09/03/2025
मैं वो निकम्मा हूँ जिसकी झोली में कोई हुस्ने अमल नहीं हैं
मगर "वो" एहसान कर रहे हैं खताए मेरी छुपा छुपा कर
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अल्लाह से दुआ है इस माहे रमज़ान की बरकत से हम सब के गुनाहों की मगफिरत अता फरमाए हमे सब रोज़े रखने वा नेक अमालों की तौफीक अता फरमाए।*
इस कौम की गैरत को जगाए हमारे दिलों में अपने बुज़ुर्ग वा कौम के लिए मोहब्बत अता फरमाए।
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