19/05/2024
यें कैसी शराफत भर दी कुदरत नें हम में,
के देखों हम ही से, हम है शरमानें लगे!
यें कैसी इजाजत दे दीं मेहबूब नें हमकों,
मोहब्बत में खुद ही को हम बिसरनें लगें!
यें कैसी इशारत कर दी किस्मत नें हमकों,
के बरबादी के मंजर हमें है लुभानें लगें!
देखों यहां पर, कितनें जज्बातों के है मेलें,
के खुशियों के झोलें तक है बिकनें लगे!
लूट जातें है दिल मोहब्बतों के बाजार में,
सँभालकर दिल को हम है रखनें लगें!
वो पूछतें है हमसें, क्यों खामोश दिखतें बडे,
अब क्या बताए, दर्द भीतर छुपाए, हम सँभलनें लगें!
हम अनाडी थें कितने,अभीतक, क्या बताएँ,
दुनियादारी से अभी तो, हम सिखनें लगें!
💔ऱामजीलाल सक्सेना💔
#गजल 💔💔💔
#दर्दे_ए_दिल 💔💔
#मै_और_मेरी_तन्हाई 💔
#ᴩᴏᴩᴜʟᴀʀ
#रामजी