jyoti prakash "joji"

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jyoti prakash "joji" poet from jabalpur ,now living in London

Kavi sammelan....at Doha qatar
04/08/2025

Kavi sammelan....at Doha qatar

23/06/2025

कुछ सवाल जवाब नहीं माँगते, बस समझने वाले दिल माँगते हैं।

जोजी🌹

11/05/2025

ग़म ए दिल आश्ना नहीं होता
वो जो मुझसे ख़फ़ा नहीं होता

तेरी यादें हैं ग़म से वाबस्ता
ग़म ये दिल से जुदा नहीं होता

वो जो दहशत तमाम करते हैं
उनका मज़हब जुदा नहीं होता .

दिल ख़सारे में ही रहा हरदम
हमसे सौदा खरा नहीं होता .

चश्म ए बीना की बात है जोजी
वैसे कुछ भी बुरा नहीं होता .

जोजी🌹

11/05/2025

जैसे बेखुद से हो इक डगर पूछना
एक बंजारे से यानि घर पूछना .

चापलूसों से तुम पूछते हो अना
बेज़मीरों से जैसे हो सर पूछना.

जोजी🌹

09/05/2025

मित्रवत अग्रज स्व. श्याम श्रीवास्तव जी की पंक्ति से प्रेरित ये ग़ज़ल उनको श्रद्धांजलि स्वरुप ....

गर उनको भूल जाएँ तो गंगा नहाएं हम
उनको न याद आएं तो गंगा नहाये हम.

उनको मनाते हमको तो अरसा गुज़र गया
वो हमको भी मनाये तो गंगा नहाये हम.

फ़ुर्क़त में उनकी करवटें बदली हैं बेहिसाब
उनको भी कुछ सताएं तो गंगा नहाये हम .

नफरत की बहर में भी लिए प्यार की रदीफ़
कुछ शेर जो सुनाएँ तो गंगा नहाये हम .

गम की अँधेरी रात है तो जोजी यूँ करें
कुछ दीपों को जलाएं तो गंगा नहाये हम.

जोजी🌹

08/05/2025

किसने ये ज़िंदगी के अज़ब ढब बना दिए
मरने के कैसे कैसे ये करतब बना दिए.

इन्सां की तरह खून के प्यासे है जानवर
जंगल में लोमड़ी ने दो मज़हब बना दिए.

अब तो खुदा का नाम बहाना सा हो गया
मज़हब के नाम जुर्म के मक़तब बना दिए.

दो मिलके भी ला सकते हैं मुस्कान इक नई
उसने बताने वास्ते दो लब बना दिए .

लफ्ज़ों ने ही तो नाम मज़ाहिब को दे दिए
ये लफ़्ज़ तूने खामखां क्यों रब बना दिए.

जोजी🌹

07/05/2025
06/05/2025

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Thankyou

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