगा ये सुन कर अजदाह सांप वहां से चला गया और तिलकराय मीरासी उस बच्चे को ला कर परवरिश करने लगे । कुछ अरसा बाद राजा भाजड़ की बीवी यानि राजा लाडा की घरवाली बोली की मां को इसके बारे में पता चला तो उसने उस बच्चे को अपने महल में मंगवा लिया वो एक रहमदिल औरत थी और खुफिया तौर पर इस बच्चे की परवरिश चालू की। इस बच्चे का नाम साल भरट रखा गया, यही साल भरट बाघोडिया पाल का पूर्वज है । साल भरट के 12 बेटे हुए जिनके नाम पर बाघोडिया पाल में 12 थाम्बे बने।
लडावत/बाघोड़िया पाल के थाम्बे :-
1.शेरा, 2.जालन, 3. जाकट, 4.पहाडा, 5.धौलिया, 6.कोलानिया, 7.भाम्बड़िया, 8.मेंगलू/मेंगला, 9.पूनिया, 10.कोकलिया
मझलावत और बिलावत थाम्बे/गोत्र भी लडावत/बाघोडिया पाल से निकले हैं।
पाभा- बाघोड़ा
चौधर का गांव - मुसखेड़ा
राजस्थान मेवात के अलवर जिला में बाघोडिया के गांव -
1.बाघोडा, 2.मिर्जापुर, 3.चोंडावता, 4.पाटन भान, 5.बरामदा, 6.गेलपुर, 7.धमूकड, 8.डालावास, 9.टेऊवास, 10.चावंडी खुर्द, 11.बिलाहेडी, 12.बसई कलां, 13.गूजरपुर कलां, 14.पोदीपुर, 15.बथवा का नंगला, 16.जोडिया, 17.दोहरा, 18.ठोंकदार बास, 19.धनमत बास, 20.मलियर जट्ट, 21.जैरोली, 22.बिलासपुर तिजारा, 23.बरहेड़ा, 24.मंदवापुर, 25.घासोंली, 26.खानपुर मेवान, 27.न्याना, 28.बेरला, 29.बाघोर, 30.लपाला, 31.डभेड़ा, 32.रभाना, 33.बंदापुर, 34.गोल, 35.शेखपुर जट्ट, 36.रायपुर, 37.चाचाका, 38.दौताना, 39.भूर पहाड़ी, 40.मोठूका, 41.कुटियापुर, 42.कोलगाव किशनगढ़, 43.जैस्तिका, 44.फुल्लाबास, 45.मुसेपुर, 46.अहमलाका, 47.दोंगडा, 48.मातावास, 49.कोलानी, 50.डांवरी, 51.काला घाटा, 52.थोंस, 53.बोलनी, 54.भटकोल किशनगढ़, 55.रामबास, 56.अलापुर जट्ट, 57.बाई, 58.बैंगनहेड़ी, 59.राऊका, 60.हुसैपुर, 61.मुसखेड़ा, 62.आंधाका, 63.चावंडी कलां, 64.विरशंगपुर, 65.चीतघाना, 66.गोगरोद, 67.मुरादबास, 68.नानगहेडी, 69.अलावलपुर, 70.हसनपुर 71.चोर बसई, 72.नांगल मोहम्मदपुर, 73.बिदरका, 74.अभ्यानपुर, 75.इलाका, 76.सरपुर, 77..थानाघोडा, 78..खोहरा पिपली, 79.पडासला, 80.नंगला चिरावंडा, 81.बिचपुरी, 82. धौली दांत/रहमतनगर, 83.मेंदाबास, 84.बेड़ा बास, 85.मानोथडी, 86.नोगावां (बाघोडा वाला), 87.मेहराना तिजारा, 88.सोरवा
हरियाणा मेवात के नूंह जिला में बाघोडिया के गांव
1.सिदरावट, 2.भोंड, 3.ढोंड खुर्द, 4.ढोंड कलां, 5.हसनपुर, 6.गंडूरी, 7.नावली, 8.रंगाला राजपुर, 9. चक रंगाला, 10.धमाला, 11.पोल, 12.खेडली नूंह/कंकरखेड़ी, 13.अकलीमपुर नूंह, 14.रोजका मेव, 15.पाट खोरी, 16.ठेकड़ी, 17.ग्यासियान बास, 18.उलेटा
पलवल जिला में बाघोडिया के गांव
1.चवन नंगला
राजस्थान मेवात के डीग जिला में बाघोडिया के गांव
1. बिंलोद, 2.गांवड़ी, 3.मुसेपुर, 4.शादीबास
अलीगढ़ जिला में बाघोडिया के गांव
1.नरवारी, 2.नूरपुर, 3.रिगसपुरी
इलाका मेवात के के अलावा लडावत/बाघोडिया पाल के मेव मध्य प्रदेश के सिहौर, उज्जैन, रतलाम, नीमच, राजगढ, ग्वालियर , शाजापुर, आगार मालवा, देवास, मंदसौर, इंदौर, गुना जिलों उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर, पीलीभीत, रामपुर, बदांयू, गौतमबुद्ध नगर, आगरा, अलीगढ़, कानपुर, बरेली जिलों राजस्थान के कोटा, चित्तौड़गढ़, बिकानेर जिलों और महाराष्ट्र के औरंगाबाद, परभनी जिलों में अच्छी खासी तादाद में आबाद हैं जो सदियों पहले इलाका मेवात से जा कर आबाद हुए।
बाघोडिया पाल को मुल्क तक्सीम 1947 के दंगों में काफी नुकसान हुआ इस पाल के हजारों लोग शहीद हुए। बाघोडिया मेव तकरीबन आधे यानि 50% 1947 में पाकिस्तान चले गए थे!
मेव की लडावत/बाघोडिया पाल अपने बहादुर कारनामों की वजह से शोहरत रखती है। बाघोडिया पाल में बहुत से लड़ाकू शूरमा पैदा हुए। घुड़चली व मेव खान मिर्जापुर चोंडावता, धन सिंह लपाला, राय खान कोलानी, दलमीर कोलानी, शहीद करीम खां रंगाला जैसे शूरमाओ ने इसी पाल में जन्म लिया।
इस पाल में एक गांव कोलानी भी है । कोलानी की लड़ाई मेवात में बहुत मशहूर है। कोलानी की दो बड़ी लड़ाई मशहूर है। पहली बड़ी लड़ाई सन 1805 में उस वक्त हुई जब महाराजा बख्तावर सिंह ने अपने फौजी अफसर भगवान दास, हाथी सिंह, रिसालदार मीनाबेग , भोपाल सिंह और दूसरे फौजियों के जरिए घाटा, फिरोजपुर झिर और कोलानी पर चढाई की । मेवों ने महाराजा की फौज का मुकाबला किया , बक्सा का बेटा राय खान और धन सिंह बाघोडिया इस जंग में बाघोडिया पाल के फौजी सरदार थे। इस लड़ाई में डेमरोत, दूलोत, पाल ने बाघोडिया पाल के साथ बराबर हिस्सा लिया। कोलानी की लड़ाई में महाराजा के फौजी मारे गए।कोलानी की लड़ाई का "तारीख राजगान हिंद" किताब मे भी जिक्र मिलता है।
कोलानी की दूसरी बड़ी लड़ाई महाराजा मंगल सिंह महाराज के दौर में हुई। बाघोडिया पाल ने अलवर रियासत (मेवात) के राजा मंगल सिंह महाराज (1874 से 1892 तक राजा रहे) की फ़ौज से 12 साल तक जंग लड़ी।
दोनों हांथन बांकड़ा दोनों हांथन बंदूक
कोलानी कू मत चढा तेरो गला घूटे राजपूत
हांथ जोड़ अर्जी करा रोवा सब रानी
बाघोड़ो बस की नहीं जाके आड़े कोलानी
धन सिंह लपाला गांव का बाघोडिया मेव था जो एक बहादुर शूरमा था यह कोलानी की लड़ाई में जा कर लड़ा था। अलवर राजा का एक सेनापति हाथी सिंह बाघोडिया मेवों के हाथों फिरोजपुर झिर में मारा गया। रंगाला राजपुर गांव से ताल्लुक रखने वाला मशहूर निशानेबाज शहीद करीम खां भी बाघोडिया मेव था जिसने सन 1835 में दिल्ली के अंग्रेज कमिश्नर विलियम फ्रेजर को गोली से मारा था। करीम खां को भरमारू के नाम से जाना जाता था।
हाथी रहो हून, बहे जहा झिर को पानी
गई जमा लू नाट, ऐसी अनड़ कोलानी
अलवर महाराजा बने सिंह के दौर में बाघोडिया और नियाही पाल के लोगों ने मिलकर नीकच और कोलानी में राजा की चौकी जो अंग्रेजों की हिमायत में बनाई गई थी उसे नाकाम कर दिया और बहादुरी से लड़े .
महाराजा मंगल सिंह अलवर के दौर में मिर्जापुर के बाघोडिया मेव घुड़चली और मेव जौहरी के पोते और खुदाबख्श के बेटे थे अपने पीछे एक पूरा इतिहास छोड़ गए। आज भी मेव कौम में घुडचली और मेव खान के किस्से सुनाए जाते हैं। ये बड़े बहादुर शूरमा थें
बाघोडा की पाल में नाहर दो भाई
तार काटो अंग्रेज को पूरी रियासत अलवर थर्राई
सन 1921 में फिरोजपुर झिरका थाना पर बाघोडिया पाल ने हमला कर कांग्रेस वर्करों को अंग्रेजी पुलिस से आजाद करा लिया था।
सन 1932 की अलवर तहरीक/मेव किसान आंदोलन में भी इस पाल ने बढ़ चढ़ कर भाग लिया।
इस पाल में बहुत सी मशहूर शख्सियत और बड़े जमींदार हुए हैं
लडावत/बाघोडिया पाल की मशहूर शख्सियतें -
1."दादा ए मेवात" मरहूम चौधरी दिलावर खान सिदरावट
2.मरहूम चौधरी अजमेरी खान बिलासपुर
3. मरहूम चौधरी चाहत खान जैरोली
4. मरहूम चौधरी शेर मौहम्मद भोंड
5. मरहूम चौधरी लल्लू खान दोंगड़ा
6.मरहूम चौधरी छोटे खान बुलाहेड़ी
7. मरहूम चौधरी चाहत खान कंकरखेड़ी
8.मरहूम मेजर रहमत खान सिदरावट
9.मरहूम चौधरी हुसैना फुल्लाबास
10.मरहूम चौधरी समद खान चाचाका
11.मरहूम सुबेदार बस्ती खान चोर चावंडी
12.मरहूम मैजर अब्दुल्ला खान एडिकांग ऑफिसर महाराजा अलवर
13.मरहूम चौधरी नजीर खान लांधड़ी हिसार
14.मरहूम मेजर जैन खान बाघोर
15.मरहूम चौधरी राज खान रंगाला राजपुर
16. मरहूम चौधरी मजलस खान उर्फ मजला बिरसिंगपुर
✍️ Mewati Duniya