Purvi Saxena Entertainment

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19/05/2024

यें कैसी शराफत भर दी कुदरत नें हम में,
के देखों हम ही से, हम है शरमानें लगे!

यें कैसी इजाजत दे दीं मेहबूब नें हमकों,
मोहब्बत में खुद ही को हम बिसरनें लगें!

यें कैसी इशारत कर दी किस्मत नें हमकों,
के बरबादी के मंजर हमें है लुभानें लगें!

देखों यहां पर, कितनें जज्बातों के है मेलें,
के खुशियों के झोलें तक है बिकनें लगे!

लूट जातें है दिल मोहब्बतों के बाजार में,
सँभालकर दिल को हम है रखनें लगें!

वो पूछतें है हमसें, क्यों खामोश दिखतें बडे,
अब क्या बताए, दर्द भीतर छुपाए, हम सँभलनें लगें!

हम अनाडी थें कितने,अभीतक, क्या बताएँ,
दुनियादारी से अभी तो, हम सिखनें लगें!

💔ऱामजीलाल सक्सेना💔

#गजल 💔💔💔
#दर्दे_ए_दिल 💔💔
#मै_और_मेरी_तन्हाई 💔
#ᴩᴏᴩᴜʟᴀʀ


#रामजी

19/05/2024

तुझे मेरे नजदीक आना पड़ेगा
यकीं इश्क का भी दिलाना पड़ेगा

अगर रूठ जाऊँ कभी मैं कहीं तो
तुझे आ के मुझको मनाना पड़ेगा

है मालूम मुझको मुहब्बत की खातिर
तेरा हर सितम भूल जाना पड़ेगा

कभी गाया था मेरी खातिर जो तुमने
वही गीत फिर गुनगुनाना पड़ेगा

सितमगर की जिद भी अजब है बहुत
कि हर चोट पर मुस्कराना पड़ेगा

नहीं जानता था कि इस इश्क़ में
दिनो रात आँसू बहाना पड़ेगा

है अब #रामजी लगता मुहब्बत के सदके
हमे यह जहां छोड़ जाना पड़ेगा

💔ऱामजीलाल सक्सेना💔

#गजल 💔💔💔
#दर्दे_ए_दिल 💔💔
#मै_और_मेरी_तन्हाई 💔
#ᴩᴏᴩᴜʟᴀʀ


#रामजी

19/05/2024

दिल लगा कर ना बगावत करना
करना तो दिल से मुहब्बत करना

महबूब को समझ कर खुदा अपना
दिल से मुहब्बत की इज़्ज़त करना

मुहब्बत देन उस परवरदिगार की
कभी किसी से ना नफ़रत करना

बसा कर किसी को दिल के अंदर
उसको कभी ना रुखसत करना

इश्क़ होता खुदा का रूप दूसरा
हसरतों से इसकी इबादत करना

दर्द ऐ दिल ना मिले महबूब को
दिलों जान से हिफ़ाज़त करना

उम्र भर साथ निभाऊँगा ज़रूर
या खुदा तू अब इनायत करना

तुम्हारे दिल पर करूँगा राज मैं
तुम मेरे दिल पर हुकूमत करना

💔ऱामजीलाल सक्सेना💔

#गजल 💔💔💔
#दर्दे_ए_दिल 💔💔
#मै_और_मेरी_तन्हाई 💔
#ᴩᴏᴩᴜʟᴀʀ


#रामजी

17/05/2024

🌺मुहब्बत का नशा🌺
(तर्ज - अकेले हैं चले आओ जहां हो)

हमारे बीच लम्बा फासला है
मुहब्बत का नशा फिर भी चढ़ा है

जरा भी सच नहीं है आशिकी ये
कही धोखा कहीं करती वफ़ा है

नहीं मिलते किनारे ये नदी के
तुम्हारा नाम पानी पर लिखा है

सजाया ख्वाब आंखों में जो हमने
दिखायेगा कभी तो जलजला है

नहीं भाते ये बेनामी के रिश्ते
जमाने से मिला करती सजा है

कसम खाएं निभाई जा सके जो
अधूरे इश्क ने तो सबको छला है

कदम #रामजी रखे हैं फूंक कर ये
मिला है स्वाद कड़वा पर दवा है

💔ऱामजीलाल सक्सेना💔

#गजल 💔💔💔
#दर्दे_ए_दिल 💔💔
#मै_और_मेरी_तन्हाई 💔
#ᴩᴏᴩᴜʟᴀʀ


#रामजी

17/05/2024

++ग़ज़ल++

जिस दिन से हमको ज़ौक़-ए-मुहब्बत अता हुआ
उस दिन से अब तलक न वो दिल से जुदा हुआ
**
हासिल हुई है नैमत-ए-उल्फ़त अगर जनाब
हैं ख़ुश-नसीब आप मेहरबाँ ख़ुदा हुआ
**
फिर चल रहा है वो नई चालें सियासती
दैर-ओ-हरम में जो मिला था घूमता हुआ
**
इंकार-ए-वस्ल की पड़ी जब खू है जान-ए-जाँ
पैग़ाम-ए-वस्ल आपका इक मोजिज़ा हुआ
**
हमराज़ बनना चाहते हैं तो यही है शर्त
दोनों रखेंगे राज़ न अपना छुपा हुआ
**
ज़ीने से गर गिरा है तो शायद उठेगा वो
उठता नहीं है कोई नज़र से गिरा हुआ
**
अनजान शख़्सियत से न अपनी कोई रहे
रक्खा हैं बाब-ए-ज़िंदगी हमने खुला हुआ
**
घर से निकाल बाप को फ़रज़न्द ने कहा
बाक़ी जो परवरिश का था वो हक़ अदा हुआ
**
कुछ यूँ बयान उसने की थी दास्तान-ए-इश्क़
जैसे #रामजी इश्क़ भी इक हादसा हुआ
**

शब्दार्थ--ज़ौक़-ए-मुहब्बत=प्यार की ख़ुशी
दैर-ओ-हरम=मंदिर और मस्जिद ,
इंकार-ए-वस्ल =मिलन से इंकार ,
पैग़ाम-ए-वस्ल=मिलन का सन्देश ,
मोजिज़ा=चमत्कार ,ज़ीने=सीढ़ियाँ ,
बाब-ए-ज़िंदगी = जीवन का परिच्छेद ,
फ़रज़न्द=पुत्र |

💔ऱामजीलाल सक्सेना💔

#गजल 💔💔💔
#दर्दे_ए_दिल 💔💔
#मै_और_मेरी_तन्हाई 💔
#ᴩᴏᴩᴜʟᴀʀ


#रामजी

17/05/2024

🌹🌹🌹 ग़ज़ल 🌹🌹🌹

जब भी रातों को चाँदनी निकली।
मेरे होंठो से आह सी निकली।

इन अँधेरों से तू निकल तो सही।
तेरे दर से है रोशनी निकली।

हमको देती रही फ़क़त धोखे।
कितनी ज़ालिम ये जिंदगी निकली।

दिल में उतरी है खंज़रों की तरह।
किसके होठों से ये हँसी निकली।

जितने भी लोग इधर से गुज़रे।
सबसे जन्मों की दुश्मनी निकली।

तेरे पहलू में जो छुपी है #रामजी।
मेरे अश्कों से वह ख़ुशी निकली।

💔ऱामजीलाल सक्सेना💔

#गजल 💔💔💔
#दर्दे_ए_दिल 💔💔
#मै_और_मेरी_तन्हाई 💔
#ᴩᴏᴩᴜʟᴀʀ


#रामजी

16/05/2024

(*मैने बे बात तेरा नाज उठाया है बहुत*)

प्यार में यार मेरे तूने सताया है बहुत
मुझको पल पल पे सनम याद तू आया है बहुत

तू कभी इससे कभी उससे इश्क़ करता रहा
जान मेरी को मेरी जान जलाया है बहुत

तू हमेशा से ज़फ़ागर ही रहा जाने जिगर
दे के दिल पर भी जख़्म हमको रुलाया है बहुत

मैं तुझे समझा किया जाने जिगर तूने मगर
पीठ पीछे मेरे तीरों को चलाया है बहुत

तू दग़ाबाज़ सनम ऐसे ही हर वक्त रहा
चोट दे दे के जिगर तूने जलाया है बहुत

जाने किस बात पे तू यार मेरे रूठ गया
मैने बे बात तेरा नाज उठाया है बहुत

#रामजी गर इश्क़ किया है तो निभाया भी सदा
तेरे कदमों में देखो सर भी झुकाया है बहुत

💔ऱामजीलाल सक्सेना💔

#गजल 💔💔💔
#दर्दे_ए_दिल 💔💔
#मै_और_मेरी_तन्हाई 💔
#ᴩᴏᴩᴜʟᴀʀ


#रामजी

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