22/11/2025
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खोल अपने पंख ज़रा, अभी खुला आसमान है,
हार से क्यों डरता है तू, आगे बड़ा इम्तिहान है।
विश्वास की लौ जलाए रख, मंज़िल तेरे साथ है,
सच्चाई से जो चलता है, वही सबसे ख़ास है।
वक़्त की नज़ाकत समझ, क्यों होता परेशान है,
मेहनत की नदिया बहा, जब तक तुझमें जान है।
हौसला रख सीने में, दिल में बड़ा अरमान है,
राह में रुकना कैसा, तू खुद ही अपनी शान है।
कदम बढ़ा तू हिम्मत से, किस बात का नुकसान है,
मंज़िल तेरे क़दमों पर, बस मेहनत का विधान है।
जितना डालेगा तू जोर, उतना ही परिणाम है,
जिसने ठाना जीत सके, उसका ही पहचान है।
सपनों की रौशनी में, बसा हुआ एक जहान है,
जो थक के बैठ जाए, उसके लिए ही नुकसान है।
जीत की पहली सीढ़ी, बस मजबूत इरादा जान है,
जिसने दिल से कोशिश की, उसका ही सम्मान है।
चलता रह यूँ ही आगे, किस्मत तेरे संगदान है,
मेहनत की पगडंडी पर, सफलता का सामान है।
Mohammad imran siwani