Deepak Brother's

Deepak Brother's ʲᵃˢᵗ ᶠᵒʳ ᶠᵘⁿⁿʸ
ᵈʰᵃʳᵐᵉˢʰ ᵈᵃʳˢʰᵃⁿ ᵏᵉ ˢᵃᵗʰ

 #बहुत_ही_सटीक_विश्लेषणनदी से  -  पानी नहीं,  रेत चाहिए।पहाड़ से - औषधि नहीं, पत्थर चाहिए।पेड़ से  - छाया नहीं, लकड़ी चाहिए...
03/06/2024

#बहुत_ही_सटीक_विश्लेषण
नदी से - पानी नहीं, रेत चाहिए।
पहाड़ से - औषधि नहीं, पत्थर चाहिए।
पेड़ से - छाया नहीं, लकड़ी चाहिए।
खेत से - अन्न नहीं, नकद फसल चाहिए।

उलीच ली रेत, खोद लिए पत्थर,
काट लिए पेड़, तोड़ दी मेड़़।

रेत से पक्की सड़क , पत्थर से मकान बनाकर लकड़ी के नक्काशीदार दरवाजे सजाकर

अब भटक रहे हैं।

सूखे कुओं में झाँकते,
रीती नदियाँ ताकते,
झाड़ियां खोजते लू के थपेड़ों में,
बिना छाया के ही हो जाती सुबह से शाम।
और गली-गली ढूंढ़ रहे हैं आक्सीजन।

फिर भी सब बर्तन खाली l सोने के अंडे के लालच में, मानव ने मुर्गी मार डाली। deepak deuri

12/04/2024

Mandir masjid ke chakkar me desh kaha ja raha hai

06/04/2024
अमिताभ बच्चन के एक्सीडेंट ने कैसे जैकी श्रॉफ का फिल्मी करियर बनाया      अमिताभ बच्चन की फ़िल्म कुली के दौरान हुए एक्सीडें...
24/10/2023

अमिताभ बच्चन के एक्सीडेंट ने कैसे जैकी श्रॉफ का फिल्मी करियर बनाया
अमिताभ बच्चन की फ़िल्म कुली के दौरान हुए एक्सीडेंट की वजह से.. इस फ़िल्म के प्रति लोगों का क्रेज इतना बढ़ गया था के थेरेटर्स में टिकट दो-दो, तीन-तीन दिन बाद की भी नहीं मिलती थी। इसी दौरान सुभाष घई की भी एक फ़िल्म रिलीस हुई जिसका नाम था "HERO" ..जी हाँ जैकी श्रॉफ और मीनाक्षी शेषाद्रि की पहली फ़िल्म..ये जैकी श्रॉफ की डेब्यू फिल्म थी और सामने थे मेगा स्टार, बॉक्स ऑफिस के बादशाह और ऊपर से उनके एक्सीडेंट की वजह से इस फ़िल्म को देखने का लोगो मे क्रेज.. आप सोच सकते है के उस दौरान कोई और फ़िल्म सुपर हिट तो क्या चल भी पाए..तो दोस्तो ये चमत्कार असल मे हुआ था.. और फ़िल्म इंडस्ट्री को जैकी श्रॉफ हीरो के रूप में मिला।
दरअसल ये फ़िल्म कुली फ़िल्म के आगे पानी भी न मांग पाती अगर एक चमत्कार ना हुआ होता..दरअसल हुआ क्या पब्लिक थिएटर तो पहुंचती थी अमिताभ बच्चन की कुली फ़िल्म देखने के लिए.. लेकिन भीड़ इतनी होती थी के टिकट 2-3 दिन के बाद की भी नहीं मिलती थी तो उस समय थिएटर दूर दूर होते थे तो लोग भी दूर दूर से ही आते थे तो दर्शक सोचते थे के दूसरे थिएटर में HERO फ़िल्म लगी है अब आये है तो वी ही फ़िल्म देख लेते है.. फ़िल्म असल मे अछी भी थी.. उस फिल्म में शम्मी कपूर थे संजीव कुमार थे मीनाक्षी थी और उस फिल्म के गाने तो बाकमाल थे जो आज भी सुनने को मिल जाते हैं.. तू मेरा हीरो है, तू मेरा दिलबर है....याद तो होगा ही आपको... आहिस्ता आहिस्ता लोगो ने ही इस फ़िल्म की मशहूरी शुरू कर दी..लोग जब कुली फ़िल्म ना देख पाने की मायूसी के साथ वापिस घरों को जाने वाले होते तो कोई ना कोई उन्हें कह देता के हीरो फ़िल्म भी बहुत अछी है..आये हो तो वो फ़िल्म देखलो.. हुआ ये के अमिताभ बच्चन की चोट और हीरो फ़िल्म के म्यूजिक की वजह से पब्लिक दोनों फिल्मों में बट गयी जिसका फायदा दोनों फिल्मों को हुआ ..कुली फ़िल्म तो हिट होनी ही थी साथ साथ HERO फ़िल्म भी सुपर हिट हो गयी और बॉलीवुड को जैकी श्रॉफ जैसा एक और सुपरस्टार मिल गया और इस फ़िल्म के वाद जैकी श्रॉफ का कैरियर शुरु हुआ.. ऐसा ज्यादातर मैगज़ीन बोल रहे थे उस दौर के...क्या आप भी ऐसा कह सकते है के अमिताभ बच्चन के एक्सीडेंट की वजह से जैकी श्रॉफ का कैरियर भी बन गया ??

1 जनवरी 1951 को पैदा हुए विश्वनाथ पाटेकर को दुनिया नाना पाटेकर के नाम से जानती है। इरफान खान के अलावा नाना अकेले ऐसे एक्...
08/08/2023

1 जनवरी 1951 को पैदा हुए विश्वनाथ पाटेकर को दुनिया नाना पाटेकर के नाम से जानती है। इरफान खान के अलावा नाना अकेले ऐसे एक्टर है जिन्होंने एक्टिंग की तीन कैटेगरी में अवार्ड जीते है। परिंदा (1990) के लिए उन्हे बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का फिल्मफेयर,अंगार (1992) के किए बेस्ट विलेन और क्रांतिवीर (1995) के लिए उन्हे बेस्ट एक्टर का फिल्मफेयर मिला था। नाना की एक्टिंग की रेंज उन्हे खास बनाती है, नाना को आज तक न तो हीरो का तमगा दिया गया है, ना विलेन का, ना कॉमेडियन का नही साइड हीरो का, पर सबको भरोसा है कि नाना जो भी रोल करेंगे उसे खास बना देंगे। फिल्मफेयर के अलावा नाना को उनकी एक्टिंग के लिए तीन नेशनल अवार्ड भी मिले है। इसके अलावा नाना पद्मश्री से भी सम्मानित है। इतने मान सम्मान और पुरुस्कारो से सम्मानित नाना के लिए उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा अवार्ड एक डायरी है।

नाना शुरू से ही सत्यजीत रे के सिनेमा के बड़े फैन थे, जब वो सिनेमा में आए तो उनका एक ही सपना था कि किसी तरह से वो सत्यजित रे के डायरेक्शन में एक्टिंग करे। दुर्भाग्यवश नाना का सपना तब टूट गया जब 1992 में सत्यजीत रे की मृत्यु हो गई। कुछ दिन बाद नाना से किसी ने कहा कि सत्यजीत रे की पर्सनल डायरी में रे ने नाना के बारे में लिखा है कि "उनकी इच्छा है कि वो नाना पाटेकर के साथ काम करे"। जीवन के सबसे बड़े सपने के टूटने के बाद ये खबर नाना के लिए संजीवनी थी। इस बात का जिक्र करते हुए नाना ने एक इंटरव्यू में कहा था कि उनके जीवन के सारे पुरुस्कार और सम्मान से बड़ा उनके लिए सत्यजीत रे की डायरी में उनके लिए लिखी ये एक लाइन है।

सत्यजीत रे ब्लॉकबस्टर नही बनाते थे, वो बस सिनेमा बनाते थे, नाना को सत्यजीत के साथ साल की सबसे कमाई वाली फिल्म नहीं करनी थी, नाना सत्यजीत के साथ वो फिल्म करना चाहते थे जिसे सालो याद किया जाएगा। सत्यजीत रे की आखिरी हिंदी फिल्म शतरंज के खिलाड़ी थी। इस फिल्म में लीड रोल संजीव कुमार ने निभाया था, संजीव की मृत्यु के बाद नाना ही वो एक्टर थे जिन्होंने हीरो की इमेज बिल्डिंग के बजाय कैरेक्टर रोल निभाने पर ध्यान दिया। संजीव कुमार के बाद नाना ही ऐसे एक्टर थे जिनके पास रेंज थी, उनके समकालीन ओम पुरी और नसीर साहब जिस समय दर्शको को हिंदी सिनेमा में रीयल सिनेमा और कमर्शियल सिनेमा का फर्क समझा रहे थे, उस वक्त नाना पाटेकर क्लास और कमर्शियल के बीच का पुल बने हुए थे।

एक डायरेक्टर जो अब दुनिया में नही है, जिससे किसी तरह का व्यापारिक मुनाफा नही होना है, उस डायरेक्टर की लिखी एक लाइन को अपने जीवन का सबसे बड़ा पुरुस्कार मानने वाले नाना को कभी इमेज, या काम मिलने न मिलने की चिंता नहीं रही। इस वजह से उन्होंने कम फिल्मे की पर ज्यादातर फिल्मों में नाना के निभाए रोल दर्शको के दिमाग में छपे हुए है। नाना को सिनेमा की बारीकी समझ है, जिसकी वजह से उन्होंने अपने करियर में कई कमजोर फिल्मे ठुकराई, पर अपनी शर्तो पर काम करते हुए नाना ने वो मुकाम हासिल किया है जिसके आस पास फिलहाल सिर्फ मनोज वाजपेयी ही नजर आ रहे है। बहुत टैलेंटेड एक्टर इस दौरान आए पर नाना की तरह फिल्म और रोल का चुनाव करने की समझ न होने की वजह से कुछ दिनों में टाइपकास्ट होते चले गए।

नाना को कभी भी कमर्शियल सिनेमा से परहेज नहीं था, उन्हे बस अच्छी कहानी में मजबूत रोल चाहिए था। अनीस बज्मी की वेलकम में जब उन्होंने उदय शेट्टी का रोल लिया तो सब यही सोच रहे थे कि अब तक सीरियस रोल करने वाले नाना इस मसाला फिल्म के लाउड कैरेक्टर को कैसे निभायेंगे। पर अनिल कपूर के साथ उदय और मजनू की जोड़ी ने जिस तरह से दर्शको का दिल जीता वो बेमिसाल है। नाना ने अपने फैंस को हमेशा कुछ नया कुछ अलग देने की कोशिश की है, जितनी तेजी और कुशलता से वो जॉनर स्विच करते है शायद ही कोई एक्टर कर पाए। वेलकम के अगले सिक्वेल में नाना की जगह किसी और एक्टर को लेना दुखद है, उदय शेट्टी के रोल को आप ध्यान से देखेंगे तो बहुत ज्यादा कॉमिक डायलॉग थे नही, पर नाना के एक्सप्रेशन, और अनिल कपूर के साथ उनकी टाइमिंग ने इस जोड़ी को अमर कर दिया। हो सकता है नाना ने खुद ही ये फिल्म छोड़ी हो, क्युकी नाना फिल्मों का चुनाव बहुत जिम्मेदारी से करते है, पर संजय दत्त और अरशद वारसी कितने काबिल एक्टर क्यू ना हो, नाना और अनिल कपूर की बनाई जगह को भरने की हैसियत उनमें भी नही है।

राजा के दरबार में.एक आदमी नौकरी मांगने के लिए आया! तो उस व्यक्ति से उसकी क़ाबलियत पूछी गई। तो वो बोला-मैं आदमी हो चाहे ज...
18/07/2023

राजा के दरबार में.
एक आदमी नौकरी मांगने के लिए आया! तो उस व्यक्ति से उसकी क़ाबलियत पूछी गई।

तो वो बोला-
मैं आदमी हो चाहे जानवर, उसकी शक्ल देख कर उसके बारे में बता सकता हूँ.!
राजा ने उसे अपने खास "घोड़ों के अस्तबल का इंचार्ज" बना दिया।

कुछ ही दिन बाद राजा ने उससे अपने सब से महंगे और मनपसन्द घोड़े के बारे में पूछा, तो उसने कहा..
घोड़ा नस्ली नही है.!

राजा को हैरानी हुई,
उसने जंगल से घोड़े वाले को बुला कर पूछा, उसने बताया घोड़ा नस्ली तो हैं, पर इसके पैदा होते ही इसकी मां मर गई थी।
इसलिए ये एक गाय का दूध पी कर उसके साथ पला बढ़ा है।
राजा ने अपने नौकर को बुलाया और पूछा तुम को कैसे पता चला के घोड़ा नस्ली नहीं हैं??
"उसने कहा- "जब ये घास खाता है तो गायों की तरह सर नीचे करके खाता है, जबकि नस्ली घोड़ा घास मुह में लेकर सर उठा लेता है।

राजा उसकी काबलियत से बहुत खुश हुआ,
उसने नौकर के घर अनाज ,घी, मुर्गे, और ढेर सारी बकरियां बतौर इनाम भिजवा दिए।
और अब उसे रानी के महल में तैनात कर दिया।
कुछ दिनो बाद राजा ने उससे रानी के बारे में राय मांगी,
उसने कहा,
"तौर तरीके तो रानी जैसे हैं, लेकिन पैदाइशी नहीं हैं।
राजा के पैरों तले जमीन निकल गई, उसने अपनी सास को बुलाया,

सास ने कहा..
ये हक़ीक़त है कि आपके पिताजी ने मेरे पति से हमारी बेटी की पैदाइश पर ही रिश्ता मांग लिया था,लेकिन हमारी बेटी 6 महीने में ही मर गई थी, लिहाज़ा हम ने आपके रजवाड़े से करीबी रखने के लिए किसी और की बच्ची को अपनी बेटी बना लिया।

राजा ने फिर अपने नौकर से पूछा,
"तुम को कैसे पता चला??

""उसने कहा-
"रानी साहिबा का नौकरो के साथ सुलूक गंवारों से भी बुरा है,
एक खानदानी इंसान का दूसरों से व्यवहार करने का एक तरीका होता है,
जो रानी साहिबा में बिल्कुल नही है।

राजा फिर उसकी पारखी नज़रों से खुश हुआ,
और फिर से बहुत सारा अनाज भेड़ बकरियां बतौर इनाम दी।
साथ ही उसे अपने दरबार मे तैनात कर लिया!
कुछ वक्त गुज़रा,
राजा ने फिर नौकर को बुलाया, और अपने बारे में पूछा,
नौकर ने कहा
"जान की सलामती हो तो कहूँ”
राजा ने वादा किया तो उसने कहा, "न तो आप राजा के बेटे हो"
और न ही आपका चलन राजाओं वाला है।

राजा को बहुत गुस्सा आया,
मगर जान की सलामती का वचन दे चुका था, राजा सीधा

अपनी मां के महल पहुंचा...मां ने कहा,
ये सच है,
तुम एक चरवाहे के बेटे हो, हमारी औलाद नहीं थी, तो तुम्हे गोद लेकर हम ने पाला।
राजा ने नौकर को बुलाया और पूछा,
बता, "भोई वाले तुझे कैसे पता चला???
उसने कहा
जब राजा किसी को "इनाम दिया करते हैं, तो हीरे मोती और जवाहरात की शक्ल में देते हैं।
लेकिन आप भेड़, बकरियां, खाने पीने की चीजें दिया करते हैं।
ये रवैया किसी राजा का नही, किसी चरवाहे के बेटे का ही हो सकता है।

किसी इंसान के पास कितनी धन दौलत, सुख समृद्धि, रुतबा, बाहुबल हैं ये सब बाहरी दिखावा हैं।

इंसान की असलियत की पहचान,
उसके व्यवहार और उसकी नियत से होती है।

अभिनेता धर्मेंद्र की शादी उनके फिल्मों में आने से पहले हो गई थी, 26 साल तक उनकी पहली पत्नी उनके साथ रही, चार बच्चे भी हु...
15/07/2023

अभिनेता धर्मेंद्र की शादी उनके फिल्मों में आने से पहले हो गई थी, 26 साल तक उनकी पहली पत्नी उनके साथ रही, चार बच्चे भी हुए। हर दुख सुख में, धर्मेंद्र के अभिनेता बनने में उनकी पत्नी ने साथ दिया और उन्हें फ़िल्म इंडस्ट्री में स्थापित हो जाने दिया।
फिर बड़ा अभिनेता बनते ही धर्मेंद्र ने 1980 में हेमा से बिना पहली पत्नी को तलाक दिये इस्लाम अपना के शादी कर ली । पहली पत्नी पर क्या गुजरी होगी आप समझ सकते हैं।
नेता रामविलास पासवान ने भी अपनी पहली पत्नी जिसने उनका साथ गरीबी में दिया और नेता बनने के दौरान घर परिवार संभाला उसे बड़ा नेता बनते ही छोड़। रामविलास पासवान ने अपनी पहली शादी के 23 साल बाद रीना शर्मा से दूसरी शादी कर ली और पहली पत्नी को छोड़ दिया। वह अब भी अपनी बेटियों के साथ गरीबी में जी रही है।
आप खोजेंगे तो ऐसे हजारों उदाहरण मिल जाएंगे ..... सवर्ण, दलित, मुस्लिम सभी में।
एक वाले को तो आप सब जानते ही हो जो अपनी पत्नी छोड़ राजा बन गया और पत्नी उसी हाल में हैं।
कोई महिला एसडीएम बनने के बाद भी पहली शादी को त्याग सकती है तो कोई पुरुष सफल नेता/ अभिनेता बनने के बाद अपनी पहली पत्नी को।
क्या ये मानवीय दोष है!!
इस पर जाति/धर्म/महिला/पुरुष को लेकर बहस बेकार है!!!!

एक बढ़ई किसी गांव में काम करने गया, लेकिन वह अपना हथौड़ा साथ ले जाना भूल गया। उसने गांव के लोहार के पास जाकर कहा, 'मेरे ...
08/07/2023

एक बढ़ई किसी गांव में काम करने गया, लेकिन वह अपना हथौड़ा साथ ले जाना भूल गया। उसने गांव के लोहार के पास जाकर कहा, 'मेरे लिए एक अच्छा सा हथौड़ा बना दो।

मेरा हथौड़ा घर पर ही छूट गया है।' लोहार ने कहा, 'बना दूंगा पर तुम्हें दो दिन इंतजार करना पड़ेगा।

हथौड़े के लिए मुझे अच्छा लोहा चाहिए। वह कल मिलेगा।'

दो दिनों में लोहार ने बढ़ई को हथौड़ा बना कर दे दिया। हथौड़ा सचमुच अच्छा था। बढ़ई को उससे काम करने में काफी सहूलियत महसूस हुई। बढ़ई की सिफारिश पर एक दिन एक ठेकेदार लोहार के पास पहुंचा।

उसने हथौड़ों का बड़ा ऑर्डर देते हुए यह भी कहा कि 'पहले बनाए हथौड़ों से अच्छा बनाना।' लोहार बोला, 'उनसे अच्छा नहीं बन सकता। जब मैं कोई चीज बनाता हूं तो उसमें अपनी तरफ से कोई कमी नहीं रखता, चाहे कोई भी बनवाए।'

धीरे-धीरे लोहार की शोहरत चारों तरफ फैल गई। एक दिन शहर से एक बड़ा व्यापारी आया और लोहार से बोला, 'मैं तुम्हें डेढ़ गुना दाम दूंगा, शर्त यह होगी कि भविष्य में तुम सारे हथौड़े केवल मेरे लिए ही बनाओगे। हथौड़ा बनाकर दूसरों को नहीं बेचोगे।'

लोहार ने इनकार कर दिया और कहा, 'मुझे अपने इसी दाम में पूर्ण संतुष्टि है। अपनी मेहनत का मूल्य मैं खुद निर्धारित करना चाहता हूं। आपने फायदे के लिए मैं किसी दूसरे के शोषण का माध्यम नहीं बन सकता।

आप मुझे जितने अधिक पैसे देंगे, उसका दोगुना गरीब खरीदारों से वसूलेंगे। मेरे लालच का बोझ गरीबों पर पड़ेगा, जबकि मैं चाहता हूं कि उन्हें मेरे कौशल का लाभ मिले। मैं आपका प्रस्ताव स्वीकार नहीं कर सकता।'

सेठ समझ गया कि सच्चाई और ईमानदारी महान शक्तियां हैं। जिस व्यक्ति में ये दोनों शक्तियां मौजूद हैं, उसे किसी प्रकार का प्रलोभन अपने सिद्धांतों से नहीं डिगा सकता.....!!

एक बार भगत सिंह रेलगाड़ी से कहीं जा रहे हैं थे।एक स्टेशन पर गाड़ी रुकी तो भगत सिंह पानी पीने के लिए उतरे।पास के ही एक कुँए...
02/07/2023

एक बार भगत सिंह रेलगाड़ी से कहीं जा रहे हैं थे।एक स्टेशन पर गाड़ी रुकी तो भगत सिंह पानी पीने के लिए उतरे।

पास के ही एक कुँए के पास गये और पानी पिया। तभी उनकी नजर कुछ दूर पर खड़े एक शख्स पर पड़ी जो धूप में नंगे बदन खड़ा था और बहुत भारी वजन भी अपने कंधे पर रखा था।

तरसती हुई आंखों से पानी की ओर देख रहा था
मन में सोच रहा था शायद मुझको थोड़ा पानी पीने तो मिल जाए।भगत सिंह उसके पास गए और पूछने लगे आप कौन हो और इतना भारी वजन को धूप में क्यों उठाये खड़े हो।

तो उसने डरते हुए कहा साहब आप मुझसे दूर रहे नहीं तो आप अछूत हो जायँगे क्योंकि मैं एक बदनसीब अछूत हूँ।

भगत सिंग ने कहा आपको प्यास लगी होगी
पहले इस वजन को उतारो और मैं पानी लाता हूं
आप पानी पी लो।भगत सिंह के इस व्यवहार से वह बहुत खुश हुआ।

भगत सिंह ने उसको पानी पिलाया और फिर पूछा आप अपने आपको अछूत क्यों कहते हो
तो उसने हिम्मत करते हुए जबाब दिया -
अछूत मैं नहीं कहता अछूत तो मुझको एक वर्ग विशेष के लोग बोलते हैं और मुझसे कहते हैं आप लोग अछूत हो।तुमको छूने से हमारा धर्म भ्रष्ट हो जाएगा और मेरे साथ जानवरों जैसा सलूक करते हैं।

आप ने तो मुझको पानी पिला दिया नहीं तो मुझको पानी भी पीने का अधिकार नहीं हैं और न ही छाया में भी खड़े होने का अधिकार हैं और न ही सार्वजनिक कुँए से पानी पीने का अधिकार हैं।

तब भगत सिंह को आभास हुआ

मुझको तो बचपन से यही बताया गया हैं की देश अंग्रेजों से गुलाम हैं पर ये तस्वीर तो कुछ और ही बयां करती है।देश तो एक वर्ग विशेष के धर्मवादियों का गुलाम हैं जो धर्म के नाम भारत को मूर्ख बनाये हुए हैं।

तभी भगत सिंह सोचने लगे देश अग्रेजों से आजाद होकर भी गुलाम रहेगा क्योंकि इन अछूतों को कौन आजाद कराएगा।

फिर भगत सिंह ने इस बात को लेकर अध्यन किया और फिर सोचने लगे इनकी ऐसी हालत कैसे हुई।भगत सिंह ने "मैं नास्तिक क्यों" पुस्तक में लिखा हैं-
मैं तो नकली दुश्मनो से लड़ रहा था,असली दुश्मन तो मेरे देश में हैं।

ये बात भगत सिंह शायद न कहते और न अपनी जेल डायरी में लिखते तो शायद फांसी न होती।

संदर्भ: भगतसिंह की जेल डायरी

जायदाद का बटवारा    's
20/06/2023

जायदाद का बटवारा 's

20/05/2023

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